इतना सम्मान सा शोर क्यों है

कुछ पंक्तिया मित्रो प्रेषित कर रहा हूँ नारी की विरह वेदना और समाज के कुरीतियों के बीच (एक छोटा प्रयास)
काव्य सृजन ————————————————-

इतना सम्मान सा शोर क्यों है क्यों नहीं मिटता बेइज्जती का दौर क्यों है??
क्यों नहीं उठती सहसा आवाज सी उन भीड़ में अक्सर क्यों यह वेदना सिर्फ कुछ तेरी कुछ मेरी पर रोता कोई और नहीं है चंद सियासी खबरों पन्ने कुछ अख़बारों से लिखता है अल्फाज समाज में मिटता यह क्यों दौर नहीं है ???
बेशर्म सा अट्टहास लिए यह पुरुष घूमता सा इस अर्धनग्न सी परिभाषाओं में कुछ उलझता सा उलझाता सा सिमट जाता अश्को में यह दौर क्यों है????
उठो अब तुम कर दो आगाज एक अम्बिका सा कर दो कुछ छिन्न भीन्न सा अपने ओझल होते हुए सम्मान सा एक आग सी तुझमे तपन का दौर क्यों नहीं है???

#पार्थ मनोज राजदेव

Comments

2 responses to “इतना सम्मान सा शोर क्यों है”

  1. Kamal Tripathi Avatar
    Kamal Tripathi

    बेहतरीन 🙂

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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