जिंदगी हौंसला जब टूटकर चूर हो जाए।
शख़्स कैसे न यहाँ कोई मजबूर हो जाए।।
‘
जिंदा रहूँगा आखिर कब तक इस दुनिया में।
जब दिलो की धड़कन ही दिलो से दूर हो जाए।।
,
और सच का मुखौटा पहनकर झूठ बोलतें हो।
ख़ामोश ही रहना जब मय का सुरूर हो जाए।।
‘
फ़रेब करने की अपनी फ़ितरत बदल डालो।
वरना कही ज़माने भर का न ये दस्तूर हो जाए।।
,
रंज नहीं की कौन खतावार था सजा किसको।
अफ़सोस की सच बोलना जब कसूर हो जाए।।
‘
वफ़ा का सिला कुछ इस क़द्र मिला की क्या कहे।
साहिल कोई दौलत के नशे में जब मगरूर हो जाए।।
@@@@RK@@@@
जिंदगी हौंसला जब टूटकर चूर हो जाए
Comments
6 responses to “जिंदगी हौंसला जब टूटकर चूर हो जाए”
-
Asm
-
Thanks
-
-

nice
-
Thanks
-
-

वाह
-
🙏🙏
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.