हर आग को बुझा दे वो पानी नहीं हो तुम ,
जो हमेसा याद रहे वो कहानी नहीं हो तुम !
अभी तक न जाने कितने आये और चले गये ,
जो मुझे मदहोश कर दे वो जवानी नहीं हो तुम !!
वक्त के साथ जो बदल दे वो रवानी नहीं हो तुम,
मेरे दिल में बसने वाली भी रानी नहीं हो तुम !
वक्त है जरा मेरी बातों को समझ भी लेना ,
किसी तख़्त पे बैठने वाली महारानी नहीं हो तुम !!
जो मुझे पसंद आये वो बिरयानी नहीं हो तुम,
जो जकड़ के मुझे रोक ले वो हिमानी नहीं हो तुम!
वक्त की लाठी में आवाज कहा होती है ,
इस बात को समझने वाली आडवाणी नहीं हो तुम !!
नहीं हो तुम
Comments
4 responses to “नहीं हो तुम”
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WAAH
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AABHAR BHAI 🙂
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वाह बहुत सुंदर रचना
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Great
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