मैं करता हूँ तुमसे मोहब्बत,
अब खुद को सताना बंद करो !
देता हूँ खूने ए दिल तुम्हे,
हाथों में मेहंदी रचाना बंद करो !!
जो हुये हैं गीले सिकवे ,
उनका इल्जाम लगाना बंद करो !
मुझसे बात करने का अब,
अपना अंदाज पुराना बंद करो !!
मुझसे यूँ ही रूठकर अब,
आंसुओं को बहाना बंद करो !
जरा चैन से सोने भी दो,
अब सपनों में आना बंद करो !!
मेरे साथ ही रहकर अब,
मुझको रुलाना अब बंद करो !
जिन बातों से चोट लगे,
उन शब्दों का आना बंद करो !!
बंद करो
Comments
5 responses to “बंद करो”
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nice
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Thank You
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nice
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Thank You Mam 🙂
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वाह बहुत सुंदर
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