मुक्तक

टूट रहा हूँ मैं गमे-अंजाम सोचकर!
टूट रहा हूँ मैं गमे-नाकाम सोचकर!
मंजिल डरी हुई है दर्द-ए-बेरुखी से,
तेरी बेवफाई का पैगाम सोचकर!

मुक्तककार- #महादेव’

Comments

3 responses to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Wow

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