जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है!

जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है!

है अधूरी कहानी जख्म ही जख्म है !!

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न तुमने कहा कुछ न हमने कहा कुछ!

बढी फिर भी दूरी ये वहम ही वहम है‌‌‍!!

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कहीं तिरगी है और कहीं तन्हा राते !

कहीं पर है महफिल जश्न ही जश्न है!!

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न वक़्त तुमको मिला न हमको मिला!

जो दिल मे थी बातें दफ्न की दफ्न है!!

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सदिया है गुजरी ना है आहट ही कोइ!

ना साहिल को ही कोई ‌रंज ओ गम है!!

@@@@ RK@@@@

 

Comments

6 responses to “जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है!”

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      Thanks

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      Thanks

  1. Abhishek kumar

    Waah

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