मुर्दों को उठाने चलें है “रहस्य “देवरिया

मुर्दों को उठाने चलें है ” रहस्य “देवरिया

अफ़सोस की हम सबको जगाने चलें है ,
हाँ ये सच है की मुर्दों को उठाने चलें है,,

हर हिन्दू मस्त है अपनें मे जमाने से बेखबर ,
उनको आनें वाली सच्चाई अब दिखाने चलें है,,

निंद मे हो तो मौत की निंद सूला दिये जावोगे ,
सपनो से जगा के सच से रूबरू कराने चलें है,,

वो एक होते जा रहे छोटा बड़ा सब भूलकर,
एक हम उच नीच जाती के नाम से लड़ते चलें है ,,

“रहस्य “देवरिया

Comments

2 responses to “मुर्दों को उठाने चलें है “रहस्य “देवरिया”

  1. Abhishek kumar

    Good

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