आपकी मुसकान

आपकी
मुसकान के
आधीन,
यह दिल हो चुका ।
अब नाजा
जीते जी
कभी भी
हो सके आजाद यह ।
अब
इवादत
प्यार की ,
करता रहेगा उम्र भर ।
इनायत
या शिकायत
की.,
करेगा फरियाद यह ।

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