छलावा

संवेदनाएँ भी अपना अस्तित्व भूल गई हैं,
शायद वेदनाएँ मुखौटा पहन कर मिली होंगी उनसे।

Comments

4 responses to “छलावा”

  1. Lucky Nimesh Avatar

    बहुत बहतरीन मेरी रचना प्रतियोगिता में है आप कमेन्ट करें

  2. Abhishek kumar

    Very nice

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