मन थिरक उठो

*मन थिरक उठो…”*
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कभी पुराने नहीं रहेंगे
ये रसभरे , सुरीले गीत ।
सदा नयापन। देंगे मन को ,
यह है इन गीतों की रीत।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

Comments

3 responses to “मन थिरक उठो”

  1. Anirudh sethi Avatar
    Anirudh sethi

    shaandaar sir

  2. Abhishek kumar

    Good

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