मित्रता के तख्त पर

**मित्रता के तख्त पर”**
मधुर प्रातः स्मरण ”

नित शाखें प्यार की हैं झूमती ,
हर जिंदगी के. दरख्त पर ।
हर सुवह शाम की दुआ-सलाम,
करते है मित्रता के तख्त पर ।

जानकी प्रसाद विवश
प्यारे मित्रो ,
मधुर सवेरे की हार्दिक मंगलकामनाएँ ,
सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें ।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

Comments

3 responses to “मित्रता के तख्त पर”

  1. DV Avatar

    wonderful lines… refreshing as usual

  2. Abhishek kumar

    Good

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