अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ

अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ
ले समसीर लेखनी की मै रण नवगीत सुनाता हूँ
माँ वीणा पाणी के चरणो मे मै शीश झुकाता हूँ
माँ रणचंडी के झंकृत की मै झनकार सुनाता हूँ

मै गायक हू नही किसी प्रेमी के अमर कहानी
नही किसी लैला , मंजनू के अधरो भरी जवानी का
न ही कवि हू मै , रांझा के अमर प्रेम कुर्बानी का
मै तो चारण हूँ झाँसी की रानी की कुर्बानी का

मै यथार्थ कवि हूँ, भारत के अमर वीर नवदूतो का
मै कवि हूँ राजस्थानी उस राणा के करतूतो का
मै तो कवि हूँ बीर शिवा सम जंगी अमर सपूतो का
मै कवि हूँ तलवारो का, कुर्बानी के राजपूतो का

कर्जदार हूँ , गुरू गोबिंद की बलिदानी परिपाटी का
मेरा गीत चरण रज है बस , भारत माँ की माटी का
मेरा गीत चरण रज है बस, भारत माँ की माटी का

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