नमस्कार दोस्तों आप सब देख रहे हैं आज कल बच्चियों के साथ कुछ बहेशी दरिन्दे जो कर रहे हैं दो शब्द आज लिखने पर मजबूर हो गया
ऐसे कुकर्म करते जरा भी शर्म क्या तुझे नहीं आई।
उसे देख तुझे अपनी बेटी याद क्या तुझे नहीं आई।।
“” “” ”
चिखती चिल्लाती तो कभी दर्द से कराहती भी होगी।
उस मासूम पर जरा सा भी रहेम क्या तुझे नहीं आई।।
” “” “”
वो तुझे चाचा भईया या पिता समझ कर आई होगी ।
उसकी आंखों में ये रिश्ते भी नजर क्या तुझे नहीं आई।।
“” “” “”
किस कदर घुट घुट कर तोड़ा होगा दम उसने अपना।
हवस बुझाते हुए इन्सानियत याद क्या तुझे नहीं आई।।
“” “” “”
ऐसे कूकर्म करते जरा भी शर्म क्या तुझे नहीं आई।।।
” रहस्य ” देवरिया
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