एक उम्मीद फिर हाथ से छुट गयी,
देखते ही देखते एक और रिस्ता टुट गई।
इस तरह तोड़ा है—
मतलबी दुनिया मेरा दिल ।
अब जिन्दगी भी हमसे ऱूठ गयी।।
एक उम्मीद फिर से छुट गई।
Comments
7 responses to “एक उम्मीद फिर से छुट गई।”
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nice
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Thanks
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Very nice
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Thanks sir
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Waah
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धन्यवाद सर
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बहुत सुन्दर
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