चाहत

इस मतलबी शहर को छोड़कर भाग जाने का
” दिल चाहता”;
लेकिन भाग कर कहाँ जाऊँ—–
कही भी जाना होगा मतलबी शहर मे जाना होगा ।
लग रहा इसी” नरक” मे जीवन बीताना होगा;
बार–बार होती है ऐसी चाहत मौत के सिवा कोई ना मिला “रास्ता” दुसरा चाह।

ज्योति

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