आवाज को नहीं, अपने अलफ़ाज़ को ले जाओ बुलंदी पर
बादलों की गरज नहीं, बारिश की बौछार फूल खिलाती है
आवाज को नहीं, अपने अलफ़ाज़ को ले जाओ बुलंदी पर
Comments
5 responses to “आवाज को नहीं, अपने अलफ़ाज़ को ले जाओ बुलंदी पर”
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वाह
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awesome lines sir
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बहुत अच्छा
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बहुत बढ़िया
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वाह बहुत सुंदर
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