बेटी से सौभाग्य

बेटी है लक्ष्मी का रुप,
मिलतीं है सौभाग्य से,
घर का आंगन खिल जाता है,
उसकी पायल की झन्कार से।
बेटी ही तो मां बनकर,
हमको देती नया जनम,
सम्मान करें हर बेटी का,
यह है हर मानव का धरम,
जनम न दोगे बेटी को तो,
संसार ये रुक जाएगा,
बिन बेटी के, बेटे वालो,
बेटा न हो पाएगा।

Comments

11 responses to “बेटी से सौभाग्य”

  1. ashmita Avatar

    बहुत प्यारी कविता

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

  4. Kanchan Dwivedi

    Nice

  5. Satish Pandey

    बहुत खूब

  6. Abhishek kumar

    👏👏

  7. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  8. Pragya Shukla

    Beautiful poem

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