मुक्तक

मैं जब कभी तेरी तस्वीर देख लेता हूँ।
मैं अपने ख़्यालों की तक़दीर देख लेता हूँ।
ख़्वाबों के समन्दर में उठती है चिंगारी-
मैं तेरी अदाओं का तीर देख लेता हूँ।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

6 responses to “मुक्तक”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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