बुझते चराग

बुझते चराग है हम, हवा न दो
सारा शहर जला देंगे
खुद को शेर समझने वाले, कभी
लड़कर देखो तुम्हे गीदड़ बना देंगे
है शक्ति इतनी मुझमें की, तुम कहो
तो कांटो के शहर में फूल सजा देंगे
बुझते चराग है…………

Comments

3 responses to “बुझते चराग”

    1. Ravi Bohra Avatar
      Ravi Bohra

      Thank you sir 🙇🙇

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