Ravi Bohra, Author at Saavan's Posts

बाजार

जिस्म के बाजारों में इंसानियत बिका करती है मौजकी के आड़ में हैवानियत की मेहफ़िले सजा करती है दाम यहाँ शरीर का नहीं स्वाभिमान का लगाया जाता है इसी बाजार में न जाने कितने रिश्तो की आग जला करती है तू खरीद सकता है जीत नहीं सकता तू इज्जत बैच सकता है फिर कमा नहीं सकता यह बाजार ही मानवता का है जनाब तू रिश्ते बना सकता है पर निभा नहीं सकता »

जुल्फ़े

इन खुली जुल्फों में न जाने कितने राज छुपे होते है कभी चाँद कभी रातें तो कभी तारे फूल बनके सजे होते है वो लट आँखों से होठो तक गुजर जाए तो संमा बदल देती है न जाने कितने लोगों के उस काली रात में ख्वाब जगे होते है इन खुली जुल्फों ने ज़माने को प्यार का कायल बना दिया लिखना मेरी फितरत में नही था लेकिन आपने मौसम को कातिल और मुझको शायर बना दिया »

जुल्फ़े

खुली जुल्फों में न जाने कितने राज छुपे होते है कभी चाँद कभी रातें तो कभी तारे फूल बनके सजे होते है वो लट आँखों से होठो तक गुजर जाए तो संमा बदल देती है न जाने कितने लोगों के उस काली रात में ख्वाब जगे होते है »

प्यार

हम उनसे प्यार और वो बेक़रार करते रहे कहना था कुछ और, और ही कुछ कहते रहे वो दौर-ए-जवानी मुझे सारा मेहखना दे रही थी लेकिन हम तो बस अपनी आँखों से ही पीते रहे निगाहों से कभी पीला कर तो देखो जुल्फों की रातो में किसी को सुला कर तो देखो ज़हर, नशा और काँटे, गुलाब लगने लगेंगे कभी मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो »

ख्याल

फूलों का रंग चुरा के उसने तुझे सजा दिया पानी को आग लगानेवाला अंगार बना दिया अपनी निगाहों से हवा का रुख जो मोड़ दे उस ऊपरवाले ने ना जाने कैस तुझे बना दिया »

भिखारी कौन है…

यह टूटे हुए घरों की कहानी है फुटपात पर बीती जिसकी जवानी है भीख मे बस वह इंसानियत मांगते रहते न जाने क्यों,आँखों में उनके आशाओं का पानी है मांग कर जिंदगी जीना किसी की लाचारी है लूटकर खाते वह आदरणीय भ्रष्टाचारी है कभी ऊपरवाले से कभी खुद से तो कभी जहां से मांगते आप ही बताओ कौन नहीं यहाँ भिखारी है यह टूटे हुए घरों की कहानी है फुटपात पर बीती जिसकी जवानी है………. »

बुझते चराग

बुझते चराग है हम, हवा न दो सारा शहर जला देंगे खुद को शेर समझने वाले, कभी लड़कर देखो तुम्हे गीदड़ बना देंगे है शक्ति इतनी मुझमें की, तुम कहो तो कांटो के शहर में फूल सजा देंगे बुझते चराग है………… »

सन्नाटा

रात के सन्नाटा मुझसे कुछ कह रहा था आज वो आंसू बनकर मेरी आँखों से बह रहा था सौ तो गए थे मेरे सब चाहने वाले बस वो ही अकेला मेरे साथ रो रहा था…….. »

भूल गयी

जख़्म तो बहुत दिए तुमने, मगर मलहम लगाना भूल गयी याद तो रोज आती थी आपको मेरी, लेकिन आँसु बहाना भूल गयी जब दुनिया में आपके पास कोई न हो तब मुझे बुला लेना लेकिन तब ये न कहना की तेरा नम्बर सेव करना भूल गयी »

प्यार

आँखों की खाई को तुमने बेहता समंदर बना दिया इस प्यार को ठुकराके, मुझे आवारा भवंडर बना दिया »

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