यह टूटे हुए घरों की कहानी है
फुटपात पर बीती जिसकी जवानी है
भीख मे बस वह इंसानियत मांगते रहते
न जाने क्यों,आँखों में उनके आशाओं का पानी है
मांग कर जिंदगी जीना किसी की लाचारी है
लूटकर खाते वह आदरणीय भ्रष्टाचारी है
कभी ऊपरवाले से कभी खुद से तो कभी जहां से मांगते
आप ही बताओ कौन नहीं यहाँ भिखारी है
यह टूटे हुए घरों की कहानी है
फुटपात पर बीती जिसकी जवानी है……….
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