अक़्ल

कुछ बेदर्द इंसानों ने अपनी अक्ल उतार कर रख दी,
मासूम ज़िन्दगी की आईने में शक्ल उतार कर रख दी,

दिन में लगे जो गहरे घावों की वस्ल उतार कर रख दी,
पुनर्जन्म के पन्नों की खुदरी नक़्ल उतार कर रख दी।।

राही अंजाना

वस्ल -मिलन( वस्ल की रात)

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