इस बार की होली पर अवगुण जलाये जाएंगे, हर जन मन के हृदय में सद्गुण सजाये जाएंगे। जो रूठ के बैठ गए थे कभी संग साथी अपने, लगाकर गले सब दुःख सन्ताप भुलाए जाएंगे। आएंगे […]
इस बार की होली पर अवगुण जलाये जाएंगे, हर जन मन के हृदय में सद्गुण सजाये जाएंगे। जो रूठ के बैठ गए थे कभी संग साथी अपने, लगाकर गले सब दुःख सन्ताप भुलाए जाएंगे। आएंगे […]
ऋतुराज बसंत फिर आया है, जड़ पतझड़ फिर मुस्काया है। पेड़ पर हैं नव कोपल फूटी, फिर कोयल ने राग सुनाया है। पिली – पिली सरसों लहराई, भीनी खुशबू को महकाया है। छिप कर के […]
खेतों से निकल कर सड़को पर क्यों उतर आना पड़ा, लाल किले पर उत्तेजित हो क्यों झण्डा लहराना पड़ा।। लेकर ट्रेक्टर रैली में बढ़ चढ़के क्यों डण्डा खाना पड़ा, रस्ते पर लगा टेण्ट रातों में […]
जख़्म तुझको मैं दिखा देता हूँ, दर्द अपना मैं भुला लेता हूँ। पास आकर जो बैठ जाते हैं, उनको अपना मैं बना लेता हूँ। कहते हैं मुझसे मन की अपनी, मैं भी मन उनसे लगा […]
सन् 2020 को विदा करते हैं, दुःखो को खुद से जुदा करते हैं। खुशियाँ का खुल के आगमन, हर इक से चलो वफ़ा करते हैं। सन् 2020…… वक्त कट गया मुश्किल था जो, इसे भूल […]
जब भी मनमोहन, श्याम सलोना, बंशीधर मुरली बजाने लगा, ह्रदय तल के धरातल पे वो प्रेम की ज्योति जलाने लगा, कभी गैयों और ग्वालों का प्यारा कन्हिया गोपियों संग रास रचाने लगा, कभी माँ जसोदा […]
तलाशी जिस्म की खुलेआम दे दी। सब दिखाया पर दिल दिखाया नहीं। ढूढ़ते रहे हार के लौटना पड़ा सबको, जब हाथ लगाया दिल धड़काया नहीं। ढूंढते ढूंढते रात दिन हाथ से निकले, रूह में रहे […]
नव वर्ष आने को है, कुछ भुलाने को है कुछ याद दिलाने को है, सच कहूँ तो हमे बहुत कुछ सिखाने को है, छुप गई थीं जो बातेँ बादल के पीछे कहीँ, उन उम्मीदों पर […]
मन्ज़िल की तलाश में खुद राहों को आना पड़ा, ख्वाबों की तलाश में जैसे आँखों को जाना पड़ा, चाँद सूरज जब रौशनी कर न सके मेरे दिल में, छोड़ कर घर अपना फिर जुगनुओं को […]
तुम मुझे ओढ़ लो और मैं तुम्हें ओढ़ लेता हूँ, सर्दी के मौसम को मैं एक नया मोड़ देता दूँ। ये लिहाफ ये कम्बल तुम्हें बचा नहीं पाएंगे, अब देख लो तुम मैं सब तुमपे […]
शब्दों से शब्द निकलते जाते हैं, रिश्ते रिश्तों को समझते जाते हैं, चलती है इसी रफ़्तार से ज़िन्दगी, राही हम सब आगे बढ़ते जाते हैं।।
रहम ओ करम तो खुदा के हाथ है, अब तुही बता मेरी क्या औकात है।। राही अंजाना
अभी तो बस अभ्यास चल रहा है, तेरी मोहब्बत का अध्याय चल रहा है।। राही अंजाना
तुझसे बिगड़ी हर बात सुलझा लूँ, आ मिल तेरे बालों में हाथ उलझा लूँ।। राही अंजाना
आस होगी न आसरा होगा, तेरे बिना मेरा क्या होगा।। राही अंजाना
तेरी बातें बखूबी बड़ी निराली रहीं, सुनकर उनको रातें मेरी खाली रहीं।। राही अंजाना
चुप मत रहो इतना के नाम गुम नाम हो जाये, तुम्हारे हिस्से की ज़मी किसी के नाम हो जाये, नाकामयाबी के सफर से बाहर निकल आओ, कहीं ऐसा न हो कामयाबी की शाम हो जाये।। […]
सबसे सबकुछ छुपाना अच्छा लगता है, तुमसे सबकुछ बताना अच्छा लगता है,
मुझे तुमसे मिलने में कोई मसला नहीं है, पर सच ये है के मेरे जेब में असला नहीं है। राही अंजाना
जिसको जो चाहिए मिल जाए तो कैसा हो, रिश्तों से छोटा गर पैसा हो जाए तो कैसा हो। राही अंजाना
दिल से निकलकर धड़कन बाहर आ गई, जिस पल से तुझसे मिला बहार आ गई।। राही अंजाना
दिल से अपनी मगर धकड़न से मैं पराई हूँ, न जाने किस घड़ी में, इस घर में मैं आई हूँ, आँखों ही आँखों में आँखों में मैं घिर आई हूँ, सबकी अपनी मगर न जाने […]
सहारा चाँद को भी एक दिन लगाने चल दिया, कुछ समझ आया नहीं बस समाझाने चल दिया, मैं ज़मी पर रहा और आसमाँ झुकाने चल दिया, उम्मीदों का रुका हुआ जहाज उड़ाने चल दिया।। राही […]
बात करने के कुछ इस तरह लोग बहाने ढूंढते हैं, के दिल में उतरने के लिए मानो तैखाने ढूंढते हैं।। भटकते हैं जो दर बदर नशे में घर अपना छोड़के, वो दूसरों की आँखों के […]
तू तो मेरी गलतियाँ ढूंढने में ही खो जायेगा, एक दिन मैं सबकी नज़रों में नज़र आऊंगा।। राही अंजाना
किसी के कहने से सुलझेगी नहीं, तेरी मेरी कहानी ये उलझेगी नहीं।। राही अंजाना
लिपट कर अपनी माँ से हर दर्द भूल जाता हूँ, इस जन्नत में दुनियाँ का नर्क भूल जाता हूँ।। राही अंजाना
निकल कर घोंसले से आ मुलाकात कर ले, मिलने की कहीं से तो आ शुरूवात कर ले। ढूंढते – ढूंढते थक हार कर बैठ गए हैं परिंदे, मुझे लगा गले और सुबह से आ रात […]
जो भी हो रहा है मेरे यार होने दो, जो जाग ही नहीं रहे उन्हें सोने दो, उतर जाने दो सवालों का पहिया, मेरे दिल को दिल से उत्तर देने दो, हँसने दो हालत पे […]
आवाज़ कोई भी होगी तुम तक जाने नहीं दूँगा, तुमको अपनी पकड़ से कहीं दूर जाने नहीं दूंगा, बड़ी मशक्कत के बाद मैंने तुम्हें कमाया है दोस्त, किसी के कहने से यूँहीं तुमको गवाने नहीं […]
वक्त वक्त पर वक्त का इम्तेहान लेते हो, तुम इस नादान से कितना काम लेते हो।।। राही अंजाना
बहुत ही बेकरारी बढ़ा दी तुमने, मोहब्बत की सीढ़ी चढ़ा दी तुमने।। राही अंजाना
बत्ती लाल नीली पीली का फर्क जानते नहीं, कुछ मेरे देश के युवा खुद को पहचानते नहीं, जिंदगी के चौराहे पर खड़े ट्रैफिक हवलदार, जैसे खुद के बनाये नियमों को मानते नहीं॥ राही अंजाना
बज़्म ए महफ़िल में तेरी घूमते मिलेंगे, थक जायेगें जो तेरी तस्वीर चूमते मिलेंगे, तू एक फूल है साथ रहे जब तक अच्छा है, वो गैरमौजूदगी में तेरी खुशबू सूँघते मिलेंगे, रातभर सोते रहेंगे जो […]
उड़ने नहीं दोगे आज तो कल उड़ना भूल जाएंगे, परिंदे अपनी ही शाख से मिल जुलना भूल जाएंगे, घर बनाने के हुनर के साथ जो पैदा हुए हैं बन्दे, गर पिंजरे में बन्द रहे तो […]
सीने पर पत्थर रख कर जीना सीख लिया, गरीब ने आसमाँ के छप्पर में रहना सीख लिया।।
पति के बटुए पर अक्सर ही नज़र टिकाई जाती थी, पति जो भी कमाये वो पत्नी हाथ कमाई जाती थी, भूख लगने पर रोटी जो चूल्हे में ही पकाई जाती थी, चार लोगों को बैठाकर […]
बस दो चार घड़ी का खेल नहीं, ये मोहब्बत है दोस्त जेल नहीं।। राही अंजाना
हर एक मोड़ पर नया सवाल खड़ा है, इस छोटी सी ज़िन्दगी में बबाल बड़ा है।। राही अंजाना
You are the guest, Just hold down n Rest, Do ur level best, N see what will happen next… Raahi anjana
हर रोज़ मन की गहराइयों में सिमट जाता है कोई, आकर अपनी ही परछाइयों से लिपट जाता है कोई।। राही अंजाना
कुछ बात बतानी है कुछ बात छुपानी है, लोगों को हर रोज नई कहानी सुनानी है, बा मुश्किल ही सही करनी मनमानी है, न दो कहनी किसीकी न चार लगानी है, चुप नहीं रहना कुछ […]
चाहें जहाँ भी छुपना चाहा हर बार पकड़ा गया, रास्ता साफ दिखने वाला भी अक्सर पथरा गया, बड़े प्यार से काम पर काम निकलता रहा पहले, फिर नज़रें मिलाने वाला भी बचकर कतरा गया, प्यार […]
जो बढ़ रहा है हाथ नापाक उसे तोड़ना होगा, हाथ मिलाया था जो बेशक उसे छोड़ना होगा, रच लिए बखूबी प्रपंच और चढ़ लिए ढेरों मंच, अब उतर कर जंग में इनका सर फोड़ना होगा, […]
राम – राम कहके ही मिलना अच्छा लगता है, राम – नाम का धागा ही एक सच्चा लगता है, पृथ्वी पर आने जाने का एक रस्ता दिखता है, मानव रूप में राम रंग ही एक […]
पृथ्वी के कण-कण में देखो एक राम समाये थे, मन के पावन मंदिर में सबने एक राम बसाये थे, छोड़ राज पाठ घर से जब जंगल में वो आये थे, चौदह वर्ष संघर्षों का जीवन […]
गर्भ के भीतर और बाहर का ज्ञान समाया है, मनोविज्ञान की शाखा में बालविज्ञान समाया है, बाल अवस्था से प्रौढ़ावस्था का भान कराया है, बालविज्ञान ने असहज को सहज कर दिखाया है, मस्तिष्क में चल […]
कोई तो करतब कोई तो जादू दिखलाना चाहिए, धरती पे रहने वालों को आसमां पे जाना चाहिए, बहाने बनाने को तो बैठे हो तुम हजार मेरे यार, कभी झूठ को भी सच्चा आईना दिखाना चाहिए, […]
कल-कल बहती नदिया कहलाती हूँ मैं, पृथ्वी के हर एक जीव को महकाती हूँ मैं, जोड़ देती हूँ जिस पल दो किनारों के तट, लोगों के लिए फिर तटिनी बन जाती हूँ मैं, सर- सर […]
के तेरे दर पे मैं खुल कर के सब अर्ज़ करता हूँ, के तुझको पाने की खातिर मैं खुद को यूँही खर्च करता हूँ।। राही अंजाना
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