राही अंजाना, Author at Saavan's Posts

चाँद

चाँद

आखिर कौन किसको देखने छत पर आया करता है, चाँद इस ज़मीं पे या उस आसमान पे छाया करता है, इंतज़ार कौन और किसका बड़ी बेसबरी से करता है, पहले अंधेरा या रौशनी कौन किसको पाया करता है, उम्र किसकी और कितनी बढ़ाने की चाहत में पागल, है कौन जो रात दिन यूँहीं पलकें झपकाया करता है।। राही अंजाना »

झांसा

उसका मेरे दिल में आना आसां लगता है, उसका मेरे दिल से जाना झांसा लगता है, ………… राही अंजाना »

अर्ज़ियाँ

मेंहमाँ हैं तेरे दर पे इस कदर सारी अर्ज़ियाँ मेरी इक तेरी इज़ाज़त पे कबूल होती हैं मर्ज़ियाँ मेरी।। राही अंजाना »

उपस्थिति

के तेरे दर पे मैं खुल कर के सब कुछ अर्ज़ करता हूँ, तुझको पाने की खातिर मैं खुद को यूँ खर्च करता हूँ, गर तू समझे मेरी खामोशी तो मुझे अच्छा लगता है, जो न समझे तू मुझको मैं तुझसे फिर तर्क करता हूँ, तेरी ख्वाइशों की फहरिस्त पूरी करने की चाहत में, मैं अपने – अपनों से क्या गैरों से भी क़र्ज़ करता हूँ, मुलाक़ात हो नहीं पाती जब कभी तुझसे राहों पर, ये सच है मैं तेरे ख़्वाबों में उपस्थिति दर्ज़ करता हूँ।। र... »

सन्तुलन

सन्तुलन

दिल और दिमाग के बीच सन्तुलन बैठाना मुश्किल था, पहली बार देखा था उसे अमलन छुपाना मुश्किल था, अकेले ही काटी थी यूँही राहों पर उम्र भर जो जिंदगी, मिला जो उनसे तो ठहरी अंजुमन लगाना मुश्किल था।। राही अंजाना अंजुमन – सभा अमलन – सच में »

शौक

आसुओं के पानी से जितना धुलता जाता हूँ मैं, लोग जितना रुलाते हैं उतना खुलता जाता हूँ मैं, देखने में सबको बेशक बड़ा नज़र आता हूँ मैं, सच ये के हर पल बचपन में मुड़ता जाता हूँ मैं, शौक तो खामोशी का ही पाल के रखता हूँ मैं, पर जब भी बोलता हूँ बोलता चला जाता हूँ मैं।। राही अंजाना »

मतभेद

मतभेदों की महफ़िल में मनभेदों का खुलासा हो गया, अच्छाखासा मुस्कुराता हुआ मेरा दिल रुहासा हो गया।। राही अंजाना »

मिठास

मिठास

जिसको रहना हो वो मेरे आस – पास रहे, जिंदगी में कोई तो हो जो सबसे ख़ास रहे, ऐसा न हो के सब हँसते रह जाएँ तुमपर, और एक कोने में बैठा वो दिल उदास रहे, दिन रहे रात रहे सुबह से शाम प्यास रहे, रिश्ता हो जैसा भी उसमें भरी मिठास रहे॥ राही अंजाना »

कौन कह रहा है

कौन कह रहा है समन्दर में राज़ नहीं होते, ज़मी पर रहने वालों के सर ताज नहीं होते, पहन लेते हैं आज वो जो जैसा मिल जाये, ये सच है उनकी कमीज़ में काज़ नहीं होते, गर छू पाते हम अपने हाथों हवायें दिवानी, आसमां पे हौंसलों के उड़ते बाज़ नहीं होते, कोई कुछ कहता नहीं सब समझते सबको, एहसासों के यूँ सरेआम आगाज़ नहीं होते, ज़ुबां सुना देती जो गर धड़कनों को दिल की, कानों में ख़ामोशी से सजे ये साज़ नहीं होते, राही अंजाना »

ढाँचे

मैंने सोंचा न था के वो इस कदर बदल जायेगा, पानी पर लिखा हुआ उसका नाम जल जायेगा, मैं बनाता ही रह जाऊंगा तरह – तरह के ढाँचे, और वो मासूम यूँ वक्त के सांचे में ढल जायेगा, बेवकूफ था मैं सोंचा ज़िन्दगी भर चलेगा साथ, क्या मालूम था के वो यूँ बर्फ सा पिघल जायेगा। राही अंजाना »

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