चंद वक्त ले लो
दुनिया भी बदल लो।
एक एहसान करो
तुम ही बदल जाओ
आजकल में
चीखों को सुनो
फिर सोचो
क्या तुम काबिल हो।
एक बार तुम घर में बैठ जाओ
देखों लोग कैसे बदलते हैं- जमाना।
बस तुम चले जाओ
देखो की कैसे बदलता है
सबका जीवन
तुम सब जिम्मेदार बनो
तो जानो की
कैसे बदलता है
हुकूमत की सत्ता
देखो कैसे बनते लोग
तख्त तुम उलट जाओ
फिर देखो बदलती
नई तस्वीर।
जिंदा है हम
तैयार हैं
बस तुम चले जाओ
अबकी बार हमें बैठाओ
हम बदल देंगे भारत।
अभिषेक कांत पाण्डे
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