Abhishek kant pandey, Author at Saavan's Posts

बिजली चले जाने पर हम

बिजली चले जाने पर हम रात चांद के तले बिताते हैं क्रंक्रीट की छत पर बैठ हम प्रकृति को कोसते हैं हवाओं से मिन्नते करते शहरों की छतों पर तपती गरमी में नई सभ्यता रचते दौड़ जाती हमारी आवेषों में बिजली कंदराओं के मानव आग की खोज में इतरा रहा था एडिषन एक बल्ब में इतना परेषान था हम उस बिजली के लिए शहरों में तपते छतों में इतिहास नहीं बने हवाओं के बहने और पानी के बरसने में हमने रूकावटे खड़ी कर दी क्रंक्रीट की ... »

हुकूमत बदल जाओ

चंद वक्त ले लो दुनिया भी बदल लो। एक एहसान करो तुम ही बदल जाओ आजकल में चीखों को सुनो फिर सोचो क्या तुम काबिल हो। एक बार तुम घर में बैठ जाओ देखों लोग कैसे बदलते हैं- जमाना। बस तुम चले जाओ देखो की कैसे बदलता है सबका जीवन तुम सब जिम्मेदार बनो तो जानो की कैसे बदलता है हुकूमत की सत्ता देखो कैसे बनते लोग तख्त तुम उलट जाओ फिर देखो बदलती नई तस्वीर। जिंदा है हम तैयार हैं बस तुम चले जाओ अबकी बार हमें बैठाओ ह... »