तेरे होठों की मुस्कुराहट

तेरी होठों की मुस्कुराहट का,
अलग ही फलसफा है ।
जहां खोता हूं मैं ,
और दिल हंसता है ।
भूल जाता हूं ,
मैं इस अदब को ,
जिसे मोहब्बत कहते हैं।
जहां खोया रहता हूं मैं,
मशगूल होता हूं ,
तेरी मुस्कुराहट में ।
चाहता हूं मैं,
इसकी वजह बन जाऊं।
तुम हंसो गुलिस्ता की तरह,
और मैं इसका ,
गुलशन बन जाऊं…..

Comments

12 responses to “तेरे होठों की मुस्कुराहट”

  1. Geeta kumari

    Nice lines

    1. Pratima chaudhary

      Thank you

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद जी

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    अतिसुंदर

  4. Pratima chaudhary

    बहुत बहुत धन्यवाद

  5. Deep

    अद्भुताकार

  6. बहुत सुंदर पंक्तियाँ

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