Pratima chaudhary, Author at Saavan's Posts

बिन बुलाए आते हैं

बिन बुलाए आते हैं गमों के सागर, मुसीबतों के तूफान, और कभी चाहकर भी नहीं होती, खुशियों की बारिश , मुस्कुराहटों की बौछार। »

कभी वो नचाती थी उसे

कभी वो नचाती थी उसे, अब सत्ता उसे नचाती हैं, गांव को गोद लेना, तो बात पुरानी ठहरी , अब मीडिया को भी, गोद लिया जाता है। »

मैंने तुम्हें जिताया

मैंने तुम्हें जिताया , उम्मीद का बटन दबाकर, सोचा था कि बढ़ाओगे रोजगार को मेरे, मगर तुमने बढ़ाया, सिर्फ अपना पेट। »

मुझको अगर जीतना है।

मुझको अगर जीतना है , तो ज़िद कभी ना करना, बस हृदय को; थोड़ा-सा छू जाना। »

ये जो उदासी है तेरे अन्दर….

ये जो उदासी है तेरे अंदर, वो खुशी में बदल जाएगी। तू उठ तो सही,संघर्ष के लिए , वक्त तो इंतजार में है तेरे, किस्मत भी बदल जाएगी। »

ऊंचे-ऊंचे घरों में

ऊंचे-ऊंचे घरों में , रहने वाले लोग, आजकल घरों में ही रहते हैं, मगर मैं निकला हूं बाहर, साहेब ! रेहड़ी लेकर, खाली उदर बच्चों का, टिकने ही नहीं देता है। »

मैं चाहती हूं…

मैं चाहती हूं ख्वाबो की पौड़ियों पर चढ़ना, मगर पीछे से जिम्मेवारियों की रस्सी खींच रही है »

रात का बटोही

रात का बटोही भटकता फिरे, और नींद समुद्री लहरों-सी, किनारे को छुकर वापिस चली जाएं। »

जिंदगी ने सौगात में

जिंदगी ने सौगात में , खूबसूरत-सा लम्हा जरूर दिया , मासूम से हाथों ने जब , उंगलियों को मेरी थाम लिया। »

ये ज़माना…

ये ज़माना जो है दिखावे का ही है अंतर्गुणो को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है »

मैंने जिंदगी को…

मैंने जिंदगी को हमेशा सहेली बनाकर रखा, मगर वो है कि हमेशा दुश्मनी निभाती रहती है। »

कुर्सी क्या है?

कुर्सी क्या है ? कितना मुश्किल है इसे समझना। सब राजनीति की संरचना है, सुन रखे हैं पुराने वादें, अब नए वादों में फंसना है। ये तो कुर्सी का मसला है। कहीं सत्ता की चाल है , कहीं कुर्सी का दाव है। फिर से, दो कुर्सियां आपस में जा टकराई। जो बच गयी , वो कुर्सी फिर सत्ता में आई। आम जनता; आम ही रह गई। जो ना बदली , वो बदल ना पाई। अब क्या करें ! भगवान भरोसे सब रख छोड़ा है , सब ने कुर्सी से नाता जोड़ा हैं, जन... »

पाक इश्क…

पाक इश्क अक्सर होता नहीं, मगर जब होता है तो बेमौसम बरसता है! और जिस पर बरसता है, वो बहुत भीगता है, आंसुओं से भी और उस खुमार से भी! »

दर्द का आलम

दर्द का आलम सहसा बाढ़ बन गया, जब किताब के पन्नो में; उनकी तस्वीर रूबरू हुई। »

बड़ी बेबाक बातें करते हैं वो….

बड़ी बेबाक बातें करते हैं वो, जमाना कब तक उन्हें चुप कराता। जो खौफजदा है नहीं, उन्हें खौफ कौन दिलाता….! »

हमारी मौजूदगी में।

झुक कर उठ जाती थी, उनकी नज़रें, हमारी मौजूदगी में। और अब आलम ऐसा है, कि उनकी नज़र, अब उठती ही नहीं। »

तुम्हें ढूंढती रही निगाहें..

तुम्हें ढूंढती रही निगाहें, बरसों बीतने के बाद। कभी तुमने ना खबर दी, न ही तुम तक आने का पता। »

बीता कल

जब उसने आँखे खोली, तब पाया एक नया संसार, रंग बिरंगी थी दुनिया उसकी, और खुशिया आपार, खेलती थी आँख मिचौली, संग अपने हमजोली, न पड़ती थी डॉट उन्हें, दो बोल मीठे बोलते, पा लेते थे, सब हँसकर, क्या नया था क्या पुराना, जो भी था; सब था प्यारा, खेल घरौंदे के खेले उसने, छुपकर करते थे श्रृंगार, न बंधी वो, बंधन में, नाचती गाती अपनी मगन में, क्या कब कौन जान है पाता, क्या है अगले ही पल में, और कौन छुपा है, किसके... »

कहां आ गए हैं हम।

कहां आ गए हैं हम, जहां खामोश-सी शामें हैं। और चुप-सा सूरज उगता है। ना बांटता है मुस्कान, ना रौनकें फैलाता है। »

नहीं मानते…..

नहीं मानते तकलीफ हम, लहू के बहने का । जब मन के घाव गहरे हो, जो न भरते हैं, ना दिखते हैं। »

मेरे मन का मोती…

मेरे मन का मोती, मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। मेरे राम मेरे श्याम… प्रभु मैं जपु तेरा नाम पल पल, तुझमें ही खो जाऊं । मेरे मन का मोती , मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। मेरे राम मेरे श्याम । सुध लो प्रभु दुनिया की , यह नैन भी तरस गए । किस और किनारा है मेरा , बस नौका पार लगा दो । मेरे राम मेरे श्याम…. भूलूं कभी न तेरा नाम , यह अरदास जगा दे । तेरे से ही हो रौशन दुनिया मेरी, तेरे पर ही वारी जाऊं। मेरे... »

कहां ढूंढू।

कहां ढूंढू में ऐसी भाषा कहीं, जैसा बोलूं वैसा लिख पाऊं, वो मैं मेरी हिंदी में ही पाऊं…. »

समा लेती है…

समा लेती है , हर भाषा को, अपने भीतर , जिसकी कोई सीमा नहीं , वो पूर्ण है खुद से, मेरी हिंदी जैसी कोई नहीं… »

कारवां

कारवां तो गुजर ही जाएगा जिंदगी का,वक्त के साथ। चाहे वह गम का हो ,या सकुं का। »

मैं तेरी मुस्कान चाहती हूं।

मैं तेरी मुस्कान चाहती हूं, तेरा हर अरमान चाहती हूं। तू उड़ सके आजाद, यह पैगाम चाहती हूं। फिरे तू हर उन गलियों से, जो गुजरती हो बुलंद नगरों से। बीच में तू रुके ना तू, कभी झुके ना तू , बस तेरी जीत हो , ये एहसास चाहती हूं। मैं बस तेरी मुस्कान चाहती हूं। »

तुम गुमान की मूरत…

तुम गुमान की मूरत बने रहो, और मैं स्वाभिमान की प्रतिमा। »

कुछ छुपा कर रखी थी यादें…

कुछ छुपा कर रखी थी यादें, कुछ सपने भी संजोए थे । हम सपनों के करीब जाकर, कुछ पल सिमट कर सोए थे। »

तेरे होठों की मुस्कुराहट

तेरी होठों की मुस्कुराहट का, अलग ही फलसफा है । जहां खोता हूं मैं , और दिल हंसता है । भूल जाता हूं , मैं इस अदब को , जिसे मोहब्बत कहते हैं। जहां खोया रहता हूं मैं, मशगूल होता हूं , तेरी मुस्कुराहट में । चाहता हूं मैं, इसकी वजह बन जाऊं। तुम हंसो गुलिस्ता की तरह, और मैं इसका , गुलशन बन जाऊं….. »

ऐ वक्त….

ऐ वक्त तू बहुत अच्छा है औरों के लिए, मगर मेरे लिए कब तक बुरा रहेगा! »

अनमोल थी तेरी यादें।

अनमोल थी तेरी यादें, तेरे साथ की। वह किस्सें बयान करती है, चाहते हैं, हम भी अनमोल हो जाते। तेरी यादों की तरह, छू लेते तुम यादों में कभी। पर हकीकत से , उनका राब्ता ना होता। तुम चाहते उन्हें पाना, और तुम भी तड़पते, उन यादों के लिए, और हम फना हो जाते। तुम्हारी अधखुली आंखों के, खुलने से पहले। »

तुम मुझे।

कुछ तरीके बताओ ना मुझे, कैसे भूले हो तुम मुझे। »

क्यों मनाएं किसी को।

क्यों मनाएं किसी को, रूठना हमें भी आता है। जो भूले बैठे हैं हमें, भुलाना हमें भी आता है। »

जिंदगी जी लेते।

बेखौफ होकर जिंदगी जी लेते, अगर तुम्हें खोने का डर ना होता… »

मुझे पता नहीं….

मुझे पता नहीं तुम्हें पाने का तरीका, पर खोने का सबब आज भी याद है…… »

मैं लिखती हूं कुछ अलग-सा

मैं लिखती हूं कुछ अलग-सा, मुझे इंसानों से ,न नफ़रत हैं, बस करती, निंदा बुराइयों की, दुःख देने की , न हसरत है। »

सब कहते हैं!

सब कहते हैं! ज़माना बुरा है, मगर ज़माना बना तो हम से ही है, हम ढुंढते है खामियां औरों में, क्या सारी अच्छाईयां हम में ही है! »

ख्वाब।

अक्सर मैं भूल जाती हूं , अपनी राह। ख्वाब अनेकों हैं, अब खत्म है चाह। कभी उम्र की सीमा रोक देती है, कभी दूसरों की सलाह। पर भुला कर बढ़ती हूं आगे, फिर से उठते हैं, यह सवाल। कि कब बंधोगी! उस बंधन में। और मेरा होता है, यही जवाब! क्या मेरा सबके जैसा होना जरूरी है! वही रोज;रोजी रोटी की बाट जोहना जरूरी है! आज फुर्सत के चार पल चुरा लूंगी, क्या यह सोचना जरूरी है! जरूरी है कि मैं किस तरह जीना चाहती हूं, किस... »

चलो विदा करते हैं…

चलो विदा करते हैं उन यादों को, कब तक कैद रखे ! उन्हें यादों के पिटारों में। »

आज भी….

आज भी आंखें सिर्फ उम्मीद के रंग ही तलाशती है, क्या रंग नहीं देखे! इन आंखों से पूछो। »

अभी भी…

अभी भी उम्मीद बाकी है, अभी मेरी सांसों में सांस बाकी है। कुछ छूने की ऊंचाईयां, कुछ पाने की इच्छा अभी मेरे सपनों में जान बाकी है। »

पढ़ लेते हैं पन्ने जिंदगी के।

पढ़ लेते हैं पन्ने जिंदगी के, जब हंसना हो या रोना हो। अब भी उसी तरह दिखते हैं , वो बदलते ही नहीं , बीते वक्त के बाद भी। »

आजाद किसे कहें!

आजाद किसे कहें? सब बंधे हैं बंधन में। हर शाम पंछी, अपना घोंसला तलाशता है। जहां चाह होती है, अपने आशियाने की। वह बोलते नहीं तो क्या, दिख जाती है उनकी ममता, जब चुग कर खिलाती है, दाना अपने बच्चों को। सिखाती है उसे उड़ना, पंख फैलाकर, आजाद किसे कहें , सब बंधे हैं बंधन में। »

कुछ रिश्ते…

बहुत संभाल कर रखे हैं, कुछ रिश्ते मैंने। उनसे रूबरू भी होते हैं। कभी हंस कर निभाते हैं, तो कभी हंसा कर निभाते हैं। »

हौसलों के पंख…

हम हौसलों के पंख भी लगा लेते अगर उड़ने की चाह होती…… »

इतने कांटे पाए हैं…..

इतने कांटे पाए हैं मैंने राहों में , कि फूलों की चाह ना रही । इतने रास्ते बदले हैं मैंने पल-पल , कि मंजिल की चाह ना रही। »

दोस्ती ना सही…

दोस्ती ना सही, दुश्मनी तो मत निभाओ। चार बातें बनाकर, यूं ठहाके तो मत लगाओ। यूं तो दिल सबका दुखता है, उसे और ना दुखाओ। माना तुम काबिल हो , अपने मुकाम पर। मगर मेरी काबिलियत पर , यू सवाल ना उठाओ । »

वक्त का समुंदर

वक्त का समुंदर भी कम पड़ गया, जब भूलने की बारी आई तो…. »

एक ही सवाल हैं

कितना समझें तुमको , यह तुम ही बता दो, एक ही सवाल है तुझसे जिन्दगी, तू क्या है? और क्यों है ? बता दो , ना एक पहेली है , ना एक आईना है , जो सुलझा सकूं तुझे, या देख सकूं तुझे। न जरिया है, न दरिया है , न मौन है ,न शोर है, बता दे तू कौन है? »

आंसू ठहरे थे

आंसू ठहरे थे उनकी पलकों पर , मगर गिरना नहीं चाहते थे , भीतर उठा था तूफान, पर बहना नहीं चाहते थे। »

ऐ! आयतें

ऐ !आयतें मुझे नजरबंद, कर ले कहीं , काश ! कोई दुआ में, पढ़ ले कहीं। »

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