हो रहा विमुख-सा मन, न इच्छा बची ना चाह। यह उम्र का पड़ाव, सच में इरादों को छीन-हीन, कर ही देता है। वह पहले सा उत्साह, मर ही जाता है। वो रंग-बिरंगे सपने, धुंधले पर […]

कुछ लोगों का दूसरों के, नक्शे कदम पर चलना। यह साफ-साफ ज़ाहिर करता है… उनका कोई वजूद है ही नहीं.. यह तो हर दूसरा, तो कोई गैर कहता है…..

कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे….२ उम्मीदें देंगी,दस्तक उन तक, उम्मीदें ही रह जाएंगी…. कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे…२ शामें देगी,उल्फत उनको, शामें ही रह जाएंगी… कोरे मेरे,सपने मेरे, कोरे […]

मेरे बापू के सपनों का भारत, अब है न जाने गुम कहीं। न एकता की भावना है, न देश प्रेम की बात कहीं। सत्ता की खातिर, जनता को मूर्ख बनाया जाता है। मेरे बापू के […]

इक अरदास करूं तुमसे प्रभू ! मैं रो लूंगी भाग्य को अपने, हर दुःख को चुप्पी से सह लुंगी। बना देना मुझे निर्भया की मां, दिल को अपने समझा लुंगी। मगर न बनाना मुझे, बलात्कारी […]

नहीं हूं मैं हिन्दू पहले, न ही दलित की बेटी हुं। मैं निर्भया आज की , इंसाफ़ मांगती, मैं पहले देश की बेटी हुं। क्यों नहीं पसीजा तुम्हारा हृदय, जब हैवानों ने मुझे शर्मसार किया, […]

मैं कितना भी हूं उदास, वो हंसा ही देते हैं, मुरझाईं कली को , फिर से खिला ही देते हैं, करता होगा जमाना मोहब्बत, अपने महबूब से, मगर वो है कि उसे अंजाम तक पहुंचा […]

कौन है यहां अपना मेरा, तुझ पर ही है, अर्पित जीवन सारा। कौन-सी मैं व्यथा सुनाऊं, प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं। कब तक यूं आस लगाऊ। कुछ तो बोलो, हे प्रभु! कब तक मैं यह […]

जब याद करती हूं, उन लम्हों को। एक टीस सी उठती है। यह आंखें नम हो जाती है। अगर तुम साथ होते। जिंदगी खुशियों से भर जाती, हम उदास हैं, यह गम नहीं। पर यह […]

एक तन्हाई, मैं खुद से पाना चाहती हूं। अपने संग, कुछ पल बिताना चाहती हूं। जिंदगी में हर रंग भर कर, उसे मिटाना चाहती हूं। जहां कोई न हो मेरे साथ, बस तुम्हें देखकर, मैं […]

मैं देख नहीं पाता हूं तो क्या? महसूस करता हूं, लोगों की खुशियां, और उनके गम । वो जो देखकर भी नहीं करते। इतना महसूस कर चुका हूं। इस दुनिया को, लोगों से कहीं बेहतर […]

रात का पागलपन भी देखो! खत्म होती ही नहीं रात भर, जब होता था, सुकून , तब सोता था, मगर अब , नींद की हिम्मत भी देखो! आती ही नहीं रात भर।

ये जो वक्त का सितारा है, वो बेहिसाब- सा बदलता है , और जब बदलता है, तो सारी कयानात बदलती है, फिजाएं भी बदलती हैं, और इंसान भी बदलता है।

क्यों आहत हुई मैं, क्यों मैं गुमसुम रही। सह रही थी, उस दर्द को। जहां जी रही थी मैं। याद है मुझे जब खुशियां, चमक रही थी, इन आंखों में। दमक रही थी, उन ख्वाबों […]

इस छोटी सी उम्र में, देखते हो ना मुझे, कभी ढाबों या चाय के ठेले पर, कभी किसी गैराज में, कभी लाल बत्ती पर , अखबार का बेचना, ठेले का धकेलना, कभी सोचा है तुमने, […]

यह कैसी है आपदाएं, कितना विनाश करती हैं! छीन कर सब मेरा, और मुझसे सवाल करती है। बाहर की भीषण तबाही, मेरे भीतर तक मचती है। सुख-चैन गंवा कर जोड़ा था, जिंदगी भी तौबा करती […]

छोड़कर इन आंसुओं को, भाग ना सके। और थाम भी ना सके। गिरते रहे उसके बूंदों की तरह, और मौसम जवां करते रहे। जमी कुछ पथरा गई थी, इन आंखों की। बिखरते रहे और इसे […]

है हिदायतें देती मां मुझे। घर जल्दी आना बेटी देर न करना। मैं सोचती हूं अक्सर! क्या यह देश मेरा घर नहीं! क्या यह लोग मेरा परिवार नहीं! फिर क्यों नहीं सुरक्षित , मैं अपने […]

है निशानियां तेरी, इन फिजाओं में। कभी चांद तो , कभी सितारे कहते हैं। कहते हैं मुड़ कर देख। जिसे तू चाहता है, वह वही है। जिसे हर रोज तू पाता है। याद वही सिमटी […]

मैं चुप हूं, खामोश हूं। एक मौन दरिया हूं। शांत हूं ,निर्मल हूं। कभी एक आहट भी, हिला देता था। मेरे भीतर के तूफान को, विचलित हो जाती थी। मैं अपनी राहों से। कायर थी […]

तू खुद सक्षम बन , ए ! नारी शक्ति! जमाना खुद बदल जाएगा, बैठा है हर ज़हन में रावण, राम कब तक तुझे बचाएगा, तू सीता बन नए युग की, रावण खुद मर जाएगा, ना […]

जब-जब , मैं रोई! तब-तब , चैन से मां ना सोई, मां ने पाला , मां ने सम्भाला, अपना निवाला, मेरे उदर में डाला, कोने में रोकर , मुझको हंसाया, जिंदगी क्या है, सलीका सिखाया।

अतीत की छाया पड़ने न देना, यादों का साया दुख देता है । खूश रख अपने को फिलहाल से, उम्मीद का सवेरा सुकून देता है, लगा अनुमान मस्तिष्क से तू, कौन बुरा, कौन अच्छा है! […]

न्यूज़ ना देखना दोस्त ! वहां केवल भ्रम फैलाया जाता है । कुछेक मुद्दो के पीछे, सत्ता को बचाया जाता है। सब कुछ पहले से तय होता है बहस जिस मुद्दे पर , उसे गर्व […]

यह जिंदगी की दौड़ है, जनाब! यहां सब दौड़ लगाते हैं। कोई हार कर जीतने की, दौड़ लगाता है। कोई जीत कर, फिर से जीतने का, जश्न मनाता है। यह जिंदगी की दौड़ है, जनाब।

हे प्रभु! तुम ही तो हो। तुम हो सृजन दाता, तुम हो रचना निर्माता। तुम हो जीवन की आस, तुम ही हो निश्चित श्वास। तुम ही हो अमूर्त प्रेम, तुम ही दिशा और दिन। हे […]

है डर मुझे आज भी, उन सुनसान गलियों से। वह सन्नाटे में चिल्लाते , शोर की गहराइयों से। वह डरा देती है, मुझे। मैं जब उस ओर गुजरती हूं। याद आता है, मुझे उसका चेहरा। […]