अपने जीवन के अमूल्य पल, दुर्गा वोहरा
सूवा की सुश्रुषा में, इन्तिसाब कर
मुमानियत को तोङ, मुल्क के हिफाज़त मे
रही जो तत्पर, मिली क्यूँ उन्हें गुमनाम मौत?
गुमनाम मौत, इन्तिसाब करने वालों की
Comments
2 responses to “गुमनाम मौत, इन्तिसाब करने वालों की”
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Very nice
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सुंदर
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