Suman Kumari, Author at Saavan's Posts

चितचोर

मोहक छवि है कैसी, मनभावन कान्हा चितचोर की। माखनचोरी की लीला करते ब्रिज के माखनचोर की।। वसुदेव के सुत, जो वासुदेव कहाते थे नन्द बाबा के घर में नित दृश्य नया दिखाते थे यशोदानन्दन नामथा जिनका मुख में ब्रह्माण्ड दिखातेथे बात- बात में जो गिरिवर को कनिष्ठा पर उठाते थे अपने सदन में छोङ,घर-घर माखन छिप कर खाते थे यह दृश्य है ग्वालबाल की टोली के सरदार की। मोहक—- माँ जशोदा थी बाबा नन्द की पटरानी नौ लाख... »

रामलला

रामलला ******* खत्म हुआ वनवास रामलला का शुरू हुआ निर्माण भव्य मन्दिर का पुत्र भाई तात नृप सखा का स्वरूप निभाते तभी तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जो राम कहाते मानवता प्रेम मित्रता सद्भाव का पाठ पढाते मानव मूल्यों का जन-जन को अहसास कराते एक स्वप्न फिर से आश तके है विश्वगुरू बनने का– लोग अलग हैं, धर्म बिलग हैं, पर हममें एक अगन है हो निर्माण उस मन्दिर का, करेंगे जिसमें राम रमण हैं सबकुछ उनपे छोङ देत... »

माखनचोर

मात हमारी यशोदा प्यारी,सुनले मोहे कहे गिरिधारी नहीं माखन मैनु निरखत है,झूठ कहत हैं ग्वालननारी। मैं तेरो भोला लला हूँ माता,मुझे कहाँ चुरवन है आत बस वही मै सब खाता, तेरे हाथों का माखन है भाता ठुनक ठुनक कहते असुरारी,झूठ कहत हैं ग्वालननारी।। ये जो ग्वालन हैं,बङी चतुरन हैं,बरबस ही पाछे पङत हैं ना जाने क्यू मोहे बैरन हैं,झूठ-मूठ तोसे चुगली करत हैं मैं तो सीधा-सा हूँ बनवारी, झूठ कहत हैं ग्वालननारी ।। मैय... »

अहिल्या पत्थर बनायी जाती है

अहिल्या पत्थर बनायी जाती है —————******—————— करनी किसी की भी हो,सतायी नारी जाती है । हवस हो इन्द्र की,अहिल्या पत्थर बनायी जाती है ।। युग युगांतर से यही,बस होता आया है अहम तुष्टि हो नर की, कलंक नारी पे छाया है रूप यौवन,सौम्यता नारी ने ईश्वर से पाया है हरहाल में दुश्मन,बनी उसकी ही काया है चिथङे उङते सम्मान के,कलंकनी कहलायी ज़ाती है ।... »

संकटमोचन

दुनिया में छाया कैसा मंजर है धरा सूनी सूनी लागे खोया-सा अंबर है कोविड 19 से हर तरफ मचा हहाकार है बस एक संजीवनी बूटी की फिर से दरकार है ।। कहाँ छिपे हो संकट मोचन,संकट मानवता पे आई है इस अप्रत्याशित बीमारी ने,कितनों की दीप बुझाई है वैद्य सुषेण की फिर से,आन पङी दरकार है बस एक संजीवनी बूटी—– विकसित अविकसित का इसने,फर्क मिटाया है देख दवाई की खातिर, एक गर्वित ने हाथ फैलाया है जी करता है, कह ... »

मैत्री

वृत्ति मान्गकर जीवन यापन करने वाले के अंतरंग द्वारिकाधीश थे निज हाथों से सुदामा के चरण पखारते सच्चे मित्र श्रीकृष्ण थे ।। मित्रता हो ऐसी जहाँ भेद न कोई रह जावै मित्र का दुख स्वदुख से भी ज्यादा कष्टप्रद लागै सुग्रीव के दुख से जैसे दुखी जगदीश थे । बिन मांगे, कष्टोंसे बचाने,हाथ जो खुद आगे आवे सही मारने में साखी कहलाने का पद वो पावे ऐसो संगी रब से मिला बख्शीश है ।। गुरूकुल में शुरू,छोटी सी थी जिनकी कह... »

नये युग का सूत्रपात

विदेशी वस्तुओं का क्यू ना बहिष्कार करें आज से ही एक नया युग का सूत्रपात करें ।। विदेशी वस्तुओं का,सिलसिलेवार ढंग से, सरकार तहकीकात करे चिन्हित वैसी विदेशी वस्तुओं से जनता का साक्षात्कार करें फिर उन लोकप्रिय सामग्रियों के निर्माण की, स्वदेश में शुरुआत करें ।। साम्राज्यवादिता की प्रवृत्ति रही है जिनकी जो दो-दो विश्वयुद्धो के सृजनहार थे धूरी राष्ट्रों में शामिल थेजो ,उनपे कैसे क्यू विश्वास करें किसी ... »

इन्सानियत कहाँ

3: इन्सानियत कहाँ जिनसे जीवन के गुल खिले, मरते ही शूल हो गये जिन्दगी जीने की चाह में क्यूँ, मशगूल हो गये ।। यह ऐसी महामारी है जिसने इन्सानियत में सेंध लगाई है अमानवीय बन बैठे हैं हम,अपनों ने नजर यूँ चुराई हैं यह संक्रमण अपने संग वो दर्पण भी एक लाया है छिपे चेहरे से परत-दर-परत पङी चिलमन भी हटाया है काल के इस रूप में, सारे नाते-रिश्ते,तार-तार हो गये ।। जिनसे— दुश्मन भी दुश्मनी त्याज, जीवन की अ... »

कहाँ है हमारी संवेदना

आज हम कहाँ और कहाँ है हमारी संवेदना भूल गयें अपनों को,कहाँ कैसी है वेदना ।। भूल बैठे उन भावनाओं को जब किसी मृत के शव पर लिपटकर रोया करते थे देते अंतिम विदाई, सुध देह की खोरा करते थे आज हैं ऐसी दूरियां मृतक को पहचानने से भी इन्कार है हमें मलकर भी ना अपनों का साथ ना कफन ना वो चार कंधे, ना मुखाग्नी की रश्म ना अंतर्मन को छेदती वो वेदना ।। बदल गये सारे दस्तूर पीङित को छूना नहीं, रहना दूर भरा-पूरा परिवा... »

बगिया अधूरी है

जमाना अब तो बदला है कहाँ अब कोई दूरी है बेटा और बेटी- दोनों का, होना जरूरी है बिना इनके ना जिन्दगी, ना जिन्दगी हाँ जिन्दगी अधूरी है ।। बेटी की थाली में,ना राखी हो ना रोली हो तो बेटे के हाथों की कलाई भी अधूरी है ।। बेटी ना हो तो बेटे की जयगान कैसे हो बगैर कर्णावती के, हुमायूँ की पहचान अधूरी है ।। गर लङाई हो ना झगड़ा हो,घर गुलज़ार कैसे हो बगैर भाई के बहना की, हर ख्वाइश अधूरी है ।। शान्ता न होती तो, ... »

रक्षाबंधन

1: रक्षाबंधन रक्षासूत्र सिर्फ एक धागा नहीं, अटूट स्नेह प्यार विश्वास समर्पण का व्यवहार । रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट स्नेह का त्यौहार ।। भरोसा उस विश्वास का भाई हरहाल में रहेगा बनकर ढाल विश्वास उस मजबूती का भाई रहेगा सुरक्षित,बाल बाँका कर न सकेगा दुश्मन की कोई भी चाल आशा उस उपहार की,उम्मीदें जुङी हैं जिससे हजार कोई भी जंग,जयघोष हो मेरे भैया की ही बारम्बार हाँ,रक्षाबंधन ही वह पर्व है,दर्शाता भाई बहन ... »

आपदाओं का शिलशिला

आपदाओं का शिलशिला —————————- त्रासदी का जालीम कहर कब तक डराएगा वक्त का यह खौफजदा दौङ थम ही जाएगा । अबतक के अनुभवों से हमने सीखा है आपदाओ का शिलशिला जब चलने लगता है धैर्य डगमगाता , पर क्या , वक्त का पहिया कब थम के रहता है गम का दरिया बहते-बहते बह ही जाएगा पर खुशियों का सैलाब बन के आएगा वक्त का यह खौफजदा दौङ , थम ही जाएगा । सिर्फ अपने हित की कबतक... »

माँ

माँ: जीवन की पहली शिक्षिका ******************** जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका कहाती है हर एक सीख,सहज लब्जों में सिखाती है ।। धरा पे आँखे खुली,माँ से हुआ सामना जन्मों जन्म से अधूरी,पूर्ण हुई कामना घर परिवार से,हरेक रिश्तेदार से पहचान कराती है । हर एक सीख सहज लब्जों में सिखाती है ।। हमारी गलतियाँ बता,आइना दिखाती वो बिगड़े को संभालने की,कला समझाती वो सबकी अहमियत बातों-बातो में सिखाती है । हर एक सीख... »

बिहार की गौरव गाथा

गर्व हमें है इस भूमि पर,जिस पर हमने जन्म लिया कर्म है मेरा उसे संवारना,जिसने हमपर उपकार किया । मातृभूमि वह मेरी, जहाँ महावीर ने अवतरण लिया कर्मभूमि वह मेरी,बुद्ध ने जहाँ अहिंसा का वरण किया कौटिल्य का जो सपना,मौर्य ने जिसे अपना था लिया गर्व— कभी सूर्य सा दमकता, जिसकी गौरव गाथा थी राज्य नहीं देश नहीं,विश्व की बनी परिभाषा थी अशिक्षा गरीबी भूखमरी भ्रष्टाचार नहीं ज्ञान विज्ञान विकास जिसकी अभिलाषा... »

मन्जिल

कौन-सी मंजिल है अपनी किसे किधर जाना कहाँ है क्या है पहचान अपनी किस डगर से जाना यहाँ है । लौटकर भी आएँगे यहाँ पर या वही रम जाएँगे सोच लो रूक कर जरा क्या इस जहाँ को ले जाएँगे। बेजान सा पङे जमी पर मैंने देखा एक पथिक को सुध ना थी उस देह की जा चुका था किसी लोक को । गुमान था जिस देह पे वो भी साथ न जाएगा अंत पानी मिट्टी में मिल कर एक यूँ हो जाएगा । निज कर्म का ,बस हे प्रभु हो मुझे हमेशा आसरा स्वाबलम्बी ब... »

कारगिल विजय दिवस

शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साठ दिनों तक जो चली पाकभारत की लङाई थी कितनों ने जान की बाजी हंस के यूँ लगाई थी 527 जवानो ने वीरता से जान अपनी गवायी थीं यह वही कारगिल युद्ध है भाई परवेज मुशर्रफ ने की जिसकी अगुआई थी।शत—- हाँ वही परवेज जिसकी खूरफाती का नतीजा औपरेशन भद्र से लाल था हिमालय का टीला लालच फितरत है जिनकी,फिक्र क्यू करे वो ... »

जीवन दायनी नदियां

जीवन दायनी ये नदियां पहुँचती हैं जब विकरालता के चरम पर लील लेतीं हैं उनकी ज़िन्दगियाँ जिन्दा रहते हैं जो इनके करम पर।। भूमि तो उर्वर कर जाती हैं पर कयी दंश भी दे जाती हैं कितने ही धन घर पशु सम्पदा अपने आगोश में बहाके जाती हैं ।। बढ़ते जलस्तर का लाल निशान देख घर छोड़ सङक पर जन लेते हैं टेक पैरों में बहती है अविरल जलधारा इस विषम समय में भी भूखा है पेट बेचारा ।। एक के हाथोंमें है ब्रेड का एक टुकड़ा द... »

बाढ़

बाढ़ —— करनी है कुछ जनों की,सजा कितनों ने पाई है नदियों का यह रौद्र रूप हमारे कर्मों की भरपाई है । प्रकृति के दोहन में रहे यूँ मदमस्त हम कितना भी पा ले लगता बहुत ही कम और पाने की चाहत से गिरिराज की रूलाई है हिमालय के क्रंदन से नदियों में बाढ़ आई है ।— जहाँ भी गये हम कचङा फैला के आये पुण्य कमाने की खातिर गंदगी पसार आये शान्त थीं जो नदियां, उनको भी छेड़ आए हमारी लापरवाही का ये भुगत... »

एहसास कराने आई तू

मुझको मेरे होने का एहसास कराने आई तू। फिर से जीवन जीने का आस जगाने आई तू । तुझे देख खुद को देखती,तुझसे ही खुद को परखती देख तुझे मै और निरखती,तुझ संग मैं भी संवरती पढने और पढाने का एहसास जगाने आई तू —- आज मेरी भी एक पहचान बनी है वो तुझसे तेरे ख़ातिर अरमान बनीं हैं चाहे जितनी तकलीफ उठाऊँ तेरे सारे ख्वाइश पूरी कर जाऊँ मुझको मेरी दृढ़ता का आभास कराने आई तू— तू ना होती तो क्या मैं यह न होती... »

मेरी लाङो

तेरी सफलता के चमक के आगे सितारों की चमक फीकी हो ! तेरे कठिन मेहनत का फल नीले गगन से भी ऊँची हो! ऐसी हो तेरी जय गाथा तू आगे सफलता तेरे पीछे हो! मुकम्मल तेरी हर कोशिशे नाकामी पैरों के नीचे हो! मेरी लाडो मैं क्या , ये वतन नाज करे तुझपर सारी कायनात की करम तुझपे हो! बेटी को जन्म देना धर्म बन जाए सबका सबकी चाहत रहे-मेरी बिटिया भी ऐसी हो! जन्मदिन की बधाई हम देते हैं तुमको सब जङचेतन देने को बधाई आतुर हो आ... »

बेटियां

आसमां में हैं जितने सितारे पङे उतने ही हैं तुझसे मेरे सपने जुड़े अपने जीवन को देना एक पहचान तू पूरे करना चुन चुन के अरमान तू। बेटियों से है माता की शक्ति बढ़ी अकेलेपन में साथ हमेशा रहतीं खङी देखके जब बेटियों को, गुमान होने लगें समझो उस जमाने को पर लगने लगे। बेटियां पङाई है अब डर ये भगा अपनी इस सोच को कर खुदसे जुदा दूर रहकर भी फर्ज करतीं हैं पूरा माँ बाप से तार रहता है हरदम जुङा। जन्मदिन की हार्दिक... »

कारगिल विजय दिवस

शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साफ दिनों तक जो चली थी लङाई कितनों ने जान की बाजी लगाई थी 527 जवानो ने हंसके प्राण गवायी थीं यह वही कारगिल युद्ध है भाई परवेज मुशर्रफ ने की जिसकी अगुआई थी।शत—- हाँ वही परवेज जिसकी खूरफाती का नतीजा औपरेशन भद्र से लाल था हिमालय का टीला लालच फितरत है जिनकी,फिक्र क्यू करे वो किसीकी हिम्मत कहाँथी बुजदिलो... »

गिद्ध दृष्टि

दु:शासन दुर्योधन की जोङी कबतक गुल खिलाएगी एक दिन चौसर की गोटी खुद उनको नाच नचाएगी — दिन बदलते ही जिनकी फितरत बदले थोड़ी सी भी लाज नहीं,पलपल जिनकी हसरत बदले लाभहानि के सौदे पे टिकी दोस्ती कबतक खैर मनाएगी—– सिंह के खाल में छिपा भेङिया पंजा उंगली की नीति जिसने बनायी है कभी अरूणाचल कभी लद्दाख तक कैसी गिद्ध दृष्टि दौङाई है नेपाल तिब्बत को कुतरने वाले, भारत क्या भूटान तुझे सिखाएगा R... »

प्रश्न

हम क्या हमारा व्यक्तित्व क्या। अनन्त ब्रह्माण्ड के प्रान्गन में , हम क्या हमारा अस्तित्व क्या । कब किसके गर्भ में, कैसे कौन पनप रहा कैसे कब कौन-सा किसका सुमन कहाँ किस उपवन में महक रहा अनेक प्रश्न हैं उदित यह मन क्यू भटक रहा अनन्त ब्रह्माण्ड के—– सुमन आर्या »

चलो पतझड मेंफूल खिलाएं

प्रगति पथ पर दौङ लगाए चलो नव कृतिमान बनाए। पग- पग पर आने वाली बाधाओं से हंसकर अपनी पहचान बनाए।। चाहे जितनी डगर कठिन हो पर अपना विश्वास अडिग हो परिश्रम की मिठास की खबर उसे क्या जिसका जीवन शूल विहीन हो चलो,पतझड में एक फूल खिलाएं ।। करूँ जगत में काम कुछ ऐसा जीवन हो वृक्षों के जैसा नदी की धार कभी बन जाऊँ दुख दरिद्र दूर बहा ले जाऊँ खुद की आन की ना हो चिन्ता चलो, औरों का सम्मान बनाए।। बहुत जी लिया खुद क... »

प्रेम-बन्धुत्व का नौमिनेष

प्रेम-बन्धुत्व का नौमिनेष ———*——*——– हर बालक को एक-सा, पालन पोषण,शिक्षा परिवेश मिले। समता,मानवता,बन्धुत्व,करूणा भरने वाला देश मिले। क्या बिगाड़ेगा उनका कोई जहाँ रहीम जौर्ज गणेश मिले। एक ऐसी धरा का नवनिर्माण करें जहाँ देश से गले विदेश मिले। ना चीन हमारी जमी हरपे, ना पाक से विष रूपी द्वेष मिले। साम्राज्यवादियो के नापाक इरादे धूल दूषित हो प्रेम-बन्धुत्व... »

विश्वास का आगाज़

कुछ लोग हमारी संस्कृति को पिछड़ेपन का नाम देते हैं। हंस के पश्चिमी संस्कृति की उतरन थाम लेते हैं ।। घर हो या सङक शालीनता हो अपनी झलक नकल किसी और की क्यूँ करे, स्वसंस्कृति को आत्मसात करने की हो ललक हमारे लिवास हमारी सौम्यता की पहचान देते हैं हंस के पश्चिमी—- खुलापन कहाँ कबतक साथ निभाएगा सादगी ही हमें आगे का पथ दिखाएगा क्रियाकलाप हमारी तहजीब का पैगाम देते हैं हंस के पश्चिमी——- पीपल... »

सैनिक बनने का दम भरता है

सूनी- सूनी सङको पर सैनिक बनने का दम भरता है । सेना में भर्ती होने का हर जन में स्वप्न सलौना पलता है ।। तात हमारे कैसे माँ, अपने पैरों पर चलकर ना आए क्या सचमुच धन्य वही है जो सीमा पर प्राण गवा जाए जान हथेली पे लेके क्यू, देश का प्रहरी चलता है सेना में भर्ती होने—- माँ मेरे हाथ अभी छोटे हैं पर तू इनमें पिस्तौल थमा मुझको वो हरियाली वाली खाकी फौजी ड्रेस दिला माँ के उजङे मांग देख,ढाढ़स की लाली भर... »

खुद पे एतवार

चलो आज खुद के लिए वक्त की तलाश करते हैं । हर जख्म को अलफाजो से ढक दुख दर्द को किसी दरिया में रख खुद को तराशने की खातिर खुद पर एक सरसरी नजर डालते हैं । दुनिया की उम्मीदों से परे भीनी भावनाओं के संग अनायास ही एक उङान भरते हैं । क्यूँ दूसरों के भरोसे खुशियों को छोङे खुद ही खुद के लिए खुद की अहमियत का अहसास करते हैं । सबकी बातोंको नजरान्दाज कर किनारा कर सबकी नाराजगी का डर खुद के लिए खुद पर, चलो एतवार ... »

रूक तो ज़रा

अनिश्चितता के सवालों में है मानव पङा कैसी होगी जिन्दगी, सुलसा भांति मुँह बाए खङा । कल की जिन्दगी का नहीं जन को पता खता क्या हुई हम से,मेरे रब जरा तुम तो बता जीवन को लीलने से पहले रूक तो ज़रा । कल की लालसाओ की तृष्णा की खातिर अतृप्त इच्छाओं की पूर्ति में बन बैठा शातिर संवेदनाओं के मिटने से पहले,रूक तो ज़रा । अपने बेगानो की पहचान की बेला है आई अपनों से अपनों के बीच की कैसी है खाई संक्रमण से भागने से... »

माँ मेरी

माँ मेरी ****** मुझे मेरा खोया बचपन लौटा दे विकल हुआ मेरा क्यूँ मन ,फिर आंचल लहरा दे मुझे मेरा खोया बचपन लौटा दे । छूट गये क्यू खेल- खिलौने, जिम्मेदारी से घिर गए सपने- सलौने , सबकी मुझसे उम्मीदें बङी हैं इन हाथों में कहाँ जादू की छड़ी है थक गयी मैं,थकान मिटा दे । मुझे मेरा खोया बचपन लौटा दे ।। ईश्वर की धरती पर अवतार है तू बच्चों की मनचाहा वरदान है तू डूबते मन की खेवनहार है तू तेरी ममता अविरल-निश्च... »

एक दीप तेरे नाम का

आज जब मानव के बजूद पर बन आई है फिर भी जाति-धर्म की ये कैसी लङाई है गरीब देखे न अमीर ये वैश्विक महामारी है मानव बनकर रहने में हम सब की भलाई है मानव बनें!दीप इस आश से जलाया है ।। आज अपनों से भी अछूत बन गए है हम एक मीटर का फासला क्या लगता है कम अब भी ना संभले तो कब संभलेगे हम सद्बुद्धि दे!दीप इस आश जलाया है ।। जब काम था तो वक्त की कमी थी काम के चलते अपनों में दूरियां बनी थीं आज समय है , पर काम की कमी... »

एक दीप तेरे नाम की

आज जब मानव के बजूद पर बन आई है फिर भी जाति-धर्म की ये कैसी लङाई है गरीब देखे न अमीर ये वैश्विक महामारी है मानव बनकर रहने में हम सब की भलाई है मानव बनें!दीप इस आश से जलाई है ।। आज अपनों से भी अछूत बन गए है हम एक मीटर का फासला क्या लगता है कम अब भी ना संभले तो कब संभलेगे हम सद्बुद्धि दे !दीप इस आश जलायी है ।। जब काम था तो वक्त की कमी थी काम के चलते अपनों में दूरियां बनी थीं आज समय है , पर काम की कमी... »

सफ़र

सफ़र ————- बंदिशो के आँगन में बुलन्दियो के आसमान तक यह सफ़र है, तेरी बेचैनी से,तेरी पहचान तक कहाँ थमी है,तेरी चुनौतियों की कंटीली डगर मंजिल तो पाना है ही,चाहे जितना लम्बा हो सफ़र सौन्दर्य,मातृत्व व बुद्धि के बल,खुद को साबित करना है तप,त्याग,महानता की ही नहीं, सफलता की गौरवगाथा बनना है खुद को साबित कर,जाना है आसमान तक—– सुमन आर्या »

तीसरी नज़र

जीवन की है कठोर डगर,बढने से पहले तू संवर लक्ष्य हासिल करना है अगर,खोल ले तीसरी नजर। मासूम तुम्हारा चित जितना ये दुनिया उतनी मासूम नहीं प्रश्न खङा होगा तुझ पे सरे शाम सुबह चारों पहर। कुछ जन के चितवन ऐसे हैं जिनके चेहरे पे कई चेहरे हैं मंसा क्या है उनका ,कुछ सोच, थोङा सा ठहर। पग- पग की बाधाओं से डट के करना सामना देर सही अंधेर नहीं पूरी होगी तेरी साधना विचलित मत हो नीलकंठ बन पी ले ज़हर लक्ष्य को हासि... »

इतना चाहती हूँ

इतना चाहती हूँ इतना ना इतराया करो,बेरूखी में, ना दिन जाया करो यूँ दूर ना मुझसे रहो,बुलाने से पहले आ जाया करो क्यू खामोश हो या खुद में ही मदहोश हो चुप हो ऐसे तुम जैसे मुझमें ही कोई दोष यूँ ना रहो, खुलकर जो भी हो, बताया करो इतना ना इतराया—— दिन हो या रात खुद में मशगूल हो समय पे काम देने को सबमें मशहूर हो मेरी भी पीङा ,यूँ ना मेरी बढाया करो इतना ना इतराया——– कभी-कभी मेरे... »

कोख का सौदा

आने से पहले ही गैर जीवन का पुरौधा बन गया जन्म से पहले ही जननी की कोख का सौदा हो गया अंश किसी का,गर्भ किसी का ,किसी और गर्भ में प्रत्यारोपित लोग कौन ,देश कौन सा,किनके बीच में, हाय!कैसा ये जीवन शापित एक अनजाने को कैसे कोई अपनी ममता सौंप गया जन्म से पहले ही ———- कोख बना जब साधन माँ के पेट की क्षुधा मिटाने का भूख प्यास ने किया कलंकित कैसे जीवन मानव का देखते ही देखते बदतर कितनों का जी... »

जागो हे भरतवंशी

जागो हे भरतवंशी अलसाने की बेर नहीं । सहा सबकी साज़िशों को,करना है अब देर नहीं ।। शालीनता की जिनको कदर नहीं,विष के दाँत छिपाये है मौकापरस्त फितरत है जिनके,क्यू उनसे हम घबराये है फ़ौलाद बन उत्तर दो इनको,पंचशील की बेर नहीं जागो हे भरत—— सामने शत्रु है वो,वृतासुर सी प्रवृत्ति जिनकी रही है हिन्द के सह से वीटो की छङी,जिनके हाथों में पङी है दधीची बन, भेद उनको,बुद्ध की अभी दरकार नहीं जागो हे भ... »