मुखौटे

मुखौटे लगा कर,
आते हैं कुछ लोग
कभी हंसाकर कभी रुलाकर,
चले जाते हैं कुछ लोग
कभी जोकर का मुखौटा,
लगाकर हंसाया
कभी भूत-प्रेत का मुखौटा,
लगाकर डराया
मुखौटे लगा कर,
मन बहलाते हैं लोग
ना जाने ऐसा कैसे,
कर पाते हैं कुछ लोग

*****✍️गीता

Comments

7 responses to “मुखौटे”

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    1. Geeta kumari

      Nothing personal bhai…

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    2. बहुत बहुत धन्यवाद विवेक भाई, सब ठीक है

      1. This comment is currently unavailable

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

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