बहुत याद आते हैं,
सफ़र में बेवक्त बिछड़ने वाले।
छोड़ जाते हैं हृदय में बहुत सी यादें और रह जाती हैं तन्हाइयाँ और खामोशियाँ।
ऑंख के आंसू निकल पड़ते हैं ढूँढने उनको,
नहीं मिलते हैं कदमों के निशाॅं।
______✍️गीता कुमारी
Author: Geeta kumari
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यादें और ख़ामोशियाँ
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वक्त की फ़ितरत
वक्त की फ़ितरत में तब्दीली है,
जो आज हमारा है वो कल किसी और का होगा।
न कर ग़रूर आज पर अपने।
आने वाला कल न जाने कैसा होगा।
______✍️गीता कुमारी -
ऑपरेशन सिन्दूर
ऑपरेशन सिन्दूर’आतंक के विरुद्ध जारी है
भारतीय सेना पाकिस्तान पर भारी है।
पाकिस्तान की कायराना हरकत हुई जो पहलगाम में।
नहीं छोड़ा,लिया बदला हिंदुस्तान ने।
भारत के बेटों को मारा, बेटियों का उजाड़ा सिन्दूर है।
अपनी इस हरकत पर रोएगा दुश्मन,
वह दिन नहीं अब दूर है।
पीठ पर करते जो हमला, उनके घर में घुस कर मारा है।
नहीं छोड़ेंगे आतंकियों को, भारत का यह नारा है।
___✍️गीता कुमारी -
मुखौटे
मुखौटे लगा कर घूम रहे बहुत आदमी हैं।
किसी ने मुखौटा लगा कर हॅंसाया,
किसी ने मुखौटा लगा कर डराया।
कोई रो रहा है मुखौटा लगा कर,
किसी ने मुखौटा लगा कर सताया।
असली और नकली की पहचान हुई दुष्कर,
नकली पर असली का मुलम्मा चढ़ाया।
मुखौटों के नगर में हर कदम पर है धोखा,
जिसको मिला मौका उसी ने उठाया।
बकरी घूम रही है शेर का मुखौटा लगा कर,
भेड़िये ने भेड़ का मुखौटा है लगाया।
✍️गीता कुमारी -
प्रदूषण का कहर
हवा में जहर है,
प्रदूषण का कहर है।
सांसों पर बंधी हैं बेड़ियाँ
जी हाँ ये दिल्ली शहर है।
अरुणिमा मद्धम हुई है,
कौमुदी कुम्हलाने लगी।
तारों की रौशनी भी
अब तो धुंधलाने लगी।
हर पहर कोहरे का कहर है,
जी हाँ ये दिल्ली शहर है।
____✍️गीता कुमारी -
चाॅंद पर पहुँचा चन्द्र यान है
चाॅंद पर पहुँचा चन्द्र यान है,
सफ़ल हुआ भारत का अभियान है।
तिरंगा चाॅंद पर लहराने लगा है,
हर भारतीय मुस्कुराने लगा है।
इसरो के वैज्ञानिकों को बहुत बधाई है,
चाॅंद से बहुत खूबसूरत खबर आई है।
अब चाॅंद दूर नहीं है हिन्दुस्तान से,
कह सकते हैं यह बात हम शान से।।
____✍️गीता -
अंजुमन
दिल के वीराने में एक अंजुमन
हम भी सजाते हैं।
जब भी होते हैं तन्हा आपको उसमें बिठाते हैं।
आप तो भूल गए हो यादें पुरानी,
आइये हम आपको याद दिलाते हैं..
सावन, नदियाँ पर्वत और पानी,
भूली बिसरी कुछ याद सुहानी।
मित्रता और मोहब्बत की कहानी,
एक गीत सुनाती हूँ, गीता की ज़ुबानी॥
____✍️गीता -
कड़वा सच
सच है एक कड़वी दवा,
इसको धीरे-धीरे पिला।
आदत तो हो जाने दे,
इतना सच कैसे झेलूॅं,
चाक सीना तो सी लूॅ़ं।
भरम में ही जीती आई हूँ,
भरम में ही जी लेने दे,
सच है बहुत कड़वी दवा,
धीरे-धीरे पीने दे..
इसे धीरे-धीरे पीने दे॥
_____✍️गीता -
ये वादा रहा..
मुझे नहीं पता तू है कहाँ,
खुश रहे तू है जहाँ।
हृदय से देती हूँ तुझको दुआ,
फ़िर न हो जैसा अब हुआ।
हृदय में वास करेगी सदा,
तेरा नाम रहेगा सर्वदा मेरी जु़बाॅं,
वादा करती है ये तुझसे तेरी माँ।
अगले जनम भी तुझको मैं पाऊँ,
तुझ पर यूँ ही प्यार लुटाऊँ।
पूरा करेंगे अपना प्यार,
अधूरा रहा है जो इस बार।
तेरा ना कोई विकल्प है,
सदा रहेगी हृदय में, ये संकल्प है।
मिलूँगी मैं तुझसे अगले जनम,
तेरे जन्मदिवस पर..ये वादा रहा॥
——-✍️ गीता
Love you a lot
Miss you a lot.. -
ख़ामोश कलम
ख़ामोश है कलम,
कर रही इन्तज़ार है।
कब कोई लेख लिखूँ मैं,
वो देख रही बारम्बार है।
पी कर अश्क अपने एक दिन,
सचमुच कलम उठाऊॅंगी।
प्रतीक्षारत कलम को,
न और अधिक प्रतीक्षा करवाऊँगी॥
_____✍️गीता -
कोई हो जो..
कोई हो जो बिन कहे हर भाव समझ ले,
कोई हो जो चेहरे की हर शिकन को पढ़ ले।
कोई हो जो मुस्कुराने का बहाना दे दे,
कोई हो जो बिन मांगे प्यार का खज़ाना..
दे दे॥
______✍गीता -
पहचान
जब दिल से दिल के तार जुड़े हों,
किसी पहचान की जरूरत कहाँ।
नाम भले ही गुम जाए,
चाहे चेहरा भी बदल जाए..
आपकी आवाज़ से,आपके अंदाज़ से,
आपकी रूह को पहचान लेंगे हम।
ये चाहत है कोई दिल्लगी नहीं,
सीने में छुपाकर घूमें ग़म,
पवन सुहानी कहे कहानी
यादों में अक्सर ऑंखें होती नम॥
_______✍गीता -
तेरे नाम
तकलीफ अंदर के शोर से है,
तनहाई तो यूँ ही बदनाम होती है।
गिरता है खारा जल जब भी ऑंख से,
वह सुबह वह शाम, तेरे ही नाम होती है॥
_______✍गीता -

हिम की बरसात हुई
हिम की बरसात हुई,
कहीं तो बीती रात हुई।
गिरी नर्म-नर्म रुई सी,
चाॅंदी सी बिछ गयी राहों में
रूचिर रुपहली रात हुई
बही सर्द-सर्द हवाएँ,
तन-मन ठिठुरता ही जाए।
बादल घुमड़ रहे गगन पर,
ठंड में ऐसी बरसात हुई।
कहाँ से इतना जल आया यह,
बहुत ही ठंडी रात हुई॥
_____✍गीता -

टूटा सा दिल
दिल हमारा टूटा हुआ सा हो गया,
जब अपनी राह वो जाने लगे।
चाह कर भी रोक पाये हम नहीं,
रोकने को उन्हें, ऑंखों के अश्क़ आने लगे।
कब तलक देते सहारा वो हमें,
अश्कों को हम यही समझाने लगे॥
____✍गीता -
ख़ामोशियाँ जब ज़ुबाँ बनने लगीं
ख़ामोशियाँ जब ज़ुबाँ बनने लगीं,
रफ्ता-रफ्ता दिलों की दूरियाँ घटने लगीं।
मोहब्बत में मीठे अहसास हुए इस कदर,
एक दूजे की कदर अब बढ़ने लगी।
बिन कुछ कहे वो हमें अब समझने लगे,
ख़ामोशियाँ भी बातें करने लगी॥
______✍गीता -

सर्दी का सितम
नीले आसमान पर बादलों का पहरा था,
बादलों का रंग भी श्यामल गहरा था।
सूरज की ऑंख मिचौली जारी थी
अब बारिश आने की बारी थी।
साथ निभाने कोहरा भी आ गया,
देखते-देखते धरा पर छा गया।
ठंड बढ़ती जा रही है इस कदर,
सर्दी के सितम का हो रहा सब पर असर॥
______✍गीता -

पूस माह में सावन आया
पूस माह में सावन आया,
काली घनघोर घटाएँ लाया।
झमाझम मेघों से बरसा पानी,
कुदरत को ऐसे सावन भाया ।
सर्दी में सर्दी और बढ़ी,
जलधर इतना जल कहाँ से लाया।
यह कैसा परिवर्तन ऋतु का,
देखो पूस में सावन आया।
भीगा गगन और भीगी वसुंधरा,
हर वृक्ष का हर पल्लव नहाया।
ना जाने क्या समाया है प्रकृति के मन में,
जो पूस माह में सावन आया॥
_______✍गीता -

नव-प्रभात
कनक तश्तरी सा आलोकित भानु
लुटा रहा है स्वर्ण रश्मियाँ ।
दूर-दूर तक बिखरा सोना,
हर पत्ती हर डाली -डाली
रौशन हुआ है हर कोना-कोना।
देखो नव प्रभात हो रहा है,
जागो, अब नहीं है सोना॥
_____✍गीता -

हिम से ढ़की हुई हर डाली
सुबह-सुबह सूरज की लाली,
हिम से ढकी हुई हर डाली।
पत्ते-पत्ते बूटे-बूटे पर,
कुदरत ने कारीगरी कर डाली।
बर्फ़ के फ़ाहे गिर रहे राहों पर,
पवन भी सर्द चली है आली।
बादलों ने घेरा है नभ को,
सूरज खेले ऑंख-मिचौली।
घर के अन्दर बैठे हैं सब
राहें हुई हैं खाली-खाली॥
काव्यगत विशेषता…. अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है।
_____✍गीता -

हिम से ढ़की हुई हर डाली
सुबह-सुबह सूरज की लाली,
हिम से ढकी हुई हर डाली।
पत्ते-पत्ते बूटे-बूटे पर,
कुदरत ने कारीगरी कर डाली।
बर्फ़ के फ़ाहे गिर रहे राहों पर,
पवन भी सर्द चली है आली।
बादलों ने घेरा है नभ को,
सूरज खेले ऑंख-मिचौली।
घर के अन्दर बैठे हैं सब
राहें हुई हैं खाली-खाली॥
_____✍गीता -
अतीत के पन्ने
आज अतीत के कुछ पन्ने खोले,
वो पुराने क्षण फिर बोले।
उन पलों को जी गई मैं,
अमृत-प्याला पी गई मैं॥
______✍गीता -
वीरों की वीरगति..
थम गया वक्त है, और आसमान झुक गया,
ऐसी वीरगति को देख,
एक पल को काल चक्र भी रूक गया।
ऑंख में आ गए हैं ऑंसू..
श्रद्धांजलि देने को उनको,
देश का तिरंगा झुक गया॥
______✍गीता -

धूप
धूप समेटकर अपने सुनहरी वसन,
चल पड़ी प्रीतम से करने मिलन
ओढ़ कर सितारों भरी काली चुनर
पलकों में सुनहरे ख्वाब सजाकर
कर के वादा कल फिर आने का जग से,
दुनियाँ को देने दीप्ति आकर
साॅंझ सखी से मिलकर जाती,
वादा निभाने धूप अगले दिन फिर है आती॥
_____✍गीता -

*धूप*
धूप समेटकर अपने सुनहरी वसन,
चल पड़ी प्रीतम से करने मिलन
ओढ़ कर सितारों भरी काली चुनर
पलकों में सुनहरे ख्वाब सजाकर
कर के वादा कल फिर आने का जग से,
दुनियाँ को, देने को दीप्ति आकर
साॅंझ सखी से मिलकर जाती,
वादा निभाने धूप अगले दिन फिर है आती॥
_____✍गीता -

जब साथ किसी अपने का पाया..
हिम को भी पिघलते देखा है,
सूर्य की तपिश पा कर के।
नदियों को जमते देखा है,
चन्द्र की शीतलता पा के।
ऑंख के ऑंसू भी ठहरे,
जब साथ किसी अपने का पाया।
बेचैनी में चैन का एक पल
मन में एक सुकूँ सा लाया॥
_____✍गीता -
सच्चा मित्र
ग़मगीन हालत में जो ला सके,
अधरों पर मुस्कान।
वही तो सच्चा मित्र है,
उसकी निस्वार्थ मोहब्बत है महान।
सुख-समय में करे जो हंसी-मजाक भी,
संकट की घड़ी में जिम्मेदारी ले सुख देने की।
दोस्त के सुख दुःख की हो
जिसे पहचान,
कठिन हालात में भी लबों पर ला सके मुस्कान।
ऐसा दोस्त ज़िन्दगी का खज़ाना है,
सबकी किस्मत में कहाॅं ऐसे दोस्त का पाना है॥
______✍गीता -
मेरी कलम से
जब-जब मेरी कलम चले,
ऐसा कुछ लिखती जाऊँ।
जीवन की सच्चाई कभी और
कभी कल्पना में खो जाऊँ।
जन-जन की बात लिखूँ मैं,
और कभी लिख डालूँ मन की।
कभी सिसकती साॅंसे सुन कर,
लिख डालूँ पीड़ा जीवन की।
कभी चमकते चाँद से पूछूँ,
क्यों घटते बढ़ते रहते हो,
कभी चहकते पंछियों से पूछूँ,
आपस में क्या कहते रहते हो।
सौम्य पवन जब भी बहती है,
तुम इतने याद क्यों आते हो॥
_____✍गीता -
ज़िन्दगी का अफ़साना..

कहीं दिन है कहीं रात है,
कहीं धूप कहीं बरसात है।
सुख और दु:ख आना-जाना है,
यही ज़िन्दगी का अफ़साना है।
लेकिन कुछ सुख-दुःख,
ठहर से जाते हैं जीवन में
सुख का ठहरना तो मन भाया,
दुःख का ठहरना ना रास आया।
यही कटु सच्चाई जीवन की,
कभी कुछ खोया, कभी कुछ पाया॥
_____✍गीता -
कुछ कहते हैं बीते पल
क्या बात है कुछ बीते लम्हों की,
ठहर से गये हैं जीवन में।
बस गये तन मन में मेरे,
जीवन की पूंजी बन कर के।
बचपन की कुछ याद पुरानी,
बस गई बन कर एक कहानी।
यौवन की कुछ याद सुहानी,
कुछ मीठी, कुछ ऑंख में लाई पानी।
मेहनत कर के खाई रोटी,
परिश्रम से ही पाया पानी।
भूले-बिसरे जो पल मेरे,
उन पलों को भी नमन् है।
याद रहे जो पल जीवन के,
उनको मेरा अभिनन्दन है॥
______✍गीता -
अमावस की रात
अमावस की रात है ,
सुलगते से जज्बात हैं।
एक दिया जलाकर करूँ रौशनी
वो कहते यह बात हैं।
दिया जलाकर मिटे अंधेरा,
मन के तम का क्या करूँ।
आज बाहर है रौशनी,
मन के तम से मैं ड़रुॅं।
मन का अंधेरा दूर कर दे,
ऐसा दिया कहाँ से लाऊँ।
मन को दे दे कुछ सुकून जो,
ऐसे पल कहाँ से पाऊँ।
दीप जलाए जब जग सारा,
मैं दिल जलाकर करती उजियारा॥
_____✍गीता -
तुम्हारे बिना..
सूनी-सूनी सी फ़िज़ाऍं हैं,
सूनी सी सब दिशाऍं हैं।
आप नहीं हैं मेरी ज़िन्दगी में अगर,
सूनी-सूनी सी लगती है ड़गर।
हमें ही हमारी नहीं है खबर,
किसी की हमको लगी है नजर।
जुबाॅं चुप है ऑंखें राज़ कहती हैं मगर,
तुम्हारे बिना अब नहीं है बसर,
सूनी-सूनी सी ज़िन्दगी है ये
सूना-सूना सा लगता है नगर॥
_____✍गीता -
लेखन
मन के भाव लिखा करती हूँ,
ज़िन्दगी की धूप और छाॅंव लिखा करती हूँ।
कभी “खुशियाँ” तो कभी,
“घाव” लिखा करती हूँ।
आभार आपका आप इसे कविता कहते हैं,
मैं तो बस जज़्बात लिखा करती हूँ।
कभी दुनियाँ के, कभी निज-हालात
लिखा करती हूँ॥
_______✍गीता -
अम्बर पर मेघा छाए..
दामिनी चमक रही है,
यामिनी लरज़ रही है।
अम्बर पर मेघा छाए,
नीर बरसता ही जाए।
मन मेरा घबराए
देख कर ऐसा मौसम,
तिमिर मुझको डराए।
डर बढ़ता ही जाए,
पवन चल रही सीली-सीली,
भीग गयी मेरी चूनर नीली॥
_____✍गीता -
बरसात
सर्द पवन का झोंका लेकर,
आई ये बरसात है।
बे मौसम ही आई लेकिन,
कुछ तो इसमें बात है।
भीगे सारे बाग-बगीचे,
भीगे पुष्प और पात हैं।
भीग गया है तन-मन सारा,
भीग गये जज़्बात हैं॥
_____✍गीता -
साहित्य और साहित्यकार
साहित्य ऐसा रचना कवि,
जिसमें दिखाई दे समाज की छवि।
बातें हों ऊंचे पर्वत, गहरे सागर की
कभी बहती पवन कभी उगता रवि।
दुख-सुख की चर्चा करे कवि,
कभी बातें हों मुस्काने की।
विरह की व्यथा कहे कभी,
कभी गाथा अश्क बहाने की।
जन-जन में फैली आशा और निराशा की,
जब कवि ज्योति जलाता है,
वही सच्चा साहित्यकार कहलाता है।
जब कोई नदी समुन्दर से मिलने जाती है,
बस, कवि की नजर ही उसे देख पाती है।
काली घटाएँ और ठंडी हवाएँ,
ये तो साहित्य की जान हैं।
मौसम और माहौल से परिचित करवाना,
साहित्यकार की पहचान है॥
_____✍गीता -
अधूरी सी ज़िन्दगी
अधूरी सी हो गई है ज़िन्दगी,
अधूरा सा हो गया संसार है।
पूरी ना हो पाई कुछ अभिलाषा,
अधूरा सा रह गया प्यार है।
अभी दर्द में बहुत हूँ,
थोड़ा समय लगेगा मुस्काने में।
दर्द की नगरी से वापस,
समय लगेगा आने में।
थोड़ा हाथ बढ़ाना तुम भी,
मुझको वापस लाने में।
थोड़ा समय लगेगा मुझको,
फिर से गाना गाने में।
फुल मुरझा जाए जब दिल का,
एकाएक नहीं खिलता ।
सच ही कहा है एक शायर ने,
कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता,
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमान नहीं मिलता॥
________✍गीता -
दशहरा
मन के रावण को मारने के लिए,
दशहरा मनाया जाता है।
किस-किस ने रावण को मारा
कौन राम-मय हो कर आया है।
दशहरा शुभ हो….
यह गीत तो सभी ने गाया है।
कब यह देश अवध पुरी होगा,
कब सीता सुखचैन से राहों पर चल पाएगी,
प्रतीक्षा रत हैं मेरी आँखें,
वह घड़ी कभी तो आएगी..
वह घड़ी कभी तो आएगी॥
______✍गीता -
तनहाइयाँ
दिल के दर्द को कैसे तुम्हें समझाएँ,
हैं बहुत तनहा, यह कैसे तुम्हें बताऍं।
साॅंझ, सवेरे सूरज की लाली है,
मगर दिल उमंगों से खाली है।
रातों को तारे जब टिमटिमाते हैं,
मेरी आँखों के ऑंसू भी झिलमिलाते हैं।
चाॅंद भी मौन सा निहारे मुझको,
आ बैठ पास दर्द दिखा दूॅं तुझको।
सुकून के पल अब नहीं मिल पाते हैं,
ये तो गुज़रे ज़माने की बातें हैं।
दिल के दर्द को कैसे समझाऊँ,
हूँ बहुत तनहा यह कैसे बताऊँ॥
______✍गीता -
बरसात की रात
जल की बूॅंदें गिरी सारी रात,
रात भर होती रही बरसात।
तिमिर छाया रहा भोर में भी,
ऐसे हो गये थे हालात।
ना चन्द्र दिखे ना सूर्य ही आए,
मोती गिरते रहे सारी रात।
भीग गया धरा का ऑंचल,
भीग गये सब पुष्प और पात।
नभ से बूॅंदें गिरी सारी रात,
ऐसी हुई जल की बरसात॥
______✍गीता -
ये श्याम वर्ण के बादल..
श्याम वर्ण के बादलों से,
जब गगन घिर जाएगा।
नीला नीला आसमान,
मेघों के पीछे छुप जाएगा।
तब जल की गिरे फुहार,
शीतल-शीतल चले बयार।
भीगेगी तब धरती सारी,
भीगेगा संसार॥
_______✍गीता -
हिंदी दिवस पर चन्द पंक्तियाँ
हिंदी है भारत की भाषा,
मेरे देश की पहचान है।
हिंदी की श्रीवृद्धि हो,
ऐसा मेरा अरमान है।
हिंदी से हिंदुस्तान है,
हिंदी ही हमारी पहचान है।
यह वह भाषा है, जिसमें हम हॅंसते गाते हैं,
हिंदी में ही हम भारतवासी,
अपनी व्यथा-कथा सुनाते हैं।
आओ हम हिंदी का सम्मान करें,
हिंदी में मेरी चले लेखनी,
हिंदी का ही हम गुणगान करें॥
______✍गीता -
ऐ ज़िन्दगी सुन..
ऐ ज़िन्दगी सुन,
कितनी बदल गयी हो तुम।
हॅंसती खिलखिलाती थी कभी,
अब रहने लगी हो गुमसुम।
वही ठंडी हवाएँ, वही बादल बरसते,
फिर ये नैना मेरे नीर लिए क्यूँ तरसते।
ऐसी आशा ना थी तुमसे,
बदलोगी एक दिन इस कदर
कि लगने लगेगा तुमसे डर।
छाई घनघोर निराशा है,
क्यूँ हो गयी ये दुर्दशा है।
खो दिया एक सितारा,
मैंने अपने गगन का।
वो था बहुत ही प्यारा,
अति विशिष्ट जीवन का।
अश्क गिरे लब तक आए,
यादों में रहती हूँ गुम,
ज़िन्दगी कितनी बदल गयी हो तुम॥
____✍गीता -
अवनि और अम्बर
अवनि और अम्बर का कब मिलन हुआ,
देखा दूर क्षितिज में तो मिलने का बस भ्रम हुआ ।
नभ ने बरसा कर रिमझिम जल,
खूब नेह दिया धरा को
तपती धरती पर गिरता पानी,
कह गया उसके तपने की कहानी।
जल गिरा तो खिल उठे पल्लव और फूल,
दब गयी उड़ने वाली धूल॥
_____✍गीता -
तपिश में इक छाॅंव..
उदासी का समन्दर है इन नयनों में,
उठती हैं लहरें बेचैनी की।
फिर ऑंखों से रिसता है पानी,
यही है इस जीवन की कहानी।
कोई जब लेकर आए इक नाव,
निकालने को इस समन्दर से,
मिटाने को हर इक घाव..
छलक जाता है मेरा दर्द उसके नयनों में,
दे जाता है तपिश में इक छाॅंव॥
_____✍गीता -
रंग बदलती दुनियाँ
गिरगिट रंग बदलता है,
यह बचपन से जाना।
साॅंप डॅंक मारता है ,
यह भी हमने माना।
शेर शिकार करके खाए,
हाथी नकली दाॅंत दिखाए ।
इनकी प्रकृति ऐसी ही है,
ये प्रकृति ने ऐसे ही बनाए ।
मगर इंसान कब रंग बदल जाए,
कब डॅंक मार कर चला जाए,
यह कोई ना जाने।
कब कर दे अपनों का ही शिकार,
नकली दाॅंत दिखा-दिखा कर,
कब चुभा दे सीने में कटार॥
_____✍गीता -
वो मेरा रुहानी प्यार..
हाथ फैला कर श्वेत कुमुदिनी सी,
वो कर रही थी मेरा इंतज़ार।
ना जाने कब से करता था मैं
उससे प्यार ।
वो मेरा रुहानी प्यार..
जिसका कभी न किया मैनें इज़हार
वो समझी तो समझी कैसे ।
यह सोच कर हैरान हूँ
बढ़ चला उसकी ओर,
आखिर मैं एक इंसान हूँ।
वो पावन पूजा के दीपक की लौ सी,
उसको अपलक मैं देख रहा।
मुस्कुरा कर कहती है मुझे फ़रिश्ता,
रुहानी प्यार का है उससे रिश्ता॥
______✍गीता -

आ गया सूरज
वृक्षों पर आ गया सूरज,
धरा पर छा गया सूरज।
बिखराकर अपनी स्वर्ण रश्मियाँ,
गीत कोई गा गया सूरज।
हल लेकर निकल पड़े किसान,
देखो आ गया सूरज।
अंधकार मिटाने धरा से,
सदियों से आता है सूरज।
नयी भोर के नित नये गीत,
हमें सुनाता है सूरज।
रौशनी बिखरती है धरा पर,
धरा को भा गया सूरज॥
_____✍गीता -
वीर चिकित्सकों को प्रणाम
कोरोना से आजादी की जंग में,
जो नित वैक्सीन लगा रहे हैं
स्वतंत्रता सेनानी से कम नहीं हैं,
वो चिकित्सक देश को बचा रहे हैं।
गाँव-गाँव, नगर-नगर में जाकर,
इस रोग के विरुद्ध कैम्प लगा रहे हैं
(15अगस्त)आजादी के इस पर्व पर,
इन वीरों को कोटिश प्रणाम,
देश की सेवा करने हेतु
गीता करती है इनका सम्मान॥
______✍गीता -
स्वतंत्रता दिवस की सबको बधाई
शत् शत् नमन है मेरा उन वीरों को,
जिन्होंने देश को आजादी दिलवाई।
आज स्वतंत्रता दिवस की है सबको बधाई।
भारत माँ की रक्षा खातिर,
अपने सीने पर गोली खाई।
जय हिन्द का गूॅंज उठा नारा।
उत्साह की सीमा नहीं,
उत्साह बहुत ही सारा ।
शीश झुकाकर नमन है उनको,
जिन्हें है देश जान से प्यारा।
देश की रक्षा करने वालों को,
मैं कोटि-कोटि प्रणाम करुॅं।
वार दिया निज जीवन स्वदेश पर,
उनका हृदय से सम्मान करूँ॥
____✍गीता