Geeta kumari, Author at Saavan's Posts

बारिश मूसलाधार

बारिश मूसलाधार है, मुम्बई की थमी रफ्तार है। हर जगह है जलभराव, रेल की पटरी पर चले है नाव। हवाएं भी बहुत तेज़ चली, आती रही बारिश ,मुसीबत ना टली। जल भर गया है, हर कूचे हर गली, मानो कुपित हुए हैं इंद्र देव, माया – नगरी का भयावह है नज़ारा, प्रसन्न करो अब इंद्र देव को माया नगरी को देवेंद्र का ही सहारा। »

माखन खाते पकड़े गए कन्हाई

यशोदा पूछ रही कान्हा से, “लल्ला, मटकी से रोज़ – रोज़ माखन कौन चुराता है”। लाड लड़ा के बोले कान्हा, डाल के गलबैयां मां के, ” मैं क्या जानूं , मैं हूं नन्हा बालक ,तू मेरी प्यारी माता है”। मां बोली,” रहने दे कान्हा, हर दिन तेरा ही उलाहना आता है” बलराम से पूछूंगी मैं, वो जो तेरा भ्राता है। “ना मैया ना, बलराम तो झूठा है, वो कितना मुझे सताता है” ये स... »

मंदिर बना राम लला का

भव्य मंदिर बना, राम लला का ना ही कोई उपमा है, ना कोई तोड़ इसकी कला का सोचा था, चाहा था, उम्मीद थी लगाई, आशा हुई है पूरी, देखो शुभ घड़ी है आई। सदियों से प्रतीक्षा थी इस पल की, टूटी हैं कड़ियां किसी के छ्ल की। पुष्प बरसाएंगे देव नभ से, प्रतीक्षा हो पूरी, चाहत थी कब से। मंदिर पर चमकेगा सूरज भी चम – चम, मेघों का जल भी बरसेगा छम – छम । जय – जय कार गूंज रही अयोध्या में, नाच रही हैं ,अय... »

कोई जब जीवन से जाता है

कोई जब जीवन से चला जाता है, टूटता नहीं फ़िर भी नाता है। बेबस से हो जाते हैं सब, ग़म उसका हरदम सताता है। उजड़ ही जाती है, दुनियां किसी की, जब कोई अपना इस जग से जाता है। पल – पल याद आती है ,उस प्रियजन की,। ह्रदय में विरक्ति भाव भी आता है। कौन सी है वो दुनियां ऐसी, जहां से लौट के ना कोई आता है। »

मेरे घर पर आए चोर

एक रात की बात बताऊं मित्रों , मेरे घर पर आए चोर । थी मैं अकेली उस दिन घर पर, मुझ पर आज़माने लग गए ज़ोर । “पैसे देदो, ज़ेवर देदो”, उनकी मांगों का ना था छोर एक ने मुंह बंद किया मेरा, दूजे ने पिस्तौल लगाई मैने भी फिर तुरंत अपनी थोड़ी अक्ल दौड़ाई, ले गई दूजे कमरे में, जहां रौशनी थी नहीं। झटका उसका हाथ मैंने ,मुंह पर फ़िर एक चपत लगाई दौड़ के खिड़की खोली मैंने, मचा दिया जी भर के शोर, मदद करो... »

पटरी पर फिर लौटा जीवन

पटरी पर फिर लौटा जीवन, पर पहले जैसी बात नहीं है। मुंह ढ़ककर घूमे हैं दिनभर, पहले जैसी रात नहीं है। हॉल, मॉल सब बंद पड़े हैं, विद्यालयों पर लगे हैं ताले। रौनक गुम है बाज़ारों से, सूने पड़े हैं गलिहारे। त्राहि – त्राहि हो रही धरा पर, कोई ” संकटमोचन”, संजीवनी लाके बचाले।। »

कोरोना -काल

इंसान इंसान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। जिन लोगों से महकती थी ज़िंदगी, उनसे मिलने से मुकरने लगा। वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा, मिलकर “अकेले – अकेले” ये दुआ करने लगा। »

वो बुरा मान गए..

हमने सच बोला, वो बुरा मान गए ज़रा मुंह खोला, वो बुरा मान गए। सदियों से सुनती ही तो आई है नारी, आज ज़रा सुनाया, तो बुरा मान गए। औरों की चाहत को हमेशा चाहा, आज अपनी चाहत ज़ाहिर की,वो बुरा मान गए। ऐसा नहीं है कि हम समझते नहीं थे, उन्हें लगा, हम समझने लगे, तो बुरा मान गए। »

मेरी मैया

यशोदा ,देवकी को लगे है, कान्हा सबसे प्यारा। मेरी मैया सबसे प्यारी, कान्हा का ये नारा। मैया मैया कहता कान्हा, लगे बहुत है प्यारा। मेरी मैया सबसे सुंदर, माने ये जग सारा। »

तरकश

अभी और भी तीर हैं,तरकश में तेरे बाक़ी, हार से पहले रोता क्यूं है। इस युद्ध में तेरे विरूद्ध हैं कुछ लोग, कुछ लोग तेरे साथ भी हैं,। पलकें भिगोता क्यूं है। »

जीवन की पहेली

अपनों की भीड़ में अकेली सी, खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी। किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल, सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली। »

रौशनी की आस

ज़िंदगी की तपिश बहुत हमने सही, ये तपन अब खलने लगी। रौशनी की सदा आस ही रही, रौशनी की कमी अब खलने लगी। बहुत चोटें लगीं, बहुत घाव सहे सहते ही रहे कभी कुछ ना कहे, वो घाव अब रिसने लगे, मरहम की कमी सब खलने लगी। औरों को दिए बहुत कहकहे, अपने हिस्से तो .गम ही रहे। ये .गम अब मेरे हिस्से बन चले, .खुशियों की कमी अब खलने लगी। रौशनी की सदा आस ही रही, रौशनी की कमी अब .खलने लगी। »

जीवन का सफर

जीवन का सफ़र सुहाना है साथी, गर साथ तुम्हारा है। जीवन की इस बगिया में, मैं तेरा सहारा हूं, तू मेरा सहारा है। बच्चों की ज़िम्मेदारी करनी है पूरी, अब ये काम हमारा है। जीवन के अम्बर में तू मेरा उजला सितारा है। जीवन का सफ़र सुहाना है साथी गर साथ तुम्हारा है »

झूठ की दुकान

झूठ की दुकान खूब चली, “सच”, सच बोलता रहा उसकी ना चलनी थी, ना चली, पर ये ज्यादा लंबा चलने वाला ना था काठ की हांडी में एक बार तो पका लिया, फिर दोबारा चढ़ी, जलनी ही थी सो जली। सच्चाई तो फिर सच्चाई है, एक ना एक दिन लगेगी भली झूठ को देखो, घूमे है गली गली। ✍️.. गीता »

राखी का त्यौहार

सूना जाए राखी का त्यौहार, राखी भेजी है, डाक से इस बार ना भैया मिलें, ना भाभी मिलें, ना मिले मां पापा का प्यार। ना भतीजी, भतीजे के मुख पे खुशियां मै देखूं, ना कर पाऊंगी उनको मैं दुलार। अनमनी सी हो रही हूं मैं तो, सूने सूने से होंगे सारे त्यौहार। »

नूतन अनुभव

रेलगाड़ी की खिड़की में बैठा, एक युवक बोला पापा से कितने सुंदर पेड़ पौधे हैं, कितनी सुंदर है हरियाली ये सब कहते कहते उसके मुख पर, आ गई खुशियों की लाली वाह, कितने सुंदर तारे है, कितनी सुंदर है ये रात एक पड़ोसी महिला यात्री, हैरान हुई सुनकर ये बात बोली उसके पापा से, भैया इसे कहीं दिखाओ कैसी बातें कर रहा है लड़का, किसी डॉक्टर के ले जाओ वह मुस्कुरा कर बोला, बहिन, डॉक्टर के यहां से ही आया जन्म से अंधा थ... »

मुद्दतें हो गईं

दोस्तों से मिले मुद्दतें हो गईं, देखे हुए चेहरे खिले, मुद्दतें हो गईं कोरोना ने जाल बिछाया ऐसा, बाहर ना निकल सके हम बाहर की बहार देखे मुद्दते हो गई कोई जल्दी से लाए इसका “टीका”, जीवन लगने लगा है, फ़ीका फ़ीका होली भी गई फ़ीकी ,राखी भी सूनी जाए दीवाली तक ही काश, टीका वो आ जाए नव वर्ष फ़िर मनाएंगे धूमधाम से, कोई जश्न मनाए मुद्दतें हो गईं। »

सारा जहान बाक़ी है

थक कर बैठ गया क्यूं राही, क्या अभी थकान बाक़ी है? नहीं मिलती मंज़िल आसानी से, अभी इम्तिहान बाक़ी है। जीवन के संग्राम में , मिलेगी शह और मात भी, घबराना नहीं है तुझको, अभी सारा जहान बाक़ी है Correct typing mistake in title__ »

अच्छे मित्र

किताबों से अच्छे मित्र कहां हैं, कविता से अच्छे चित्र कहां हैं। दुखी हो के ना बैठ “गीता”, “सावन” पे जाओ, सखी, दोस्त, बंधु यहां हैं। »

शत शत नमन है भूमिपुत्र को

जय हो कृषक, जय हो किसान, भारत मां का तू सम्मान “लॉकडाउन” की मजबूरी में, महंगे दामों बेच रहे थे,जब साहूकार अपना सामान तब भी भूमिपुत्र ने अन्न दिया, अधिक दाम भी नहीं लिया शत शत नमन है उस हलधर को, जो कर रहा देश को अन्न दान तू इस मिट्टी की पहचान, भारत मां की तू है शान भूखा ना रहे कोई भी घर, प्रयत्न कर रहा है हलधर »

देख सखी आए हैं जवांई

मंजुल रूप लेकर, देख सखी आए हैं जवांई। रौनक लग गई मेरे घर पर, बजने लगे ढ़ोल शहनाई आया घोड़ी पे सवार ,वो बांका कुमार, लाने मेरी बिटिया के जीवन में बहार देख के उसको बिटिया, धीरे से मुस्काई, थोड़ी सी शरमाई, थोड़ी सी सकुचाई खुशियों की लाली उसके मुखड़े पे छाई, वो विनीत है, वो विनम्र है, लोग कहें मेहमान है पर मेरे लिए वो पुत्र के समान है। मांग उसके नाम की सजाती है जो, करता उसका सम्मान है। खुश रखता है निज... »

वीरों को नमन है मेरा

नमन है मेरा उन वीरों को, जो दुश्मन से भिड़ जाते हैं भारत मां की रक्षा खातिर, सीने पर गोली खाते हैं जय हिन्द का लगता नारा है जोश की कमी नहीं है,जोश बहुत सारा है हाथ जोड़कर 🙏नमन है उनको जिन्हे देश जान से प्यारा है 🇮🇳 »

बाद मरने के….

बाद मरने के अपने, हम बहुत रोए उन्हें पता ही ना चला, उन्हें लगा हम थे सोए कुछ देर बाद, उन्हें हुआ अहसास, रो के बोले,”क्यूं चले गए मेरे ख़ास” किसी को खोज रही थी नज़र वो आ गए सुन के हमारी ख़बर उन्हें देख कर मुस्कुराई अंखियां, लो आ गईं मेरी चंद सखियां उनके होठों पे तारीफें थीं, आंखों में थे .गम बस यही चंद यादें संग ले चले हम। »

कुदरत ने सिखलाया है

हर जीव को जीने का हक़ है, जीवों ने डाली है अर्जी कुदरत ने अपील सुनी है, अब ना चले बस, मानव की मर्ज़ी क्षुधा मिटाने की खातिर, निर्दोषों को है मारा, कैसा है शैतान वो मानव, जीवों ने लगाया है नारा क्षुधा मिटाने की खातिर कुदरत ने फल, फूल बनाए हैं फिर जीवों को क्यूं मारा जाए वो भी तो कुदरत से आए हैं कुदरत ने मानव को दिखलाया है, “जियो और जीने दो “, सिखलाया है ये शुद्ध हवा ये गंगाजल, मिलते ही ... »

याद आती हैं बेटियां

छोड़ बाबुल का घर, जब चली जाती हैं बेटियां सभी त्यौहार लगते हैं सूने, बहुत याद आती हैं बेटियां दिवाली के हर दीप में, मुस्कुराती हैं बेटियां होली के हर रंग में, खिलखिलाती हैं बेटियां खुशी दमकती है चेहरों पर, जब मिलने आती हैं बेटियां ये दर्द और खुशी वो क्या जानें, जिनके घरों में नहीं होती हैं बेटियां »

दीपक की भी एक सीमा है

रात भर दीपक जला, भोर होने लगी तो बोला,”अब मैं चला” मैंने कहा और जलो, अभी अंधियारा बाकी है, “मेरी भी एक सीमा है”, कह कर वो मुस्कुराया उसकी अर्थपूर्ण मुस्कुराहट में, एक संदेशा मैंने पाया… जिसकी जब जितनी ज़रूरत हो, वह उतना ही मिल पाता है। उसे पता है, सूरज के आगे उसका क्या काम, वो चतुर है, उसे समझ है, उसकी भी एक सीमा है,। ये उसको भी है भान। »

बदले दोस्त

दोस्तों में दुश्मनी ने घर कर लिया, ना जाने कैसे और कब कर लिया मौसम बदले वो भी बदले, उन्होंने दोस्ती का दूसरा दर कर लिया »

मौसम सुहाना सावन का

मौसम सुहाना सावन का आया, संग अपने उत्सवों का पिटारा लाया ठंडी ठंडी ये बहती पवन, बागों में खिले हैं कितने सुमन आए जब बरखा की फुहार, पिया भी करे हैं मनुहार अंगना में भीगे मेरी धानी चुनर, पिया को भाएं मेरे सारे हुनर गीत लिखूं या खिलाऊं मैं खाना, वो हंस के बोलें एक और तो लाना सखियां सारी दिखाएं मेहंदी वाले हाथ, मां गौरी से मांगू मैं सदा “उनका”साथ »

ये कलियुग है

ये कलियुग है, इस में सतयुग सी बात कहां, जो प्यार करे ,कहलाए दीवाना परवाह करे ,उसे पागल माना तिनका चुगता है हंस यहां, मोती खाए कौवा काना जो चाल चले टेढी मेढ़ी, चढ़ जाता जल्दी सीढ़ी पर, जो सीधे रस्ते चलता है, रह जाता है पीछे यहां ये कलियुग है इस में सतयुग सी बात कहां… »

ए वक्त बात बता क्या थी

ए वक्त तू गवाह है मेरा, तू बात, बता क्या थी हम बिछड़ गए, मेरी खता क्या थी हजारों बंदिशें भी थीं,हजारों मिन्नतें भी की समझा ना ये ज़माना ,ये बात पता क्या थी वो माने नहीं, मेरी दलीलों को कभी, इससे बड़ी सज़ा क्या थी ना सोचा था, ना समझा था कभी , कि ऊपर वाले की रजा क्या थी »

प्रकृति का बदलाव

कलरव करता पंछी उड़ा आकाश तो अच्छा लगा, शुद्ध हवा में आई सांस तो अच्छा लगा ये कोरोना आया तो गलत है लेकिन, प्रकृति का ये बदलाव अच्छा लगा तारे चमक रहे हैं निर्बाध चमचम, वो चमकता चांद भी अच्छा लगा दूर नगर में उदास था कोई अपना, वो आ गया है पास तो अच्छा लगा ये शहर है अनजानों का मगर, मिल गया कोई ख़ास तो अच्छा लगा »

राखी बंधन

अब के बरस भैया पीहर ना आऊं, बांधन को राखी तोय रे रस्ते में बैरी कोरोना खड़ा है, नजर वो रखे है मोए पे डाक से भेजी है भैया को राखी, भतीजी से लियो बंधवाए रे अगले बरस बैरी कोरोना का अंत होगा, फिर बांधूंगी राखी ,तोए आए के »

अनदेखे, अनजाने दोस्त

“सावन” पर मुझे मिले, कुछ अनदेखे, अनजाने दोस्त जिनकी समीक्षा पाने की, प्रतीक्षा रहती है हर रोज़ लेखन की इस नगरी में, स्वागत करते हैं सबका शत शत नमन है उन मित्रों को,🙏 मेरा भी स्वागत किया धन्यवाद है, धन्यवाद है अनदेखे, अनजाने अब, लगते हैं पहचाने से…. »

मेरा मन

सोना तपा कुंदन बना, कुंदन तप के राख मैं तपी तपती रही, कुंदन बनी ना राख बरखा ऋतु आई, आई नई कोंपल हर शाख मेरे मन भी उठी उमंगें, छू लूं मैं आकाश »

वो मेरी बचपन की सखी

वो मेरी बचपन की सखी, मिली मुझे कितने दिन बाद जानती थी मैं ये कबसे, आएगी उसे एक दिन मेरी याद घर गृहस्थी में व्यस्त रही थी, चेतन मन में थे कितने काम पर अवचेतन मन में थी मैं कहीं ना कहीं, ये उसको भी ना था भान जब फुर्सत के क्षण आए तो, याद आई होंगी बचपन की बातें यूं ही तो नहीं छूटते बचपन के प्यारे नाते रोक ना पाई वो खुद को, संदेशा भिजवाया मुझे मैं भी भागी भागी आई, कितने दिन बाद वो पाई वो मेरी बचपन की स... »

मां के साथ ये कौन है

हास्य कविता बिट्टू घूम रहा था गुमसुम, हाथ में लेकर एक फोटो मां ना जाए छोड़कर कहीं, इस उलझन में था वो नाना जी को फोन लगाया, अपने मन का हाल बताया नाना -नानी अचरज में आए, बेटी को फिर फोन लगाए “बिट्टू ये क्या बोल रहा है” किस फ़ोटो को ले डोल रहा है फ़ोटो देख के मां मुसकाई, सारी बात समझ में आई मां-पापा की शादी की फ़ोटो लेकर, बिट्टू गुमसुम घूम रहा है पापा को पहचान ना पाया, क्योंकि बाल उड़े और... »

महफ़िल

जिस महफ़िल में कोई जानता ना हो, उस महफ़िल में जाना क्यूं है जिस महफ़िल में,अनसुना कर दें तुझे उस महफ़िल में, कुछ सुनाना क्यूं है मुखौटे लगा कर बैठे हैं लोग जहां, वहां तुझे भी मुखौटा लगाना क्यूं है झूठ से ही .गर ख़ुश हैं कुछ लोग, “गीता” तुझे सच बताना क्यूं है »

ये रणबांकुरे भारत के

ये रणबांकुरे भारत के,सीमा पर देखो खड़े हैं हम चैन से सोएं रातों को, दुश्मन से वो लड़े हैं गर्मी का मौसम हो,या पड़े कड़कती सर्दी भारत मां की रक्षा करते ,पहन के फौजी वर्दी याद आती है घर की मगर,फिर भी इन्हें सुहाती ये डगर अड़ियल है दुश्मन, बर्फीली वादी खाने को मिलती है, अक्सर रोटी सादी देशभक्ति मन में लिए,सरहद पर सैनिक खड़े हैं दिल से नमन है उन वीरों को, भारत मां की रक्षा खातिर, जो बैरी से लड़े हैं »

जो बीत गई…

जो बीत गई वो याद बनी, यादों में एक चेहरा मुस्काया है आंखें हैं नम, दिल में है .गम, होठों ने गीत नया एक गाया है जो बीत गई वो याद बनी, यादों में चेहरा एक समाया है कहीं पर भी हों वो, दिल से दूर नहीं हैं कुछ यादों ने, कुछ ख्वाबों ने अक्सर हमको मिलवाया है जो बीत गई वो याद बनी… यादों ने गीत नया लिखवाया है »

हृदय की वेदना

हृदय की वेदना जब सीमा के पार हुई कोशिशें बहुत कीं कम करने की, पर वो शमशीर की धार हुई तब लेखनी चल पड़ी मेरी, दर्द कम करने के लिए दिल के जज्बातों को जब -जब किया बयां, एक कविता हर बार हुई »

बहती नदिया सी बह गई मैं

लोभी दुनियां में जी गई मैं, विष का प्याला पी गई मैं ना मीरा हूं ना नीलकंठ, फिर भी सब झेल गई मानों प्राणों पर खेल गई, हुई भावहीन,हुई उदासीन कंचन सी निखर गई, टूटे मोती सी बिखर गई अंतर्मुखी सब कहने लगे, सबका कहना सह गई मैं, बहती नदिया सी बह गई मैं »

,साधना

किसी पत्थर की मूरत में, लगी सूरत खुदा की सी उसे पूजा उसे माना, उसे अपना खुदा जाना बड़ी भूल हुई अरे हमसे, आंखों से आंसू निकल पड़े, व्यर्थ गई सब साधना निरा पत्थर का बुत निकला, जिसे हमने खुदा जाना »

जब तू याद आया

जब मैं हुई उदास, तो तेरा मुस्कुराना याद आया जब हुई तुझसे दूर, तो तेरा पास आना याद आया तू नहीं आया, पर तेरी याद चली आई तेरी याद से मिलकर, मुझे मुस्कुराना याद आया किताब में रख़ा मिला एक सूख़ा फ़ूल गुलाब का आज फ़िर से वो किस्सा सुहाना याद आया आंखों में नमी है, मग़र रोती नहीं हूं मैं किसी को दिया हुआ, एक वादा पुराना याद आया फुर्सत से बीत जाते हैं, जब कुछ पल मेरे मुझे फ़िर वो गुज़रा ज़माना याद आया »

तन्हाई हमें रास आने लगी

महफ़िलों से डर लगने लगा, तन्हाई हमें रास आने लगी दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा, दुश्मनी की बांस आने लगी समझा था जिसे अपना हमसफ़र, उसी ने बदल दी है अपनी डग़र दो राहे पे हमें छोड़कर, चल दिये वो मुंह मोड़कर आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा दुश्मनी की बांस आने लगी सपने मिट गए, अरमां लुट गए, भरे बाज़ार में हम तो लुट-पिट गए जब लुट गए तब लगी थी ख़बर, हमीं को हमारी लगी थी नज़र जुबां चुप... »

अन्देखा, अन्जाना बैरी ( कोरोना)

शहर में छिपा है अन्देखा ,अन्जाना बैरी दोस्तों इससे जीतने की कर लो तैयारी दोस्तों आता नहीं नज़र,पर रख़ता है वो नज़र, ना रहना इससे तुम बेख़बर दोस्तों वो करता है वार, जाते ही बाहर बचना है इसके प्रहार से दोस्तों निकलो नकाब पहन के, दो गज़ की दूरी बनाके नमस्ते का तौर-तरीक़ा है असरदार दोस्तों मिलने को जी चाहे ग़र प्रियजनों से, तो करते रहना फ़ोन बार -बार दोस्तों श्रंखला तोड़ दो, सामाजिक दूरी से कर सकते हो... »

चल पडे बैठकर रेल में

ये मेहनतकश हैं भारत के, चल पडे बैठकर रेल में इनकी दुविधा समझें हम सब, ना लें इसको खेल में देश बन्द हुआ, काम बन्द हुआ पेट बन्द तो नहीं होता काम नहीं, कमाई नहीं है, भूखे पेट कैसे सोता., ना खाना है ना दूध मिला घर में भुखा बालक रोता भुखमरी की दुर्दशा रहे थे ये झेल गांव इनके इनको ले चली ये रेल »