Geeta kumari's Posts

*परिवर्तन”

परिवर्तन तो तय है उससे क्या भय है प्रतीक्षा कर, किसी का दिल बदलेगा अगर, तो किसी के दिन भी बदलेंगे *****✍️गीता »

*एक था राजा एक थी रानी*

एक था राजा एक थी रानी सुनो सुनाऊं एक कहानी खुशी खुशी दोनों रहते थे गीत खुशी के गाते थे प्यार बहुत था दोनों में एक दूजे पर जान लुटाते थे फिर एक दिन आया तूफान बहुत बरसा था उस दिन पानी बिजली गिरी महल के ऊपर बहुत हुई राज्य की हानि टूट गए थे दोनों के दिल सुनकर आया आंख में पानी एक था राजा एक थी रानी टूटे दिल और खत्म कहानी *****✍️गीता »

*मंज़िल*

दीप तले अंधेरा है निशा के बाद सवेरा है ना डर देखकर मुश्किल मंज़िल को तेरा इंतजार है *****✍️गीता »

बेटी हुई पराई

बेटी हुई पराई देखो बेटी हुई पराई, यह कैसी ऋतु आई देखो बेटी हुई पराई मेरे आंगन के पौधे की डाली बड़ी ही नाजुक नाजुक सी वह थोड़ी नखरेवाली, मेरे आंगन में जब वह आई मुझे लगी बहुत ही प्यारी मेरे मन को बहुत सुहाई आज विदाई की इस बेला में, देखो आंख मेरी भर आई मेरी आंखों से मोती बरसे ये मोती मैं तुझ पर वारूं, आजा तेरी नजर उतारूं बेटी जो चाहे सो ले जा पर एक चीज मुझे भी दे जा, यही छोड़ जा अपने नखरे कहीं किसी क... »

*किस्मत*

किस्मत से ही बनते हैं, दिलों के रिश्ते वरना चंद मुलाकातों से, कहां रिश्ते बना करते हैं.. *****✍️गीता »

*दुआएं*

चलने की कोशिश तो करो, मंजिल भी मिलेगी राहों में मुश्किल है तो, मुश्किल भी हटेगी अंधियारे से ना डरना, दुआओं से पथ तेरा रौशन रहेगा *****✍️गीता »

“सपने”

कुछ ख्वाब भी झूठे हैं, और ख्वाहिशें भी अधूरी हैं पर खुश रहने के लिए, कुछ सपने भी जरूरी हैं *****✍️गीता »

*दोस्ती एक दुआ सी*

दोस्ती एक बूंद सुधा सी दोस्ती लगे खुदा सी, दोस्ती है एक दुआ सी दोस्ती तिमिर में रौशनी, दोस्ती उजाले की प्रभा सी *****✍️गीता »

शहादत को नमन

शत्रु को तोड़ कर लेटा, तिरंगा ओढ़ कर बेटा भारत मां की हर मां का , सीना फटता जाता है जब किसी का लाल तिरंगा , ओढ़ के आता है बूढ़े बाप ने देखा जब, तो आंखों से आंसू निकल गए बोला मेरी लाठी टूटी, कैसे अब जिया जाए दो मासूम पूछे मां से, पापा क्यों खामोश से हैं हमें पुकारते भी नहीं है, नींद में क्यों आए हैं पत्नी का सिंदूर मिटा जब, मुंह को कलेजा आ गया बिंदी भी हटा दी उसकी, कंगन भी उतार दिया आंखें सबकी हो ग... »

*वंदना*

आ गई मैं मंदिर में, धोकर अपने हाथ पैर ताकि संग मेरे ना आए, कोई कपट कोई बैर घंटा बजाकर सुना मधुर स्वर, उसकी तरंगों से धार्मिक हुए विचार धूप दीप नैवेद्य चढ़ाकर, करूं वंदना हाथ जोड़कर पहनाऊं पुष्पों का हार, भावुक हो भगवान को देखा हो गई अब आनंदित “गीता’ *****✍️गीता »

मेरी अभिलाषा

बच्चों को पढ़ाती हूं जो कुछ सीखा अपने गुरु से, उनको भी सिखाती हूं कामयाब हो भारत के बच्चे, निश-दिन करती हूं जतन अच्छी शिक्षा सीखें बच्चे, संपन्न हो मेरा वतन यही सोच है यही अभिलाषा, मेहनत करती हूं लेकर यह आशा *****✍️गीता »

*जय हो कृषक,जय हो किसान*

खेतों से निकलकर, राजधानी की सड़कों पर आ गया है किसान देखो कितना है परेशान दिल्ली की सर्दी में, खुद खाना बना रहा खुले अंबर के नीचे देखो रात बिता रहा सड़कों पर बैठा है उदास, लेकर आया है कुछ आस तुम डटे रहो, तुम लगे रहो हो पूरी तेरी हर कामना क्योंकि शुद्ध है तेरी भावना सबको अन्न देता, अन्नदाता तू है महान देश की मिट्टी की तू शान, जय हो कृषक,जय हो किसान *****✍️गीता »

*माँ-बाप के चेहरों पर मुस्कान*

ना जाना बड़े मकानों पर ना जाना उनकी मुस्कानों पर, ना देख झुक जाना चमक सोने की ना प्रभाव में आना,सुन खनक सिक्कों की, जहां बुजुर्गों का हो सम्मान जहां माँ-बाप के चेहरों पर हो मुस्कान, जान लेना यह घर अमीरों का है उस घर के लोगों को प्रणाम *****✍️गीता »

*भलाई*

भलाई करो गर जीवन में, वह व्यर्थ नहीं जाती है यह तो बस प्रभु ही जानें, वह किस रूप में वापस आती है *****✍️गीता »

प्रभु

जरूरी है मन का झुकना प्रभु नहीं मिलते हैं, मात्र सिर झुकाने से.. »

गुरु-पर्व

संवत् 1526 29 नवंबर 1469 कार्तिक पूर्णिमा के दिन, पंजाब के तलवंडी गांव में गुरु नानक जी ने जन्म लिया जाना गया ये नाम ननकाना साहब नाम से, वर्तमान में है जो पाकिस्तान में सिख धर्म के प्रथम गुरु हैं आज इनका जन्म दिवस है, प्रकाश-उत्सव और गुरु-पर्व है पिता का नाम मेहता कालू था माता तृप्ता देवी थीं और बहन का नाम नानकी था विवाह हुआ 1485 में, पत्नी का नाम था सुलक्षिणी देवी दो पुत्र रत्न हुए नानक जी के श्र... »

*कसम से*

*कसम से* अब आप बिन रहा नहीं जाता किसी से कुछ कहा भी नहीं जाता हर पल आपकी कमी महसूस होती है हर दम अधूरी जमीं महसूस होती है कितनी भी मसरूफ़ रहूं, एक आहट सी आती है सूखे पत्तों सी बिखर जाती हूं तस्वीर तुम्हारी देख कर निखर जाती हूं आपकी यादें सुबह से शाम कर देती हैं, सच पूछो तो परेशान कर देती हैं यादों से कहो, यूं ना आया करें, हमें हरदम यूं ना सताया करें निशा का तीसरा पहर हो रहा है, देखो ना सारा संसार ... »

देव-दिवाली

कार्तिक पूर्णिमा की देव-दिवाली आई है काशी में ख़ुशियां छाई हैं ज्योति-पर्व है देवों का, ये देवों की दिवाली है काशी के गंगा-घाट पर, सुर दीप जलाते हैं आकर स्वर्ग-लोक में छाई खुशहाली है आज देवों की दिवाली है शिव-शंकर ने आज के दिन, त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार किया देवों का उद्धार किया इसी खुशी में सारे सुर मिलकर देव-दिवाली मनाते हैं गीत खुशी के गाते हैं गंगा-घाट पर जगमग दीपों की माला है यहां चारों ... »

*एक था बंजारा एक युवरानी*

भूली-बिसरी याद पुरानी, आज सुनाऊं एक कहानी एक था बंजारा एक युवरानी परवान चढ़ी थी प्रेम-कहानी प्रेम कहां छिपता है लेकिन ख़ुशबू सा वो फैल गया बात फैली राजा तक आई, राजा ने सुनी उसने भृकुटि तानी बंजारे को धमकी दे दी दूर चला जा छोड़ राजधानी बंजारे ने एक ना मानी, देनी पड़ी जान की कुर्बानी ये सुन विष-पान कर गई युवरानी, सबकी आंख में आया पानी यही है सच्ची मोहब्बत की कहानी *****✍️गीता »

“कोरोना का कहर”

कोरोना का बढ़ गया है, फ़िर से कहर हे प्रभु कर दो, अब तो महर सर्दी आ रही है, हमें डरा रही है सुना है सर्दी में बढ़ता है इसका कहर हे प्रभु कर दो अब तो महर आई है फ़िर से कोरोना की लहर परेशान हो गया है दिल्ली शहर भय सा रहता है हर पहर हे प्रभु कर दो कुछ तो महर दिल्ली शहर में तो बुरा हाल है, आपके यहां इसकी क्या चाल है? *****✍️गीता »

*सोनू की चॉकलेट*

सोनू एक प्यारा बच्चा था, मन का बिल्कुल सच्चा था चॉकलेट खाने का मन करता था सोनू का पर मम्मी से वो डरता था इसीलिए सोनू चॉकलेट की, विंडो शॉपिंग करता था । दूर-दूर से देख के चॉकलेट, मन ही मन सोचा करता था बड़ा हो कर खाऊंगा चॉकलेट सुन्दर सपने बुनता रहता था टॉफी भी भाती थी उसको, पर कैडेबरी पर वो मरता था इसीलिए सोनू चॉकलेट की विंडो शॉपिंग करता था । *****✍️गीता »

भूमिपुत्र का सम्मान करें

आज अन्नदाता किसान, राहों पर है परेशान देश को अन्न देता जो, भारत माँ की जो है शान क्यूं आना पड़ा उसे राहों पर, ये बात कर रही है हैरान अपने एक हक़ की खातिर, लड़नी पड़ी लड़ाई है आखिर ये हक़ है उसका, उसकी मेहनत की कमाई है भूमिपुत्र का सम्मान करें हम, उसकी आंखें ना होने दें नम आज आवाज़ आई है देखो, खेतों से उस हलधर की, जिसकी मेहनत की रंगत से, भूख मिटे है हर घर की *****✍️गीता »

*हम भी अपना जीवन जी लें*

अपने जब बेगानों संग मिल, महफ़िल नई सजा लें हम भी फ़िर राह वो छोड़ें, मंज़िल नई बना लें पोंछ के अपनी आंख के आंसू, हम भी नाचें-गा लें हम भी अपना जीवन जी लें, ये नई रीत अपना लें माना ये आसान नहीं है, पर वक्त का तकाज़ा यही है कम कहां हैं इस जीवन की मुश्किलें.. *****✍️गीता »

कहानी

जिसकी जैसी थी कहानी, वो वैसा किस्सा कह गया कोई चुनता रहा तिनके यहां, कोई मोती चुराकर ले गया *****✍️गीता »

तुलसी विवाह की कथा

एक श्राप के कारण, शालिग्राम बने नारायण लक्ष्मी माँ ने फ़िर, अवतार लिया तुलसी का कार्तिक की एकादशी को, विवाह-बंधन में बंधे दोबारा मेहंदी, महावर,बिंदी चूड़ी आदि सुहाग श्रृंगार होता है, तुलसी माँ का लाल चुनर ओढ़ाई जाती, दीप जलाकर करें वन्दना हलवा-पूरी का भोग लगाकर आशीष लिया जाए,तुलसी माँ का *****✍️गीता »

*देवोत्थान एकादशी*

कार्तिक मास की, शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी आई है ये प्रबोधिनी एकादशी भी कहलाई है हर्षोल्लास साथ में लाई है आषाढ़ मास की, शुक्ल पक्ष की एकादशी को चार मास के लिए देव शयन को जाएं, शुभ-कारज भी ना हो पाएं देवोत्थान एकादशी पर देवों सहित नारायण निंद्रा से जागें शुभ-कारज भी होने लागें प्रारम्भ होवे हर शुभ काम, श्री गणेश हो लेकर हरि नाम पद्मनाभ विष्णु जी का होता है आह्वान पूजा-अर्चना की जाती ... »

*दोस्ती*

निस्वार्थ प्रेम का, एहसास है दोस्ती जीवन में घोले, जो मिठास है दोस्ती कठिन समय में, दे साथ है दोस्ती बिन मांगे मुसीबत में, काम आए है दोस्ती भरोसा होता नहीं है, आजकल हर किसी पर जिस पर हो जाए भरोसा, उसका नाम है दोस्ती.. *****✍️गीता »

*कान्हा की छवि सा*

कान्हा की छवि सा, मुख पर तेज उगते रवि सा मेरी गोद में आया था, वो मेरे मन को भाया था भोली सी सूरत है उसकी, कान्हा सी मूरत है उसकी मैं उसको पाकर हुई निहाल, उसकी सूरत-सीरत बेमिसाल *****✍️गीता »

कई भरम टूटे इस साल

कई भरम टूटे इस साल, बुरा हुआ इस दिल का हाल कोई ना मुझसे पूछना, बता ना पाऊंगी फिलहाल अश्रु लुढ़क गए गालों पर, आंखो का रंग हुआ है लाल कोशिश कर-कर हार गई हूं ज़िन्दगी हुई जी का जंजाल कई भरम टूटे इस साल कोई ना मुझसे पूछना, बता ना पाऊंगी फिलहाल.. *****✍️गीता »

नील-परिधान

नील परिधान में जब, सम्मुख उनके आ गई उनको देख कर, मेरी भी नज़र शरमा गई देख कर हमें वो, कुछ गुनगुनाने लगे हम भी कुछ कहना चाहते थे, बोल ही ना निकले मुख से कह ही पाए ना कुछ भी, हया से सिमट के हम मंद-मंद मुस्काने लगे *****✍️गीता »

*प्रभु का उपहार*

प्रभु का उपहार, है ये ज़िन्दगी किसी का प्यार, है ये ज़िन्दगी कभी जीत तो कभी, हार है ये ज़िन्दगी किसी का इन्तजार, है ये ज़िन्दगी ना समझना कभी भी, इसको किसी से कम प्रिय, कम नहीं है चमत्कार से ये ज़िन्दगी *****✍️गीता »

*प्रतियोगिता*

****”लघु हास्य-रचना**** कोरोना के कारण, प्रतियोगिता की पराकाष्ठा हो गई अभी तक तो परीक्षा तक ही थी सीमित, अब तो शादी-ब्याह तक भी ही गई मेहमानों की संख्या सीमित हुई पचास तक, ऐसा कभी ना हुआ आज तक दावत खाने के लिए भी, टॉप पचास में रहना होगा *****✍️गीता »

*माँ*

“माँ”! से छोटा शब्द ना सुना कोई, माँ से बड़ा भी ना कोई हुआ माँ के दिल को खुश रखना सदा, माँ की लगती है दुआ माँ, केवल एक शब्द नहीं, एक व्यक्ति ही नहीं एक व्यक्तित्व है, हमारा संसार है माँ, शब्द में छिपा जीवन का भण्डार है माँ, शब्द में मेरा बचपन छिपा है, माँ, शब्द में मेरी छिपी जवानी बेशक शब्द छोटा है लेकिन, है एक जीवन की सम्पूर्ण कहानी ।। *****✍️गीता »

*खेतों की हरियाली*

देख के खेतों की हरियाली, नव-प्रभात ऊषा की लाली मन विभोर हो उठा है मेरा, मन मचले मत जा यहां से कितना सुन्दर गांव है मेरा पीली-पीली ओढ़ ओढ़नी, सरसों खड़ी मुस्काए मीठे गन्ने की पत्ती लहराकर, अपनी ओर बुलाए शुद्ध पवन है, ना कोई शोर कोयल कूके मेरे खेत में, नृत्य कर रहे हैं मोर तस्वीर बसा ली आंखों में, मैंने मेरे गांव की खेतों की हरियाली की और उस नीम की छांव की *****✍️गीता »

चिकित्सकों को नमन है मेरा

चिकित्सकों को नमन है मेरा, चिकित्सकों का है आभार कठिन समय में साथ है थामा, बीमारों का हाथ है थामा है संजीवनी इनके हाथों में, आधा रोग भगे,इनकी बातों से मरणासन्न में फूंक दे जान, धरती पर दूजे भगवान चिकित्सकों को मेरा प्रणाम, चिकित्सक हैं कितने महान ।। *****✍️गीता »

पराई धरा

देख-देख कर, आज के युवा-वर्ग को सोचता है मन मेरा, क्या कमी है देश में मेरे जा बैठे दूर इतनी, एक पराई धरा कभी तो याद आती होगी, स्वदेश की कभी तो मन मचलता होगा, निज देश आने को फ़िर क्या है, जो रोकता उन्हें ना समझ पाया, बावरा मन मेरा.. *****✍️गीता »

*ज़िन्दगी का काफिला*

ज़िन्दगी की राहों पर, काफिला चलता गया जो ठहर गया बिछड़ता गया सूरज उगता रहा ढलता गया, मन में कोई ख्वाब पलता गया किसी की कामयाबी देखकर, कोई खुश हुआ, कोई जलता गया बहाने बनाते रहे आप सदा, काम ज़रूरी था, टलता गया किसी का साथ दिया वक्त ने, किसी को वक्त छलता गया *****✍️गीता »

तेरी मोहब्बत में

तेरी मोहब्बत में, इस कदर मसरूफ़ रहे तेरी मोहब्बत ने, तन्हाई में भी तन्हा रहने ना दिया *****✍️गीता »

*आधा चांद*

आज चांद आधा है, पर उसकी याद पूरी आ रही सितारे हंस रहे मुझ पर, मेरा ख्वाब अधूरा रह गया *****✍️गीता »

*अपने नसीब की*..

आह ! ना लेना कभी, किसी गरीब की हर किसी को मिल जाती है, अपने नसीब की.. *****✍️गीता »

मोहब्बत की कहानी

धीरे-धीरे लौ जलती रही, धीरे-धीरे शमा पिघलती रही परवाना दूर से ही मचलता रहा, हर मोहब्बत की कहानी है यही *****✍️गीता »

*छठ पूजा की पौराणिक कथा*

नि:संतान थे राजा प्रियंवद, पुत्र-प्राप्ति हेतु किया हवन प्रशाद की खीर खाकर, रानी मालिनी ने दिया एक पुत्र को जनम किन्तु पुत्र जीवित ना था राजा ले जा रहे थे पुत्र का अंतिम संस्कार करने राजा थे शोकाकुल ज्यादा प्राण त्यागने को आमादा प्रकट हुई तब एक देव-कन्या, नाम था उनका देवसेना बोली, पूजा-व्रत करो मेरा राजन् होगा तुम्हें प्राप्त पुत्र-रत्न राजा ने उनका कहा माना, कार्तिक शुक्ल की षष्टी थी वो आई थी छठ ... »

*छठ पूजा*

आई आई छठ पूजा है आई, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को जाए ये मनाई छठ पूजा की धूम देखो, चारों ओर है छाई बच्चों और सुहाग का, मंगल करती है छठ माई निर्जला व्रत रखा जाता है, नदी किनारे होती पूजा नदी के जल में जाकर, सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, बांस टोकरी में रखते हैं, गन्ना,ठेकुआ, चावल लड्डू ,केला,नींबू और नारियल नदी घाट पर एक छोटा सा घर बनाकर दीप जलाया जाता है फ़िर जल में खड़े होकर, फल, मिष... »

रिश्वत

खाद्य-निरीक्षक की चलती थी, रिश्वत से रोजी-रोटी लाला ने इन्कार किया तो, धमकी आ गई मोटी-मोटी लाला जी के होटल में, खाना बनता था शुद्ध लेकिन बिन मोटी रिश्वत के, अफ़सर हो गया थोड़ा क्रुद्ध बोला, जांच कराऊंगा, कैसा तेरा खाना है ज़रा भी कमी मिली तो, जेल में पक्का तेरा जाना है लाला बोले, रहने दो धमकी, खाना जांच कराओ कभी भी नहीं डरें हम दादा-गिरी से, काम करें ईमान-दारी से खाना जांच हो कर आया, बिलकुल शुद्ध ... »

*तुलसी है जीवन का अमिय*

तुलसी है जीवन का अमिय, तुलसी है विष्णु को प्रिय पावन पौधा तुलसी का, प्रदूषण से बचाए पूजनीय है इतना कि, रोग कीटाणु पास ना आएं सर्दी खांसी या है बुखार, तुसली, औषधि गुण समेत है तैयार तुलसी करती कम तनाव, वृद्धि करती याददाश्त की घर-आंगन में इसे लगाओ ।। *****✍️गीता »

चाय की सुगंधि

सुबह-सुबह रसोई से, चाय की सुगंधि आ रही है सर्दी के मौसम में मुझे, अदरक इलायची और तुलसी की चाय लुभा रही है ऐसी चाय सुबह-सुबह मिल जाए, तन-मन में स्फूर्ति आ जाए *****✍️गीता »

*धूप सुनहरी*

धूप सुनहरी बिखर गई है, सूरज की झोली से लाल, गुलाबी पीले-पीले, रंग लगें मौली से रंगोली के रंग हैं सातों, धूप संग हैं आए सूरज ने देखो ना कितने, सुंदर रंग बिखराए ।। *****✍️गीता »

मुखौटे

मुखौटे लगा कर, आते हैं कुछ लोग कभी हंसाकर कभी रुलाकर, चले जाते हैं कुछ लोग कभी जोकर का मुखौटा, लगाकर हंसाया कभी भूत-प्रेत का मुखौटा, लगाकर डराया मुखौटे लगा कर, मन बहलाते हैं लोग ना जाने ऐसा कैसे, कर पाते हैं कुछ लोग *****✍️गीता »

सुन ले बिटिया रानी

प्यारी-प्यारी बिटिया रानी, कहे मां कह एक कहानी राजा हो या रानी मां तेरी कविता लिखती है, कैसे कहे कहानी फ़िर भी सुन, ओ बिटिया रानी एक थी झांसी की रानी, मनु नाम था बचपन का ब्याह के बाद,लक्ष्मीबाई हुई झांसी की रानी राजा जी नि:संतान मरे थे, करुणा भरी कहानी सुन ले बिटिया रानी तीर, तलवार सब सीखे रानी ने, निज रक्षा की ठानी साहस भरी कहानी गोरों से लड़ गई अकेली, हार ना उसने मानी हुई कुर्बान स्व-देश पर, साह... »

यही तो है ज़िन्दगी

कभी धूप है खुशियों की, कभी दर्द की छांव कभी जीत की आशा, कभी हार के थक गए पांव बस, यही तो है ज़िन्दगी.. *****✍️गीता »

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