मैं तुम्हारी भार्या हूँ…**

भार्या
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मैं तुम्हारी भार्या हूँ
संगिनी पथ की रहूंगी
कष्ट ना होगा तुम्हें
सारे दुःख
मैं खुद सहूंगी
बोलता है मन ये मेरा
तुम व्यथित हो आजकल
डूबते सपनें तुम्हारे
तैरते हैं पलकों पर
प्रिय सवेरा
लायेगा
नई उम्मीद,
नई रौशनी
तुम बनोगे राग मेरे
मैं तुम्हारी रागिनी
सुमन बिछ जायें धरा पर
यदि तुम मुस्कुरा कहीं
कुतर दो यदि नाखून तो
पिघल जायेगी ये जमीं…

Comments

2 responses to “मैं तुम्हारी भार्या हूँ…**”

  1. Geeta kumari

    जीवन साथी के साथ संबंधों की, प्रज्ञा जी की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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