Pragya Shukla's Posts

“किसान आन्दोलन”

जो बादल सदैव ही निर्मल वर्षा करते थे निज तपकर अग्नि में तुमको ठण्डक देते थे वह आज गरजकर तुम्हें जगाने आये हैं ओ राजनीति के काले चेहरों ! ध्यान धरो, हम ‘हल की ताकत’ तुम्हें दिखाने आये हैं… ——————————— धरती का सीना चीरकर जो उत्पन्न किया वह सफेदपोशों ने अपनी तिजोरियों में बंद किया हम वह ‘मेहनत का दाना’ उनस... »

प्रेम का संदेश

छोंड़ दी थी जो गलियां हमने कभी, आज सजकर फिर उन्हीं में जाना है संदेश भेजा है उन्होंने प्रेम का, जिनको हमने रब से ज्यादा माना है… »

“इश्क की चादर”

💜Valentine special💜 कुछ गुलाबों के पंख बिखरा के गये थे यहाँ, लौटकर आए तो उन्हें सिमटा हुआ पाए… दे रही हैं गवाही खामोंशियां ये रातों की, ओढ़ के वो इश्क की थी चादर यहाँ आए….!! »

लेख:- ब्राण्डेड बुखार

लेख:- ‘ब्राण्डेड बुखार’ आजकल हर व्यक्ति अपने निजी काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करने मे विश्वास रखता है। सबसे ज्यादा ध्यान तो इस बात पर रहता है कि हम अच्छा खाये,पिये और पहने। अब व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को निखारने और प्रभावशाली बनाने के लिये प्रयासरत रहता है। वह सोचता है कि वह सबसे अच्छा दिखे। इसलिये वह अनेक प्रयास और उपायों को अपनाता है। अपनी सुन्दरता,आकर्षण और व्यक्तित्व विकास हेतु वह म... »

तुम्हारा स्वागत ना कर सकी !!

हे नव वर्ष ! तुम्हारा स्वागत ना कर पाई मैं ! तुम्हारे आगमन के उपलक्ष्य में हजारों तैयारियां करना चाहती थी पर कर ना सकी ! तुम्हें समेटना चाहती थी प्रेम से, दुलार देना चाहती थी, पर अश्रु धारा प्रवाहित करने के पूर्वाभ्यास के कारण सिर्फ रोती रह गई और तू आ गया बिना किसी आदर-सत्कार के ! विगत वर्ष में सिर्फ हृदय में घाव ही मिले जिनसे मेरा चट्टान जैसा हौसला धराशाही हो गया कितना कुछ लिखना चाहती थी तुम्हारे... »

“स्वर्णिम नवल वर्ष”

कालचक्र ने लिखा था एक रोज़ रेत पर उंगलियों के पोरों से, वह हस्तलेख मिट गया सागर की लहरों के थपेड़ों से… स्वागत है कर जोड़कर २०२१, खूँटी पर अब टाँग दी वैमनस्यता भरी कमीज… सागर की जलधार ने मिटा दिया एक नाम, २०२० ऐसे ही गया आया नव स्वर्ण विहान… हे नवल वर्ष ! तुम सबके जीवन में सुख का संचार करो… दीनों दुःखियों का त्रास हरो, मानवता का कल्याण करो… तुम आओ जीवन पथ पर और प्रेरण... »

“नववर्ष हो इतना सबल”

नववर्ष हो इतना सबल ना पीर चारों ओर हो, जिधर भी उठे नजर सर्वत्र पुष्प ही पुष्प हो.. यह लेखनी अविराम हो, हर पंक्ति में ऐसे भाव हों… जाग जाए यह जमीं और आसमां झुक जाए, लेखनी हो तरुण-सी ऐसा नववर्ष आए… कोरोना की ना मार हो, फूला-फला संसार हो… दुर्गम हो, चाहे दुर्लभ हो, हर पथ मानव को सलभ हो… युवा हो कर्मठ और हाथ में उनके पतवार हो, ना डूबे कभी बहती रहे ऐसी सुंदर नाव हो… २०२० त... »

अलविदा २०२०

अलविदा २०२० तू बहुत याद आएगा… तूने गुरू बनकर बहुत कुछ सिखाया अफसोस है अब तू कभी लौटकर ना आएगा.. »

ऐसे मत नववर्ष मनाओ

ऐसे मत नववर्ष मनाओ जीवों को ना मार के खाओ, भूंख मिटाने के हैं और भी साधन शाकाहार तुम बनाकर खाओ.. »

“बेजुबानों की कुर्बानी”

बेशक मनाओ त्योहार तुम दिल खोलकर करो नववर्ष का स्वागत पर शराब, बकरी, मुर्गों आदि जीवों के जीवन का अन्त करके किस प्रकार मना सकते हो तुम आन्नद !! कल तुम तो देखोगे अपने जीवन का नवल प्रभात पर उन बेजुबान जानवरों का अन्त तो तुमने अपने भोग-विलास में कर दिया, वह नववर्ष का सूर्य कहाँ देख पाएगे ?? तुम्हारे धूमधड़ाके के और दोस्त यारों की पार्टी में जाने कितने बेजुबान शहीद हो जाएगे किसी का जीवन लेने का तुमको क... »

“अब होगा जीवन में उजास”

नववर्ष की पूर्व संध्या ******************* नववर्ष की पूर्व संध्या पर मैं अर्पण करती हूँ अश्रु के बीज बोती हूँ लम्बी मुस्कानें चुनती हूँ मैं सफल नव जीवन पर ले जाने वाली राह अब नहीं करूंगी हृदय को दुःखाने वाली क्रियाएं, अब होगा जीवन में उजास… »

एक वर्ष और बीत गया इस जीवन का !!!!!!

जाने क्यूं खुशियां मना रहे हैं लोग !!! मेरी जिंदगी का एक और साल कम पड़ गया एक और साल जुड़ गया जीवन के अध्याय में, इस खुदगर्ज दुनिया ने इस वर्ष में अपने-अपने रंग दिखाये बहुत ही दर्द दिये, आँसू दिये इस वर्ष ने पर ना जाने क्यूं नववर्ष के आने की खुशी से ज्यादा इस वर्ष के जाने का मलाल ज्यादा है कुछ अधूरा-सा लग रहा है गम बहुत जियादा है एक और दंदा टूटा गया है आज कंघी से एक वर्ष और बीत गया इस जीवन का̷... »

नया साल आ गया

नया आ गया.. पुराना साल हजारों दर्द दे गया कुछ सिखाया कुछ समझाया, और आँखों में आँसू दे गया नया साल आ गया… »

हे ऊपरवाले ! तू अब तो जाग..

कूड़ाघर: रसोईंघर ******************* मैं अक्सर सोंचा करती थी आजकल कोई गरीब नहीं… सब अपने आप में सक्षम हैं इस दुनिया में अब कोई असहाय नहीं… परंतु एक दृष्य देखकर भर आईं मेरी आँखें मुझको विश्वास ही नहीं हुआ जो देखीं मेरी आँखें एक बालक छोटे कद का था, भूंखा था और प्यासा था कूड़ेदान में बड़ी देर से जाने क्या ढूंढ रहा था मेरी उत्सुकता बढ़ी, मैं वहीं रही कुछ देर खड़ी.. उसने एक पॉलीबैग उठाया सड... »

“गरीब की पुकार”

गरीब की पुकार’ सुन लो, लाख दुआएं मिलेगी किसी मजबूर को सहारा दो तुम्हारी शक्ति और बढ़ेगी… घटेगा नहीं धन बल्कि और भी बढ़ेगा किसी गरीब की झोली में जो तुम्हारी एक चवन्नी भी गिरेगी… मान लो और कभी करके देखो बेबस मजबूर का सहारा कभी बनकर तो देखों आँखों से तुम्हारी पावस गिर पड़ेगी… »

*बेटी का विश्वास*

बेटी और पिता सैर पर जा रहे थे मधुर संगीत था कोई गीत गा रहे थे.. होंठों पर दोनों के तसल्ली भरी मुस्कान थी, बेटी अपने पापा की जान थी.. सैर करते समय एक रास्ते में पुल आया पिता ने बेटी को प्यार से समझाया मेरा हाथ पकड़ लो बेटी पुल है और नीचे गहरी नदी, बेटी ने कहा नहीं पापा मैं आपका हाथ नहीं पकड़ूंगी, आप ही मेरा हाथ पकड़ लो पिता हँस पड़े और कहने लगे उसमें क्या अन्तर है ? चाहे मैं तुम्हारा हाथ पकड़ लूं च... »

नेत्रदान:-जीवनज्योति

एक अंधी लड़की देख के मन में वेदना का ज्वालामुखी फूटा सोई थी चिर निद्रा में करुणा से अवधान टूटा… मन में आया मेर जो वह सबको आज बताती हूँ मेरे नेत्र हैं कितने सुंदर यह सोंच के मैं मुसकाती हूँ… इन नेत्रों का जीवन मेरे जीवन से लम्बा होगा मेरी सुंदर आँखों से कोई सारी दुनिया को देखेगा… मर कर भी मैं अपना नाम अमर कर जाऊंगी करना चाहती थी कुछ बड़ा, अब नेत्रदान कर जाऊंगी नेत्रदान करना, अपने ... »

“रक्तदान है महादान”

रक्तदान है महादान यह ‘प्रज्ञा शुक्ला’ कहती है, रक्ताल्पता को अक्सर जीवन में अपने सहती है… रक्तदान करने से कोई कमजोरी नहीं आती है, इतनी दुआएं मिलती हैं कि झोली भर जाती है… किसी की बुझती जीवन ज्योति को रक्त देकर दीप्तिमान करो रक्तदान कर हे मानव ! मानवता पर एहसान करो… जाने कितने हैं प्राणी जो रक्ताल्पता से मर जाते हैं, रक्त ना मिलने के कारण कितने दीपक बुझ जाते हैं.. हो य... »

तुझे याद नहीं करूंगी

सोंचती हूँ नये साल में कुछ बड़ा करूंगी ———————————————— चल ठीक है, तुझे याद नहीं करूंगी…..❤❤ »

बड़ा हसीन रहा यह साल

सच कहूं तो बड़ा ही हसीन था यह साल, हर एक ने अपना रंग दिखा दिया…🐊🐍 »

“उतरन”

“रिश्तों में वफादारी और विश्वास” ************************************ गमों की बरसात होती रही अश्क रुखसार पर लुढ़कते रहे, हमने सोंचा ये फिक्र है तुम्हारी यही सोंचकर हम हर सितम सहते रहे…. एक सिसकती हुई रात ने समझा दिया हमको जब तुम लिपटे हुए थे गैरों की बांहों में हमें वफादारी का पाठ पढ़ाने वाले खुद बैठे थे किसी महबूब की.पनाहों में, सब कुछ सह रहे थे हम, पर ये कैसे सह लेते हम ! रोटिय... »

वक्त ने समझा दिया

खामोंश रहना जज्बात बयां करने से अच्छा है दिल की बातें दिल में छुपाना अच्छा है काश ! ये पहले ही समझ जाते हम, चलो वक्त ने समझा दिया ये भी अच्छा है…. »

अच्छा नहीं लगता

तुम जब बात-बात पर झगड़ा करते हो मुझसे सच कहूं तो बुरा नहीं लगता, पर जब तुम नाराज होकर बात करना बंद कर देते हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता… »

“सुशांत सिंह राजपूत”

छ: महीने बीत गये अब तक कुछ ना पता चला सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की या उन्हें मार डाला गया.. कैसा शासन है ? और कैसे यहाँ के लोग हैं मंगल ग्रह पर तो पहुंच सकते हैं परंतु अपराधी तक नहीं पहुंच सकते….!! »

“अब और ना हों निर्भया काण्ड”

निडर होकर निकले हर लड़की काश ! ऐसा भी दिन आए, बेटों से डर ना लगे हर बेटा पूजा जाए… कर्म हों सबके अच्छे संस्कार हों भरे, शुद्ध हो आचरण बेटों का ऐसा पाठ पढ़ाया जाए.. भारत की गलियां हों सुंदर हर बेटी हो बेटों से अव्वल… कुत्सित मन को तजकर सब रहें शिक्षित और रहें सलामत एक ऐसा कानून बने बेटी पर जो कोई नजर गड़ाये, दी जाए उसको फिर फाँसी जो दामन में दाग लगाये… बेटे हों संयमी, संस्कारी, चर... »

ऐसे हैवानों को फाँसी होनी चाहिए

“बलात्कार है अक्षम्य अपराध” ++++++++++++++++++++ चीख-चीखकर पुकारा उसने, पर कोई सुनने ना आया… तोड़ती रही वह दम अपना, पर कोई लाज बचाने ना आया… वैशी-दरिंदे झपट पड़े, उनको जरा भी तरस ना आया… क्या औरत का जिस्म ही है उसका बैरी ! यह अब तक प्रज्ञा’ को समझ ना आया.. क्यों नहीं मिलता नारी को देवी का सम्मान, दम तोड़ दिया जिसके कारण वह तो हैं हैवान… ऐसे हैवानों को फाँस... »

❤माँ का निश्छल प्रेम❤

❤माँ और पत्नी❤ ******************* माँ से जब मांगी एक रोटी, माँ के चेहरे पर मुस्कान खिली… पत्नी से मांगी जब रोटी तो मन ही मन नाराज हुई…. माँ कहती ओ बेटा ! तू कितना ज्यादा सूख गया पत्नी कहती- जिम जाओ जी ! आपका पेट है बाहर झांक रहा… माँ को जब मालूम पड़े कल बेटे की छुट्टी है, बेटा मेरा आराम करेगा रोज तो दौड़-भाग ही रहती है… पत्नी पकनिक की प्लानिंग पहले से ही बना लेती है, पति क... »

कोरे कागज के पंख

जा रहा है २०२० कुछ खट्टी-मीठी यादें छोंड़कर, आ रहा है २०२१ कोरे कागज के पंख ओढ़कर…. उम्मीद है यह सवेरा सबके जीवन में आएगा, उम्मीद की रौशनी ले हर मन में उत्साह जगाएगा.. »

ये क्या है ? क्यूं है !

जाने क्यूं तुमसे प्यार-सा हुआ जाने अनजाने इकरार-सा हुआ, तुम लाख बुरे सही पर अपने से हो लाख दूरियां हैं फिर भी पास रहते हो.. ये क्या है ! क्यूं है ! नहीं जानती हूँ मैं, पर जो भी है तुम्हें अपना मानती हूँ मैं… »

२०२१ हो ऐसा, बिल्कुल रामराज्य के जैसा

यह नववर्ष इतिहास बन जाए भारत की सब गाथा गाएं बूढ़ों में फिर आए जवानी लोरी गायें दादी-नानी भाई-बहन सब खुशी मनाए हर घर में खुशहाली आए कोरोना से जो क्षति हुई उसकी अब भरपाई हो ऑनलाइन अब बहुत हो गई स्कूलों में पढ़ाई हो ऐसा दिन ही ना आए कोई नागरिक धरने पर बैठे सबको सुसंगठित सरकार मिले युवाओं को रोजगार मिले २०२१ हो ऐसा बिल्कुल रामराज्य के जैसा… »

“कलम और स्याही”

ओ विरह की वेदना ! मुझको पकड़ा दो कलम साथ में दे दो मुझे रात की तन्हाइयां और दो मुझको तुम रंग-बिरंगी स्याहियां अधखुली-सी इक कली रात यों कहने लगी “कलम और स्याही” ना हो तो दर्द कैसे लिखोगी मैं समझ ना कुछ सकी सोंच में लिपटी रही बोल फिर कुछ ना सकी फिर मौन-सी सिसकी उड़ी…. »

अल्फाज ठिठुर गये

जाने कितने अल्फाज ठिठुर गये जो लिखे थे मन के कागज पर मैंने सिकुड़ गये कुछ ठण्ड की कटीली रातों में तो कुछ जम गये बर्फ के गोलों में सुबह धूप निकलेगी तो पिघलेंगे यही सोंचती रही मैं पर ऐसा कुछ भी ना हुआ वह अल्फाज जाने किन समुंदरों में बह गये शायद घने कोहरे की धुंध में भटक गये तब से लिए ‘कलम और स्याही’ घूमती हूँ पर वह अल्फाज खो गये तो खो गये !! »

“पिता है जीवन का आधार”

पिता है जीवन का आधार पिता से है यह जीवन संसार पिता है मेरे मन का कोना पिता प्रेम ना मुझको खोना पिता मुझको खूब पढ़ाया बेटो से ज्यादा सम्मान दिलाया मेरी आँख में जब भी आँसू आते पापा धरती जोर हिलाते जो भी कहती मुझे दिलाते उंगली पकड़ संसार घुमाते पापा को करती मैं माँ से ज्यादा प्यार उन्होंने किया है मेरा हर सपना साकार »

नया साल मंगलमय हो

बीता गया २०२० आया है सजकर २०२१ मिट्टी डालो बीती बातों पर मुस्कान रखो बस अधरों पर कोशिश करो जीवन में इतनी कोई बात ना करो जो हो दिल दुःखनी दोस्तों से हँसकर गले मिलो सबको हार्दिक नववर्ष कहो… Happy New Year 2021💜💜 »

घर की लक्ष्मी बेटियां

बेटी होना एक अभिषाप ! मानता है यह आज भी समाज बेटी तो कुल की लक्ष्मी है पूजी जाती हर घर में है बेटी से घर में हो उजियारा किलकारी से खिलता आंगन सारा बेटी करती है सबका सम्मान परिवार में बसते उसके प्राण जब जाती है वह ससुराल को अपनी दुनिया बसाती वहाँ पे अपनी बेटी तो है दो कुल का सम्मान बेटी है घर, परिवार का मान… »

सोंधी-सोंधी गाँव की यादें….

सोंधी-सोंधी गाँव की यादें चौपाटी पर परधानी की बातें पके-पके से स्वर्णिम धान गाँव के बूढ़े, बाल, किसान सब आते हैं मुझको याद गोरी के गोरे-गोरे गाल जिन पर हँसकर झूले लट ना भूला मैं वह पनघट जहाँ भरा करती थी पानी जोरू, बहना और बूढ़ी नानी माँ की वह चूल्हे की रोटी सरसों का साग और गुण मीठी-मीठी माँ पोंछ के आँचल से तब देती लगी राख जो रोटी में होती घी की मोटी परत लगाती दूध में रोटी मसल खिलाती बाबा की पगडण्ड... »

“लंगड़ाया शासन”

बस जुमला है !! ++++++++++++++++ अब तो है लंगड़ाया शासन पहले होता था देशों का अब है हृदयों का विभाजन मजदूरों की रोटी रूठी खबरें चलती झूठी-मूठी हलधर बैठा धरने पर गरीब की फटती जाए लंगोटी सिलेण्डर है पर LPG नहीं है गेहूं तो है पर दाल नहीं है कालोनी हैं कागज पर पेंशन भी है कागज पर दीया’ तो है पर तेल नहीं है हमारे शासन में कोई झोल नहीं है अब सरकार है चलती मीडिया के बल पर बंदर लटक रहे केबल (TV) पर ... »

विधवा स्त्री: “रूठ गई जबसे है चूड़ी

कैसा जीवन हाय ! तुम्हारा ना चूड़ी ना गजरा डाला पैरों की पायल भी रूठी घुंघरू टूटा, चूड़ी टूटी जो देखे वो कहे अभागन जब चले गये हैं साजन ! तुझ पर कितने अत्याचार हुए कटु वचनों के बाणों के बौछार हुए जीवित ही तुझको सबने मार दिया तेरे पति के मरने पर तुझको ही दोष दिया जो स्त्रियां बैठ बतियाती थीं संग हँसती थीं, मुसकाती थीं अब माने तुझको अपशकुनी रूठ गई जबसे है चूड़ी…!! »

ठान लो तो क्या मुश्किल है

ये लम्बी दूरियों का फासला तय कर पाना मुश्किल है थोड़ा तुम चलो थोड़ा हम चलें फिर मंजिल पाना कहाँ नामुमकिन है प्यार ही तो है मंजिल हमारी तुम्हारे सजदे में ये मेरा दिल है सफर यूं तो आसान नहीं अपना पर ठान लो तो क्या मुश्किल है !! »

हे अटल! अटल रहो

अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर विशेष प्रस्तुति:- ********************************************* हे अटल ! अटल रहो यूँ ही हृदय में बसे रहो दिव्य ज्योति बनकर सदा साहित्य में जले रहो प्रकाश दो सूर्य को तुम मेरा हौसला बने रहो हे अटल ! अटल रहो यूँ ही हृदय में बसे रहो कह गये तुम सौ दफा- “हार नहीं मानूंगा रार नहीं ठानूंगा काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं” मेरी कलम की धार तुम ... »

***बौना***

बौना ****** मैं बौना हूँ सब कहते हैं जब निकलूं हँसते रहते हैं मानो मैं कोई जोकर हूँ सर्कस का कोई बन्दर हूँ हाँ, प्रकृति ने किया खिलवाड़ ना मिल पाया पोषण और प्यार तभी बना मैं कद में छोटा मेरा कोई दोष नहीं कुछ शारीरिक कमियां हैं मुझमें पर मन में कोई दोष नहीं मैं भी तुम लोगों जैसा हूँ कद में थोड़ा छोटा हूँ मानसिकता अपनी शुद्ध करो मुझसे थोड़ा प्यार करो मैं भी तो तुम जैसा हूँ बस कद में थोड़ा छोटा हूँ&#... »

“जिन्दगी का पन्ना”

किसी से कुछ कहना अच्छा नहीं लगता पर खामोश रहना भी अच्छा नहीं लगता पर्त दर पर्त खुलता जा रहा है जिन्दगी का पन्ना, पर हर पन्ना यूं बेवजह पलटना अच्छा नहीं लगता तुम्हारी आँखों में डूबे रहते थे बेसुध होकर अब तुम्हारी आँखों में नशा अच्छा नहीं लगता….!! »

मन तुम्हारा हो गया…****

मन तुम्हारा हो गया यह तन तुम्हारा हो गया मन की पर्तों में जो गहरे दर्द बोये थे कभी तेरा निश्छल प्रेम उन जख्मों का मरहम हो गया…. तुम धूप-सी लगती रही मैं नीर-सा बहता रहा टहनियों की लचक-सी कोमल तुम्हारी कमर थी स्वप्न में मैं उस कमर पर बर्फ-सा पिघलता रहा मन तुम्हारा हो गया यह तन तुम्हारा हो गया…. देह की लाली जो देखी व्याकरण गढ़ने लगा केतु की आँखों में मुझको हाय! क्या दिखने लगा ???? मधुयामि... »

हे पयस्विनी ! तृप्त कर दे…

हे पयस्विनी ! तृप्त कर दे अपने निर्मल दुग्ध से दूर कर दे पाप सारे पंचगव्य से बुद्धि के शुद्ध कर दे प्रकृति सारी अपने सुंदर चरण से तेरी पूजा से मिले वह फल जो ना मिले किसी कर्मकाण्ड से फिर क्यों अस्तित्व तेरा धुंधलाया हुआ है ????? यही पूँछे ‘प्रज्ञा’ सारे ब्रह्माण्ड से…. »

पथ में भटके राही जो हैं

हे तरंगों ! सज के निकलो भेदना तुमको हृदय है रोंकना तुमको है पथ में भटकते राही जो हैं राह दिखलानी उन्हे है जो बिछड़कर स्वयं से खो गये फिर ना मिले जोड़कर उनको स्वयं से राह दिखलानी तुम्हे है बीनकर पथ के कंकरीट पुष्प बिखराने तुम्हे हैं बहकर सरिता प्रेम की सागर में मिलना तुम्हे है हे तरंगों ! सज के निकलो भेदना तुमको हृदय है…. »

हिन्दी कविता: किसान दिवस

किसान दिवस स्पेशल:- ********************* २३ दिसम्बर को हर वर्ष किसान दिवस मनाया जाता है मीठी-मीठी बातें कर हम किसानों को फुसलाया जाता है बैठा है दिल्ली में किसान मांगे अपने हक का मान पर सरकार को दिखे नहीं रोते-बिलखते परेशान किसान हम दिखते स्मगलर उनको हम दिखते कांग्रेसी उनको हमी में दिखते पाकिस्तानी हमी में दिखते चीनी मगर नहीं दिखती मुगलेआजम को हमारी आँखें भीनी-भीनी सोंचा था ‘किसान दिवस पर ह... »

जमाना तमाशबीन..!!

लब खामोश हों फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैं आँखें नम हों फिर भी हम मुस्कुरा जाते हैं कोई नहीं समझता तन्हा दिल के गमों को चीखकर आह निकले तो जमाना तमाशबीन ही समझता है… »

“माँ का दिल”

माँ ने कहा:- सुनते हो जी आज ही के दिन हुआ था जन्म हमारे बेटे का पिता ने बोला हाँ, याद है माँ बोली अब फोन करके कर देती हूँ विश माँ ने बेटे को फोन मिलाया बेटा माँ पर चिल्लाया इतनी रात गये माँ ने तुमने मुझको क्यों फोन मिलाया ? सुबह करूंगा बात नींद तुमने कर दी है खराब फिर पिता ने बेटे को फोन मिलाया बोला यह तो पागल है तेरे जन्म से हर रात मुझे यह जगाती है इसी समय जन्मा था लल्ला मुझको रोज बताती है आज तुम... »

**महिला प्रताड़ना**

कहते हो मैं मर्द हूँ और औरत पर हाथ उठाते हो मर्जी हो या ना हो जबरन बातें मनवाते हो कभी जलाते हाथ तो कभी फेंकते एसिड हो सीना तान के फिर तुम मर्द कहाये फिरते हो… क्या गलती है मेरी जो हमको औरत का जन्म मिला ! मत भूलो तुम्हारा अस्तित्व भी औरत की कोख में पला तुमको जन्म देने वाली, तुमको साजन कहने वाली, तुमको राखी बांधकर प्यार से लड़ने वाली, सब औरत है, सब बेटी हैं तुमको पापा कहने वाली… जो लक्ष... »

हे स्वर्णरश्मि !

हे स्वर्णरश्मि ! हे दिनकर छवि ! विलम्ब न कर आजा झटपट निकला जाये मेरा दमखम प्रभु निवेदन है तुमसे विनम्र कर जोड़ खड़ा देखो मानव संकुचित है प्रकृति का हर अंग-अंग अविराम पड़े कोहरे से तन है सिकुड़ रहा मन सिहर रहा प्रकृति की कोमल साँसों से एक बर्फ का गोला पिघल रहा है दिनकर तपस अब हुआ विलम्ब कांपे धरती का अंग-अंग हे स्वर्णरश्मि ! आजा झटपट पिघला दे तू सारे हिम खण्ड !! काव्यगत सौन्दर्य:- यह कविता सूर्यातप... »

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