नींद अवसाद को… कुछ सहेजे हुए गीत गाती हूं मैं शांत कमरे में ही गुनगुनाती हूं मैं। व्यर्थ व्यापक समय नष्ट तुम पर किया नींद, अवसाद को घर बुलाती हूं मैं। साथ अंतिम समय तक […]

गर सजा दूं मौन होकर प्राण तरुवर को धरा पर गर धुला आंगन हो आँसू के बिछौने बिछ रहे हों गर तुम्हारे प्रेम को अभिव्यक्त करना आ गया हो गर हमारे बीच में उन्मुक्त हो […]

लग रही हैं अभी चंद घड़ियां हमें खा के ठोकर मगर हम संभल जायेगे। तुम हमें आज तक शूल कहते रहे, हम सुमन बन के मधुवन को महकाएंगे। मार्ग में तो कदाचित स्वत आ गए […]

इश्क से राबता भी नहीं फासला भी नहीं कर सके। कुछ संवारा भी ना जा सका, दुर्दशा भी नहीं कर सके। तुम हंसी थे बहुत इसलिए हमनें पलकें झुकाई नहीं दिल्लगी भी नहीं कर सके, […]

एक वर्ष होने को आया, फिर साजन का स्वप्न सताया बुझता जलता बुझता दीपक, फिर हमने इक बार जलाया। आज मिलन की अग्नि अलौकिक, धधक उठी एक बार। तुम हो मेरा प्यार, ओ साजन, तुम […]

इश्क का अब फसाना नहीं चाहिए तेरे दिल में ठिकाना नहीं चाहिए तुम मेरी याद में गर तड़प ना सको तुमको दिल भी लगाना नहीं चाहिए। यूं दिखावे की यारी है किस काम की हाथ […]

मेरी दुश्मन है बे- अकली हमारी दिखी औकात अब असली हमारी मेरे आँसू छुपा लेता है बिस्तर हँसी है यार अब नकली हमारी। हमें ही मान बैठे हो खुदा तुम मगर करते हो फिर चुगली […]

है आलीशान घर आँगन नहीं है दुपट्टा है मगर दामन नहीं है । पहुँचना चाहती हूं उस खुदा तक पहुँचने का कोई साधन नहीं है। हमें बाहों में लेने से क्या होगा जिसम तो है […]

द्वारिका के धीश हो तुम सब युगों के ईश हो तुम कंस का अभिशाप तुम ही देवकी आशीष हो तुम । पार्थ के प्रिय सारथी हो मीरा की तुम आरती हो गीता का संवाद हो […]

नहीं मालूम है कैसे गुजारा कर रही हूं मैं रातें जाग कर आंखें सितारा कर रही हूं। इरादा कर तो लूं एक बार फिर दिल को लगाने का मुझे मालूम है गलती दुबारा कर रही […]

जियरा हमरा जुड़ईहई हमार पिया अंखियां तोसे जो मिलिहई हमार पिया। तुम तऊ लाएउ हमरी सौतनिया दुलहा हमरऊ तऊअई हई हमार पिया। बात मा सौ की ना तुम आयेउ तुमका वा भरमई हई हमार पिया। […]

लड़की हो या बस की सीट कब्जा है तुम्हारा तुम ही हो शहजादे फकत रुतबा है तुम्हारा। लड़कियां इतनी बुरी होती हैं तो इश्क क्यों करते हो तब दिमाग काम क्यों नहीं करता है तुम्हारा। […]

ना कभी पीते हों सिगरेट न उन्हें होता हो रिगरेट ना रहे इगो में अपने ना कभी चिल्लाए मुझ पर खाना वाना वो बना लें पांव भी मेरे दबा लें मैं सोऊं टांगे पसारे बच्चा […]

कह रहा है मन हमारा क्यों दुखी संसार सारा एक निज स्थल हो ऐसा स्वर्ग से लगता हो प्यारा ना हृदय में वेदना हो ना व्यथित मन साधना हो ना हो कोई रुष्ट हर्षित ना […]

वचन सिंदूर मंगलसूत्र मंडप भी सजाया है तुम्हारे नाम का कुमकुम माथे पर लगाया है कन्यादान सातों फेरे सारे विधि विधानों से मिली थी कुंडली तब जा के तेरा साथ पाया है अधर हैं बेसुरे […]

मन हर्षित तन पुलकित रोम रोम नैनन से नीर की फुहार जैसे हो रही भोलीभाली मतवाली राधारानी गली गली मोहन के नेह में निहाल जैसे हो रही। बरसी बदरिया तो भीग गयो अंग अंग नाचे […]

लिखा था नाम जो दिल की जमीं पर पढ़ रही हूं मैं कि उनका रूप ही हर आईने में गढ़ रही हूं मैं मेरी हर शायरी में अब अलग ही मोजिजा सा है सुनाती हूं […]

तुम भला अब क्या करोगे प्रीत को लज्जित करोगे करके शुभचिंतक निमंत्रित मंडली चर्चा करोगे आचरण में खोंट कहना नियति में दोष कहना थी त्रुटि केवल हमारी बोल कर आंसू बहाना जब कभी पूंछे कोई […]

हमारे ही हो तुम हमारे रहोगे मेरी प्रीत को तुम संभाले रहोगे। तुम्हारी हथेली में अपनी लकीरें न पाकर विधाता से मैं लड़ रही हूं। मेरी मांग में सज न पाया जो कुमकुम वो सिंदूरदानी […]

हम प्रेम को तुम्हारे एक दिन भुला ही देगे आखिर सिसक सिसक कर कब तक भला जियेगे मैं प्रेम की पुजारन या फिर कोई अभागन तस्वीर तेरी छू कर बनती हूं मैं सुहागन मंदिर में […]

वो लड़का मेरा खयाल रखता है तेरे नाम वाले सिर पर बाल रखता है कभी डरता है तो कभी रोब झाड़ता है गुस्से में मुंह अपना लाल रखता है। बच्चों जैसी हरकतें और बुजुर्गों जैसी […]

ये जो रिश्तों भरा झमेला है ये खेल हमने बहुत खेला है। मेरे हिस्से में आंसू आते रहे दर्द ही दर्द हमने झेला है। सुख की चादर सदा सिकुड़ती रही चांदनी धूप में ठिठुरती रही […]

हम जमाने से हैं तंग तंग हमसे जमाना अंधेरा ओढ़ती हूं कोई चांद बुझाना। पैरों के नीचे की जमीं भी छीन ली सबने लटकी हूं फंदे से भी तो बनता है फसाना। अठखेलियां, चतुराई , […]

मेरा कमरा, तुम्हारी यादें बस ऐसे ही हुई आंखों से बरसातें बस ऐसे ही, ये कमरे में बिखरे पन्ने बस ऐसे ही अजी लिखना-विखना छोड़ो बस ऐसे ही। ये उलझी – उलझी जुल्फें बस ऐसे […]

मैं ना अब ये प्यार करूंगी ना दिल का व्यापार करूंगी वो ना गर मिलने आए तो किसकी खातिर यार जिऊंगी ना आंखों में काजल दमके ना हाथों में चूड़ी खनके ना जुल्फों को रोज […]

हृदय में प्रेम जितना था न्यौछावर कर चुकी हूं मैं या फिर स्पेस जितना था वहां तक भर चुकी हूं मैं। मेमोरी कार्ड भी मुझ में इंस्टाल हो नहीं सकता कि बस पतिदेव की खातिर […]

हमें कितना सताया जा रहा है हमारा खूं बहाया जा रहा है लिए फिरता है वो तरकश जुबां में जिसे गूंगा बताया जा रहा है मेरी खामोशियां सिसकी में बदली हमारा मुंह दबाया जा रहा […]

दिल बहलता नहीं था बहलाए रखा रात भर तेरी यादों में दीपक जलाए रखा रात भर। अंधेरा छटते ही तुझसे मुलाकात करेंगे इसी उम्मीद में दिल को लगाए रखा रात भर।

नहीं दिल से गया है यार सीतापुर का वो लड़का आज भी याद आता है सीतापुर का वो लड़का। देखता था मुझे ऐसे कोई एहसान करता हो बड़ा मासूम लगता था सीतापुर का वो लड़का […]

तुझको छोड़ा है मैने तेरी खैरियत के लिए खुद को जीने के लिए बाप की पगड़ी के लिए प्यार करता ही नहीं कोई प्यार की खातिर कोई चमड़ी के लिए तो कोई दमड़ी के लिए […]

वो शर्मिंदा नहीं है तो खफा खफा क्यों है जाना चाहता है वो मगर रुका क्यों है ? जिसके आगे पत्थर सा बना रहता जमाना है उसकी छत पे ये अंबर झुका झुका क्यों है […]

तेरे सिर पर सजके सहरा प्रश्न तुमसे जब करेगा यूँ मुझे मस्तक पर रखकर जा रहे किस ओर तुम हो तुम कहोगे जा रहा हूँ लेने अपनी संगिनी को, तो कहेगा रास्ता उधर है जा […]

माना की हम तुझसे प्यार करते हैं तुझे देखने का गुनाह रोज़ करते हैं तेरी तरफ से कुछ नहीं हम ही पीछे पड़े हैं तेरे, पर तुझे पसंद है तभी तो यार करते हैं।

यह कंगन तेरी खातिर पहने थे जब हम तुम पहली बार मिले थे,❣❤💔 तुम्हें कहां याद होगी वो पहली मुलाकात ‘और आखिरी मुलाकात में तुम अपने ही गुरुर में थे।

दिल की बातें समझ ले ऐसा हमराज चाहिए हर कदम साथ दे वो राजदार चाहिये ना मैं छोटी ना वो बड़ा खुद के बराबर ही हो ऐसा यार चाहिये ना करे प्यार मुझसे कोई बात […]

कुछ वक्त के लिए खामोश हो गया था ये दिल ! पर आप फिर से बातें करने लगा है मायूस हो चुका था दिल! पर अब फिर से मुस्कुराने लगा है अब इसे कोई नया […]

उससे रिश्ता नहीं रहा लेकिन उसका खयाल हर वक्त रहता है वो मेरे दिल उतर गया है जरूर उसका रुआब आज भी रहता है मेरी लेखनी उस बिन नहीं चलती एक कदम, अल्फ़ाज मेरे होते […]

नहीं याद करेंगे तुझे हर बार ये प्रण लेते हैं पर मन हम को छल जाता है। तेरा मासूम सा चेहरा जब भी सामने आता है मन अपने घाव भूल जाता है तू है तो […]

आज एहसास ये हुआ की मैं कितनी अकेली हूँ, सजल जल नैन भर बरसे दुख की मैं सहेली हूँ। कहाँ है प्रीत का सावन?? कहाँ है गीत मनभावन?? कहाँ है प्रेम की गगरी आज बिल्कुल […]