Pragya Shukla, Author at Saavan's Posts

शहीदों को नमन

“आजादी के मतवाले हँसकर फंदे पर झूल गये, बोलो उन वीर सपूतो को हम सब कैसे भूल गये। मंगल पांडेय ने देखो आजादी का बिगुल बजाया था, टोली संग अपनी अंग्रेजो को खूब मजा चखाया था। रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजो के छक्के छुड़ा दिये, अपनी तलवार से जाने कितने दुश्मन मिटा दिये। आजादी की परिभाषा चंद्रशेखर आजाद सिखा गये, अल्फ्रेड पार्क मे न जाने वह कितनी लाशे बिछा गये। ऊधमसिंह सबको स्वाभिमान से रहना सिखा गये, ज... »

लज्जा

“लज्जा नही आती जब देश के खिलाफ़ बोलते हो, जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो। इसी देश मे जन्मे यही पले और बड़े हुये, बोले दुश्मन के जैसे क्यों शब्द तुम्हारे तेज हुये। इसी धरा पर न जाने कितने देश भक्तों ने जन्म लिया, जन्मभूमि की खातिर अपने प्राणों का बलिदान दिया। देशद्रोहियों!रोटी खाते हो यहाँ की और गुण दुश्मन के गाते हो, आती न तुमको तनिक लाज अपने कुकर्मो पर इठलाते हो। अपनी भाषा शैली पर द... »

कवि का समर्पण

आप लिखते खूब हो पर कभी गाते नही हो, मंच पर समर्पण भाव मे नजर आते नही हो। आपकी रचनाओं मे जीवन की सारी सच्चाई दिखती है, हर पाठक को उसमे अपनी ही परछायी दिखती है। आप कभी-कभी कड़वी बात भी लिख देते हो, लोगों को दर्पण मे उनका अक्स दिखा देते हो। कुछ लोग आपसे अन्दर ही अन्दर जलते है, पीठ पीछे आपकी खूब अलोचना करते है। पाठक से इतने सवाल सुनकर मुझे अच्छा लगा, फिर हर एक बात का मै भी जवाब देने लगा। मै जीवन की कड़व... »

‘एक सवाल’

‘एक सवाल’:- अजीब विडंबना है देश की एक ही समय पर एक ही बात के लिए स्त्री पुरुष के लिए अलग-अलग नियम क्यों? यह बात मेरी समझ से परे है। और आए दिन यह सवाल मेरे मस्तक पटल पर घूमता रहता है कि आज के इस वैज्ञानिक युग में भी स्त्री और पुरुष के लिए अलग-अलग नियम क्यों? यदि कोई पुरुष विवाह के उपरांत पर स्त्री से संबंध रखता है। तो बस यही कह कर टाल दिया जाता है कि वो तो आदमी है। परंतु यदि यही कार्य स... »

हिन्दुस्तानी फौजी

बदन पर लिपट कर उस घड़ी तिरंगा भी रोया होगा जब उसने अपने हिन्दुस्तानी फौजी को खोया होगा। माँ की छाती में भी दूध उतर आया होगा जब उसने अपने शहीद बेटे को गोद में उठाया होगा। »

दोहा

सुनि हनुमत के बचन सिय देखहिं चारिउ ओर। अति लघु रूप धरि प्रगटे हनुमत सिय के कर जोर।। »

सुनहु जानकी मातु मैं

सुनहु जानकी मातु मैं हूँ रघुवर का दास। करता हूँ सेवा सदा रहता चरनन के पास।। »

इनके तीर(पास)

चीन होइ या पाकिस्तान होइ इनके तीर(पास) खाली दहशतगर्दइ हँइ कोई अउर कामु तऊ आवति नाइ खाली दिमाग शैतान केर घर होति हई। तबहें तऊ चारिउ ओर खाली आतंकवाद फैलावति हँइ »

‘जंग का ऐलान’

जंग का ऐलान हम नहीं करते, पर जंग छिड़ जाने पर पीछे नहीं हटते। यही तो है हम हिन्दुस्तानियों का हुनर, सिर कटा सकते हैं पर झुका नहीं सकते। आखरी साँस तक लड़ते हैं हम फौजी देश के लिए, शहीद हो जाते हैं पर हिम्मत हार नहीं सकते। हारना तो हमको आता ही नहीं है और, कभी दहशतगर्द हम पर विजय पा नहीं सकते। मिट जाते हैं हँसते हुए हम अपने देश के लिए, पर कभी दुश्मन को पीठ दिखा नहीं सकते। हम दुश्मन को खदेड़ आते हैं उसकी... »

आँखों से दरिया

प्रेम से सराबोर होने दो हमको, आँखों से दरिया छलक जाने दो ना। »

हम परिंदे हैं…

हम बसाएंगे अपना घरौंदा कहीं… हम परिंदे हैं एक जगह रुकते नहीं… जहाँ मिलती हैं खुशियाँ जाते हैं वहाँ हम गमों में घरौंदा बनाते नहीं… चुनते हैं तिनके घोसले के लिए.. जिंदगी भर कहीं हम बसते नहीं… पंख हैं, हौसला है रुकेंगे नहीं.. भरेंगे जाकर उड़ानें कहीं… हम परिंदे हैं एक जगह रुकते नहीं… »

कहां रह गए वो??

इंतजार किया जी भर कर उनसे मिलने की कोशिश भी की, कहाँ रह गये वो जिन्होने हर वादा निभाने की कसम भी ली। आसान भी तो नही है सूर्य की किरणों की तरह बिखर जाना, खुद की खुशियों को न्यौछावर कर दूसरो को खुशी दे जाना। माना बहुत व्यस्त है जिन्दगी की उलझनों मे वह आजकल, पर कहाँ रह गये जो मुझे याद करते थे हर दिन हर पल। शायद खुशी मिलती होगी तुम्हे मुझे यूं तड़पता हुआ देखकर, मेरा क्या?तुम खुश रह लो मुझे दुनिया मे तन... »

रोटी के तमाशे

ये उम्र, ये मजबूरियाँ और रोटी के तमाशे, फिर लेकर निकला हूँ पानी के बताशे। बाज़ार के एक कोने मे दुकान सजा ली, बिकेंगे खूब बताशे ये मैने आस लगा ली। सबको अच्छे लगते है ये खट्टे और चटपटे बताशे, इन्ही पर टिका है मेरा जीवन और उसकी आशायें। बेचकर इन्हे दो जून की रोटी का जुगाड हो जाता है, इसी कदर जिन्दगी का एक-एक दिन पार हो जाता है। अपने लड़खड़ाते कदमों पर चलकर स्वाद बेचता हूँ, इस तरह भूख और जिन्दगी का रोज खे... »

हमसे दीवाने कहाँ..

अब कहां हमसे दीवाने रह गये प्रेम की परिभाषा और मायने बदल गये,  तब न होती थी एक- दूजे से मुलाकाते,  सिर्फ इशारों मे होती थी दिल की बातें,  बड़े सलीके से भेजते थे संदेश अपने प्यार का।  पर अब कहाँ वो ड़ाकिये कबूतर रह गये,  पर अब कहाँ हमसे दीवाने रह गये।   जब वो सज- धजकर आती थी मुड़ेर पर,  हम भी पहुँचते थे सामने की रोड़ पर,  देखकर मुझे उनका हल्का- सा शर्माना,  बना देता था हमे और भी उनका दीवाना।  पर अब कह... »

मुठ्ठी भर यादें…

आज कुछ पुरानी सौगात मिली मैंने अपने कमरे की तलाशी ली। तो कुछ किताबें धूल में लिपटी हुई, कुछ खत, कुछ गुलाब के फूल सूखे हुए कुछ तस्वीरें, कुछ तोहफे और कुछ बन्द लिफाफे मिले। जिन्हें छुपाकर रखा था मैंने भूल गई थी दुनियादारी में पड़कर आज वो मुठ्ठी भर यादें मुझे मिल गई। जिन्हें मैने सबसे छुपाकर अपनी अलमारी में रख दिया था। आज वो यादें धूल में लिपटी हुई मुझे आ मिलीं। और उनकी स्मृतियों ने मुझे फिर विचलित कर... »

“माँ मुझे विवाह नहीं करना”

समाज में स्त्रियों की दशा देखकर मेरे मन में उठे विचार:- माँ मुझे विवाह नहीं करना। पति की परछाई बनकर, पति के पीछे-पीछे नहीं चलना। माँ मुझे विवाह नहीं करना। अपने कलेजे के टुकड़े(संतान) पर, पति का आधिपत्य स्थापित नहीं करना। माँ मुझे विवाह नहीं करना। परिजनों की दी पहचान मिटा, ससुराल की प्रथा नहीं बनना। माँ मुझे विवाह नहीं करना। अपनी लीक से हटकर, पति की डगर नहीं चुनना। माँ मुझे विवाह नहीं करना। अपने सपन... »

ख्वाहिशों के समंदर…

तेरे-मेरे बीच में वो पहले जैसी बात नहीं रही। ना रही वो बातें, वो मुलाकात नहीं रही। ख्वाहिशों के समंदर पड़ गए सूखे-सूखे रीत में प्रीत में वो पहले जैसी बात नहीं रही। मुश्किलें अब सजा नहीं लगतीं ख्वाहिशों में भी वो पहले जैसी बात नहीं रही। गजब का फ़ितूर था हम दोनों के दर्मियां आफतों में अब पहले जैसी बात नहीं रही। आशियाना भी रास नहीं आता लोगों में वो पहले जैसी बात नहीं रही। »

पिता वो दरख्ता है…

आज योग दिवस ही नहीं पिता दिवस भी है तथा संगीत दिवस भी है। पिता के लिये कुछ शब्द:- 🌷🌷🌷🌷🌷 पिता वो दरख्ता है जो बचपन को छांव देता है। आये कोई भी मुश्किल हाँथ थाम लेता है। उसका साया उठना किसी हश्र से कम नहीं। बाप का स्नेह ममता से कम नहीं। »

नाकामयाब

कोशिशें बहुत की उसने मुझे बदल डालने की, मगर नाकामयाब ही रहा वो मेरे हौसले के आगे। »

“गुलाम हूँ अपने संस्कारों की”….

🌹🌹🌹🌹 गूँगी नहीं हूँ मैं मुझे भी बोलना आता है। ——————————– गुलाम हूँ अपने संस्कारों की वर्ना मुझे भी सबक सिखाना आता है। »

“योग दिवस”:- 21जून

योग दिवस:- योग करके अपने मानसिक, शारीरिक और संवेगात्मक तीनों अवस्थाओं का विकास कीजिए। योग से अन्तर्मन को निर्मल कीजिए। योग जीवन का वह अलौकिक दर्शन है जो हमें मोक्ष की ओर ले जाता है। मनुष्य को उसकी आत्मा से जोड़ता हुआ प्रकाशित करता है। मनुष्य के कल्याण का यह सर्वथा उत्तम मार्ग है। योग दर्शन है, विज्ञान है। योग में ही कल्याण है। योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सर्वोत्तम मार्ग है। यह यौवन को चिरस्था... »

नीरोग हूँ मैं

नीरोग हूँ मैं क्योंकि मैंने बहुत जतन से प्रेम योग किया है। नैनासन का अभ्यास करके खुद को स्वस्थ्य किया है। »

“मेरी कलम की धार”✍

उठाई थी कलम कुछ अनसुलझे सवाल लिखने के लिए। अपने दिल के ज़ज्बात ना जाने कब लिखने लगी। लोग कहते हैं कि मैं बहुत अच्छा लिखने लगी। बस जितनी तकलीफें मिलती रहीं तुझसे, “मेरी कलम की धार” उतनी तेज चलने लगी। रूबरू होते गए हम तेरे दर्द से जितना मेरी आँखों से मोतियों की लड़ी झड़ने लगी। किस्से तो रोज सुनती थी इश्क, मोहब्बत के। पर ना जाने कब! मैं भी तुझसे प्यार करने लगी। रोका बहुत था मैंने अपने दिल को... »

हिंदुस्तान के हाथों मारा जाएगा

ताश के पत्तों-सा ढह जाएगा तू एक दिन विलुप्त ही हो जाएगा। यही हरकतें रही ना तेरी चीन तो तू बिन मौत ही हिंदुस्तान के हाथों मारा जाएगा। »

पाकिस्तान के दो टुकड़े

1971 में जब इन्दिरा गाँधी जी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किये थे। तब चीन मुँह ताकता रह गया था। उफ़ तक ना निकली थी मुँह से और अमेरिका, रूस जैसे देश चूँ तक ना बोले बस दाँतों तले उंगली दबा कर रह गए। ऐसा था आयरन लेडी का फैसला और भारत का औधा। जिसे मोदी जी ने भी बरकरार रखा है। आज भी हर देश भारत की सराहना करता है। और सम्मान से देखता है। मैं इन्दिरा गाँधी जी के इस फैसले की सराहना करते हुए उन्हें नमन करती हूँ।... »

वह पहले जैसी बात नहीं

क्यूँ आज सूरज हो गया निस्तेज वह पहले जैसी बात नहीं। हवा भी चल रही है मद्धम-मद्धम उसमें भी पहले जैसी बात नहीं। न जाने क्यों बेरुखी कर रहे हैं सब मौसम के साथ कोई भी तो नहीं दिखाई देता। हर गली कह रही है वह पहले जैसी बात नहीं। पहले तो यूं भीड़ उमड़ी रहती थी। हर गली नुक्कड़ पर लोगों की जमात लगी रहती थी। ऊपर वाले के एक फैसला से इतना आ गया फासला! रिश्तों में भी अब पहले जैसी बात नहीं। कितनी मायूसी छाई है च... »

लिख लूँ

गिले आज भी बहुत हैं तुमसे बस कुछ इम्तिहानों से निपट लूँ । तब तक तुम ढूंढ लो बहाने और मैं शिकायतें लिख लूँ । »

तेरी आँखों ने….

इक शराब ने ही तो सम्भाल रखा है मुझे…. वर्ना तेरी आँखों ने तो कब का मार डाला था…. »

बेटियाँ ही नहीं, बेटे भी घर छोड़ते हैं।

ये भाग- दौड़ के किस्से अजीब होते हैं, सबके अपने उद्देश्य और औचित्य होते हैं। कभी शिक्षा कभी जीवन की नव आशा में, सिर्फ बेटियाँ ही नहीं, बेटे भी घर छोड़ते हैं। जीवन में सबके अजीब उधड़बुन होती है, समस्याओं की फ़ौज सामने खड़ी होती है। गुजरना पड़ता है जब विपरीत परिस्थितियों से, सिर्फ बेटियाँ ही नहीं, बेटे भी प्रताड़ित होते हैं। जब सफलता और रोजगार की बात होती है, असफलता पर जब कुण्ठा व्याप्त होती है। सारे प्रया... »

नींद से जागी आँखें

ना जाने कब नींद से जागी आँखें? रात भर रोकर सूजी हैं कितनी आँखें। बिता तो लेंगे हम ज़िन्दगी तेरे बगैर भी पर तुझे देखकर ज़िंदा हैं ये मेरी आँखें। »

सीमा पर कितने धूर्त?

सीमा पर कितने धूर्त और मक्कार हैं अपनी सेना का मनोबल ना गिरने पाए इस बात का भारतीय रखते खूब ख्याल हैं। »

सितारा

ढूंढती रह गई बस तुझे हर दर पर तू मिला नहीं तो देख मैं चांद में खो गई तुझे ढूंढने की चाहत में मैं खुद सितारा हो गई। »

तेरे बिन

तेरे बिन जिंदगी कैसे बताऊंगी तू तो दूर चला गया पर मैं दूर कैसे जाऊंगी। मेरी हर सांस की अमानत हो तुम समझ नहीं आता तुझ बिन कैसे जी पाऊंगी। »

ये दुनिया

किसी की कद्र करनी है तो जीते जी कीजिए जाने के बाद तो हर कोई दुःख जता देता है. जब इंसान जीवित रहता है और किसी दूसरे से कोई उम्मीद करता है तो उसे कोई नहीं समझता. और जैसे ही व्यक्ति दुनिया से चला जाता है लोग कहना शुरू कर देते है कि कोई तकलीफ थी तो मुझे बता देता मैं तेरी मदद कर देता. लेकिन कड़वा सच यही है जीते जी ये दुनिया कद्र नहीं करती। »

चीन को

जीत जायेंगे हम क्योंकि हमारे बाजुओं में है दम चीन को उसके घर तक खदेड़ आएगें हम »

मेरा लाल

रो-रोकर परिजन का हो गया बुरा हाल मां पूछती है सबसे कहां गया मेरा लाल »

चीनी सामान

जिस तरह अंग्रजों के सामान को और उन्हें बहिष्कृत किया था। उसी प्रकार चीनी सामान को अपने जीवन से दूर करो। और आत्मनिर्भर बनो। अपनी दैनिक आवश्यकताओं का सामान खुद ही देश में बनाओ। »

चीनी सामान का बहिष्कार करो

चीनी सामान का बहिष्कार करो इसे अपने जीवन से दूर करो सरकार ने यह निर्णय लिया है आप भी यह निर्णय लेकर देश भक्ति की भावना दिखाओ। »

क्यूँ तूने छुड़ा लिया दामन??

सैनिक के शव से बोली उसकी पत्नी:- माँग सूनी रह गई क्यूँ तूने छुड़ा लिया दामन? अभी-अभी तो रूह जुड़ी थी। क्यूँ तूने छुड़ा लिया दामन? अभी-अभी तो साथ चले थे। क्यूँ तूने छुड़ा लिया दामन? »

भारत माँ विपदा में पड़ी

भारत माँ की खातिर कितनी माताओं की कोख उजड़ी। भारत माँ विपदा में पड़ी। हर गली में पसरा सन्नाटा हर चौखट सूनी पड़ी। भारत माँ विपदा में पड़ी। किस किस को खोकर रोये धरती यही सोंचे घड़ी-घड़ी भारत माँ विपदा में पड़ी। »

एक सैनिक ऐसा भी होगा!

एक सैनिक ऐसा भी होगा! जिसनें प्रेम किया होगा अपने प्रेम का इजहार किया होगा! जब आया होगा छुट्टी पर तो यह वादा किया होगा। अगली बार जब आऊँगा तुझको ही प्रिया बनाऊँगा । इस बार मिली है कम छुट्टी अगली बार लम्बी लेकर आऊँगा । तेरे घरवालों से तेरी खातिर लड़ जाऊँगा । वादा करता हूँ तुझसे मैं जल्दी घर आऊँगा। तुझको ही प्रिया बनाऊँगा। तेरे हाथों में मेहंदी होगी सिर पर चूनर ओढे होगी मैं तेरी सिन्दूर से माँग सजाऊँग... »

हर गली रुदन करती है

कितना कष्ट होता है जब एक सैनिक शहीद होता है । पूरा देश रोता है । हर गली रुदन करती है । एक अशांत-सी पीड़ा मन में घर करती है । रोती है धरती जब मृत सैनिक को गोद में लेती है । अग्नि भी गर्मी कम करके शोक प्रकट करती है । जिस जगह से गुजरता है जनाजा वह गली रुदन करती है। माँ की छाती में दूध उतरता है जब बेटे की अर्थी आती है। पत्नी छाती पीट पीटकर बेसुध होती जाती है । मेरी कलम रोती है जब किसी सैनिक के शहीद होन... »

कितनों ने जान गँवाई

हाय कितनों ने जान गँवाई! उस चीन ने जमीन के टुकड़े की खातिर कर दी नीच-सी हरकत । खुद मरा और मेरे प्यारे देशभक्त सैनिकों ने भी वीरगति पाई । हाय कितनों ने जान गँवाई! »

आपसे अनुरोध है🙏🙏

आप एक बार अपने नियमों में बदलाव कीजिये । दुश्मन पर वार करने का फैसला, सेना के विवेक पर छोड़िए। उसे पाकिस्तान की तरह आजाद कर दीजिये। 🙏🙏🙏आपसे अनुरोध है इसमें राजनीति मत कीजिये। »

दूर रखो

अपनी राजनीति को सुरक्षाबल से दूर रखो राजनीति हर जगह करो पर सैनिकों को इससे दूर रखो। जब हमारी सेना राजनीति से दूरियाँ बनाये तो भारत सरकार तुम भी अपने कदमों को सेना से दूर रखो। »

मत गंवाओ

मत गंवाओ अब और सैनिकों को तुम एक बार सीधे गोली मारने का आदेश देकर देखो। »

शहादत पर आँसू

क्यूँ नहीं देती है सरकार सैनिकों को दुश्मन को सीधे गोली मारने की आजादी? वो बस राह देखते हैं आदेश की और खाते रहते हैं सीने पर गोली। उनकी शहादत पर हम कब तक बहायें आँसू? सुहागिने कब तक अपना सन्दूर खोएं? उन्हें एक बार अपनी राजनीति से मुक्त करो फिर देखो कैसे चीन की गर्मी निकलती है और हिन्दुस्तान से सबकी नज़र हटती है । »

यह कैसे अच्छे दिन??

यह कैसे अच्छे दिन आए हैं? एक तरफ कोरोना मानव को निगलने पर तैयार खड़ा है। दूसरी ओर सीमा पार दुश्मन खड़ा है। इस महामारी को देखकर भी, चीन का पेट नहीं भरा है। इसीलिए तो वह सीमा पर बंदूक लिए खड़ा है। »

नादान बचपन:-कहाँ गई वो गुड़िया

याद आती हैं वो बचपन की बातें जब पापा के हाथों से चोटी करवाती थी। माँ लोरी गाकर सुलाती थी। कहाँ गई वो बचपन गुड़िया ? जिसकी शादी मैं रोज़ कराती थी। बाबा की भजन संध्या में मैं ही आरती सुनाती थी । भाईयों से रोज़ का झगड़ा और माँ से खफ़ा हो जाती थी। तुम बेटों को ही प्रेम करती हो पापा की दुलारी बन जाती थी। कहाँ गई वो बचपन की गुड़िया? जिसकी शादी मैं रोज कराती थी। कागज़ की नाव पर बैठकर दुनिया की सैर हो जाती थी। क... »

‘नजरों को बस’….

नजरों को बस तेरी ही तलाश रहती है सुकून भी बस तेरे ही साथ आता है, मुलाकात भले ही ना होती हो हमारी पर सारा वक्त तेरी याद में गुजरता है। »

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