Pragya Shukla's Posts

‘तलाशती हूँ मैं जमीं अपनी’

जिम्मेदारी के बोझ तले दबा रहता है जीवन जाने किन खयालों में खोया रहता है जीवन उठकर तलाशती हूँ मैं जमीं अपनी आसमां जाने क्या ढूंढा करता है जीवन… »

‘विश्व एड्स दिवस’

आज विश्व एड्स दिवस है जो HIV के संक्रमण से जागरुकता हेतु मनाया जाता है… यह आठ सरकारी स्वास्थ्य दिवसों में से एक कहलाया जाता है…. सबसे पहले १९८७ में जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर नामक व्यक्तियों यह दिवस मनाया था… फिर (WHO) के सामने ‘विश्व एड्स दिवस’ मनाने का विचार रखा था… १ दिसंबर १९८८ के बाद से यह दिवस हर वर्ष मनाया जाता है.. सरकारी एवं गैरसरकारी संगठनों द्वारा... »

कफन भी बाँध लेंगे…

ऐ वतन ! तुझ पर हम अपनी जान लुटा देंगे तेरे कदमों में आसमां भी झुका देंगे गर आबरू पर तेरी आँच आई कभी दुश्मन को हम चीर-फाड़ देंगे है जुनून हमको तेरी मोहब्बत का तेरा तिरंगा ओढ़कर जय हिंद बोलेंगे गर दुश्मन हमारी सरहद पर आया कभी लड़ने ! तिरंगा क्या हम कफन भी बाँध लेंगे.. »

तुम्हारा वो सॉरी वाली मैसेज

तुम्हारा वो sorry वाला मैसेज पढ़कर जाने क्यूं आँख में आँसू आ गये ! सुनने में तो बहुत अच्छा लगा कि तुम्हें अपनी गलती का एहसास तो हुआ ! पर जाने क्यूं एक टीस-सी उठी दिल में… शायद तुम्हारा स्वाभिमान से उठा सिर ही मुझे पसंद है तुम्हारा झुका हुआ सिर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता अब कभी मुझे sorry’ मत बोलना वरना मुझे रोता हुआ पाओगे… »

घायल परिंदा

क्या करना है मुझे यहां ठिकाना बनाकर मन चंचल है लगता है कहाँ एक ही जगह पर बदलकर फिर आऊंगा वेश मैं अपना घायल परिंदा हूँ गिरा हूँ धरा पर फिर उठूंगा, चलूंगा बनाऊंगा आसमां में रास्ता अपना गिरूंगा तो जरूर पर फिर से उड़ूंगा…!! »

चमकती किरणों ने मुझे सहलाया

नई सुबह की पहली किरण ने मुझे जगाया हिलोरे देकर चांदनी रात ने था सुलाया हटाये पर्दे जब माँ ने खिड़कियों से धूप की चमकती किरणों ने मुझे सहलाया… »

मन के घाव

मन के घाव भी भरने जरूरी हैं तेरे-मेरे नैन भी मिलने जरूरी हैं आकाश से धरती के जो हैं फासले तय हैं बरस कर बूंद तुझमें ऐ जमीं ! मिलना जरूरी है… »

समवेत स्वर में जय हिंद

समवेत स्वर में जय हिंद बोल दो कभी प्यार के पट खोल दो कभी ये मुल्क तुम्हारा ही है दोस्त! इसे प्यार और सम्मान से देख तो कभी… ***************************** »

“थपकी प्यार की”

मेरा गम तेरे दर्द से ज्यादा है मेरी आँख में आँसू तुझसे ज्यादा है एक बार देकर प्यार की थपकी सुला दे साथी ! मेरे दिल में जख्म़ तुझसे ज्यादा है… »

वह दहशत गर्दों के सम्पर्क में

वो ऐसा सोंच भी कैसे सकते हैं मेरे देश के ही दुधमुहे बच्चे हैं पर करें भी तो हम क्या करें वह दहशत गर्दों के सम्पर्क में रहते हैं पथ्थर फेंकते हैं सेना के ऊपर और जेहाद कहते हैं करें भी तो क्या करें वह तो जेब के साथ दिल में भी बम रखते हैं जो सस्ते हैं उनके जीवन से जाने किस पाठशाला में पढ़ते हैं हमारे कश्मीर के नागरिक तो पाकिस्तान के इशारों पर चलते हैं »

ताश के पत्तों की तरह

ताश के पत्तों की तरह बिखर गई मैं जब तूने कहा मैं तेरा नहीं किसी और का हूँ…!! »

मंगलसूत्र; सुहाग का प्रतीक

मंगलसूत्र को सुहाग का प्रतीक माना जाता है जाने क्यों ऐसा कहा जाता है?? बचपन से यही सोंचती थी मैं पर आज देख भी लिया अपनी आँखों से; एक विधवा स्त्री के सामने आने पर लोगों ने उसे अशुभ ठहराया ताने उसको मार-मार कर फौरन वहां से उसे भगाया तभी सामने से कुछ सुहागन पूजा को सज-धज निकलीं लोग उन्हें देखकर सुखी थे मन ही मन निश्चिंत हुए थे कि विधवा स्त्री को देखने के बाद कुछ तो अच्छा शगुन हुआ मंगलसूत्र और सुहाग क... »

दहेज प्रथा एक अभिशाप

दहेज प्रथा एक अभिशाप ********************** बूढ़ा बाप अपनी पगड़ी तक निकालकर दे देता है और माँ अपने कलेजे का टुकड़ा पर फिर भी नहीं भरता लोभियों का मन जाने क्या लेना चाहे वो ? समझते क्यों नहीं इस बात को वह दुल्हन ही दहेज है कब समझेंगे जो तड़पाते हैं गैरों की लड़की को वह एक दिन अपनी लड़की भी दूजे घर भेजेगें दहेद प्रथा है समाज का अभिशाप यह लोभी लोग कब समझ पाएगे हिसाब होगा अच्छे-बुरे कर्मों का वहां जब ... »

**आज उसी वृद्धाश्रम में***

छोंड़ दो इस बुढ़िया को किसी वृद्धाश्रम में यह सुनकर मुझको थोड़ा गुस्सा आया एक दिन फिर तंग आकर पत्नी से वृद्ध माँ को आश्रम मैं छोंड़ आया रोया बहुत माँ से लिपटकर माँ का दिल भी भर आया माँ ने आँसू पोंछे अपने आंचल से और उनको मुझ पर प्यार आया बोली बेटा आते रहना अपने घर का भी खयाल रखना मत रोना मुझको याद करके मेरे लिए बहू से मत लड़ना मेरा क्या है मैं कब मर जाऊं तू रहना खुश और आते रहना यह कहकर माँ ने कर दि... »

जला दिया क्यों मुझको साजन ???

जला दिया क्यों मुझको ओ साजन! ऐसी क्या गलती कर बैठी थी मैं तो अपने सास-ससुर की पूजा देवों सम करती थी ननद को अपनी बहन की तरह मानती थी देवर को भैया कहती थी जला दिया क्यों मुझको साजन मैं तो तेरी धर्मपत्नी थी तुम जो कहते थे वो करती थी तुम्हारी ज्याती भी सहती थी देखा करती थी पराई स्त्रियों के संग में पर फिर भी मैं चुप रहती थी तेरी छाया देख के मैं घूंघट करके पीछे चलती थी जला दिया क्यों मुझको साजन ! मैं भ... »

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों…

जख्म अपनों ने दिल पे हर बार कर दिये अपने ही शहर के बच्चों ने हम पर पथराव कर दिये दर्द उस दम बढ़ा मेरा ऐ हिन्दुस्तानियों ! जब हमारी कुर्बानी पर भी सियासत के शकुनि राजनीति के दांव चल दिये हम हिन्द के रक्षक हैं किसी पार्टी के भाड़े के टट्टू नहीं हम तो तिरंगे में लिपटकर उस पार चल दिये ये देश हमारा है और हम इसके सपूत हे युवाओं ! हम देश की बागडोर तुम्हारे हाथ में सौंपकर अब यार चल दिये…. »

तुम्हारे नाम की मेंहदी…

तुम कहते रहे और हम सुनते रहे आख़री वक्त तक सपने बुनते रहे, उठ गई डोली मेरे अरमानों की फिर भी हम तुम्हारे नाम की मेंहदी रचते रहे… »

‘आज तुमने मुस्कुराकर बात की’

आज तुमने मुस्कुराकर बात की कुछ रोने वाली और कुछ हँसने वाली बात की, अच्छा लगा मुझको तुम्हारा झगड़ा करना भी खुशी इस बात की है कि तुमने हमसे बात की… »

दामन छोंड़कर चल दिये

इल्जाम पर इल्जाम लगाता ही रहा वो हम चुपचाप सहते रहे, जब हद हो गई सहने की तो हमने कुछ ना कहा बस दामन छोंड़कर चल दिये…. »

प्रकाश पर्व; गुरु पूर्णिमा

प्रकाश पर्व; गुरु पूर्णिमा ********************** आज है नानक जी का जन्मदिवस पावन बेला आई है प्रकाशपर्व है आज गुरु पूर्णिमा की सबको बधाई है जीवन में सबके आए खुशहाली नानक का सिर पर हाथ हो लंगर बँटें आज गुरुद्वारे भजन-कीर्तन का साथ हो प्रकाश पर्व के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है नानक थे सिक्खों के प्रथम गुरू इसीलिए यह गुरू पर्व मनाया जाता है… »

कार्तिक पूर्णिमा और देव-दीपावली

कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव-दीपावली मनाते हैं सारी अप्सराएं नृत्य करती हैं इन्द्रदेव झूमते जाते हैं पूंछा मैंने माँ से एक दिन; क्यों देव दीपावला मनाई जाती है स्वर्ग सजाते हैं देवता धरती भी दीपों से सजाई जाती है माँ ने कहा; यह देव दीपावली की कथा बहुत ही निराली है एक त्रिपुरासुर नामक राक्षस था, वह मायावी था, बलशाली था महादेव ने उसका वध करते देवताओं को किया सुरक्षित था, यही नहीं इसी दिन विष्णु जी ने ... »

“अब दिल्ली दूर नहीं”

किसानों ने ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ यह नारा सत्य कर दिखाया है पूरे देश को अपनी व्यथा से रूबरू करवाया है पर कुछ सियासत के घोंड़ो के कान पर जूं नहीं रेंगता है सारा देश देख रहा पीड़ित किसान पर सरकार को दिखाई नहीं पड़ता है पानी की बौछार करें कभी आँसू गैस का छिड़काव करें पर किसान के हौसले को कोई हथियार ना छलनी कर सके तुम डटे रहो बस अड़े रहो देखो अब दिल्ली दूर नहीं तुम्हारे साथ है देश की शक्ति त... »

ये कैसा कलयुग आया है ???

हे राम तुम्हारी दुनिया में ये कैसा कलयुग आया है…!! ************************* कहीं जल रहे दीप तो देखो कहीं अंधेरा छाया है हे राम ! तुम्हारी दुनिया में ये कैसा कलयुग आया है…!! तज रहे प्राण मानव देखो कटते जाते जंगल देखो बेघर होते पक्षी देखो सड़कों पर रोते बच्चे देखो देखो तुम मरते किसान को जीवित तुम रावण देखो बोया था तुमने जो बीज कभी उसमें फल देखो कैसा आया है ? हे राम ! तुम्हारी दुनिया में... »

हे क्षेत्रपाल..!!

मेरे देश के किसान ! मत हो परेशान यह बुरा वक्त भी टल जाएगा… जिसने जो बोया है वो वैसा ही फल पायेगा सुना तो होगा तुमने भी; बुरा वक्त सिर्फ हमारे सब्र का इंतेहान लेने आता है कुछ हानि कराता है तो कुछ सिखलाकर भी जाता है मत रो तुम, मत हो उदास तुम्हारे अश्कों से ना पिघलेगा पथ्थर दिल हे क्षेत्रपाल ! तुम लगे रहो बस डटे रहो मत रखना कदम अब पीछे तुम तेरे स्वेद और हिम्मत से तो यह अम्बर भी झुक जाएगा… »

ऐ जाते हुए लम्हों…!!

ऐ जाते हुए लम्हों ! मुझको भी साथ में ले लो तुम संग मैं भी मिल लूंगा अतीत के मीठे सपनों से खो जाऊंगा मैं फिर से बिखरी-बिखरी जुल्फों में उन खुशबू वाली सांसों में एहसास अलग होता था मैं भूल जाता था सबकुछ जब पास में वह होता था ऐ लम्हों जरा ठहरो ! चलने दो संग में अपने जो अधूरे रह गये सपने पूरे करने दो, संग चलने दो… »

“ममता की मूरत हो तुम”

देखी दुनिया की खूबसूरती पर माँ सबसे खूबसूरत हो तुम मेरी सबसे अच्छी सखी और ममता की मूरत हो तुम जो मुख से निकले मेरे फौरन हाजिर कर देती हो मेरे चेहरे से ही तुम दुःख तकलीफ भांप लेती हो पूरा दिन तुम काम करो सबकी फिक्र तुम करती हो सोती सबसे बाद में तुम पर सबसे पहले उठती हो माँ तुम कितनी अच्छी हो दिल की कितनी सच्ची हो… »

वृक्ष कहे रोकर पृथ्वी से….!

वृक्ष कहे रोकर पृथ्वी से हे वसुधा ! मैं हूँ भयभीत बोया मुझको प्रेम से किसी ने रोपा और दिया आशीष पर जाने कब चले कटारी मेरे चौंड़े वक्षस्थल पर आज मैं देता हूँ छाया सबको और देता हूँ मीठे फल जाने कब कट जाऊं मैं भी अपने साथी वृक्षों सम रोंक सकूं मैं मानुष को मुझमें ना है इतना दमखम जला लकड़ियां मेरी जाने कितने घरों में बने भोजन मुझको ना काटो हे मानुष ! देता हूँ मैं तुमको आक्सीजन… शुद्ध करूं मैं वा... »

‘बैकुंठ चतुर्दशी’

आज है बैकुंठ चतुर्दशी पावन बेला शुभ दिन है श्री हरि विष्णु और महादेव का आज साथ में पूजन है…. जो पूजे विष्णु संग शंकर वो जाये बैकुंठ धाम बैकुंठ चतुर्दशी पर प्रज्ञा का हरि को कर जोड़ प्रणाम…. »

साहित्य शिरोमणि हरिवंश राय बच्चन

“हरिवंश राय बच्चन बर्थ डे स्पेशल” **************************** आज जन्मदिन है उनका जिसने लिखी थी मधुशाला वह कहते थे अपने परिचय में:- ‘मेरे लहू में है पचहत्तर प्रतिशत हाला’ नाम है उनका ‘हरिवंश राय बच्चन जन्म हुआ २७ नवम्बर १९०७ इलाहाबाद में उनका… वह थे छायावत लेखक और समृद्ध कवि मिला उन्हें पद्मभूषण साहित्य के क्षेत्र में थे महारथी.. अमिताभ बच्चन महानायक हैं उनके बे... »

शिकवों के पुलिंदे….

यादों के पंख फैलाकर सुनहरी रात है आई उन्हें भी प्यार है हमसे सुनने में ये बात है आई पैर धरती पे ना लगते उड़ गई आसमां में मैं जीते जी प्रज्ञा’ देखो स्वर्ग में भी घूम है आई . चाँद पर है घटा छाई गालों पर लट जो लटक आई… सजती ही रही सजनी सजन की प्रीत जो पाई मिलन की आग में देखो जल गये शिकवों के पुलिंदे, पीकर नजरों के प्याले प्रज्ञा बन गई मीराबाई… »

‘प्रेम के उपनिषद्’

थक गई हूँ अब रोते-रोते, तन्हा राहों पर चलते-चलते इन बिखरी साँसों की अरज बस है यही तुमसे मिलन जब भी हमारा हो ना कोई गिला-शिकवा हो ‘प्रेम के उपनिषद्’ पर बस नाम अंकित तुम्हारा हो बिखर कर टूटने से पहले जब मिलना कभी हमसे, मुझी में डूब जाना तुम, फकत बाँहों में भरकर के… »

“हे भारतीय ! हे सैनिक प्रिय !”

“२६-११ हमले पर भावभीनी श्रद्धांजलि” ******************************* याद है वो २६-११ हमले की घटना जिसमें हमारे जवान शहीद हुए थे कैसे भूलेंगेे हम वो दिन जब हमारे सैनिक हमसे दूर हुए थे उन वीरों को प्रज्ञा’ की नम आँखों से श्रद्धांञ्जलि २६-११ हमले की घटना ना हो फिर कभी.. लड़ना है जिनको आयें वो शत्रु रण में आगे टिक पायेंगे ना वो भारतीय वीरों के आगे.. बुज्जदिलों के जैसे करते हैं पीछे से... »

“हमारा संविधान और संविधान दिवस”

आज संविधान दिवस है हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है… २६ नवम्बर २०१५ से डॉ० भीमराव अम्बेडकर के १२५वें जन्म दिवस से संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है… अम्बेडर जी को संविधान निर्माता कहा जाता है… संविधान की असली कॉपी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथ से लिखी… कैलिग्राफी के जरिये इटैलिक अक्षरों में लिखी… जिसे आज भी भारतीय संसद में हीलियम भरे डिब... »

“एक तरफा मोहब्बत”

तुम्हारे सुधर जाने की गुंजाइश ही नहीं थी तो आखिर हम कोशिश कब तक करते ! रफ्ता-ऱफ्ता तुम पास आते गये हम भला दूर कैसे रहते ! रोंका तुम्हें, समझाया तुम्हें और भला हम क्या करते… जब तुम्हें हमसे मोहब्बत ही नहीं थी आखिर हम तुम्हें अपना कब तक समझते… »

“अनाथ आश्रम”

अनाथ आश्रम ★★★★★★★ मेरे माँ-बाप कैसे होंगे यही सवाल अक्सर मस्तिष्क में गूंजता रहता है अक्सर मुझे वो काकी याद आ जाती हैं जिन्होंने मेरी परवरिश बचपन में की थी उस अनाथ आश्रम में बहुत से बच्चे थे पर मुझसे कुछ अलग ही लगाव था उनका माँ नहीं थीं पर फिर भी माँ जैसा खयाल रखती थीं मेरा उस अनाथ आश्रम में कभी अनाथ जैसा महसूस नहीं होता था सब थे अपने से और दर्द समझते थे वो काकी आज बहुत याद आ रही हैं जिनकी गोद मे... »

“अतीत के फफोले”

अतीत के फफोले *************** जीवन मेरा उलझा-उलझा सुलझी लट बालों की मैंने ना देखा सुंदर उपवन ना देखी प्रेम की सरिता निर्मल भूलवश मैं पड़ गई प्रेम के मायाजाल में सोंचा था मिलेगा सुख और जीवन में खिलेेंगे सुंदर पुष्प पर हार ही हार मिली जो भी जीवन में आया उससे केवल पीर मिली अतीत के फलोले आज फूटने लगे हैं जब बिछड़े हुए लोग फिर से मिलने लगे हैं.. »

लावारिस बचपन

लावारिस बचपन ************** सड़कों पर भटक-भटक कर है कैसे बचपन बीता, और नहीं खाने को है एक निवाला मिलता… जाने कहाँ हैं मेरे माँ-बाप नहीं मैं जानू, मैं तो झुग्गी बस्ती को ही अपना घर-बर मानू… लालन-पालन मेरा अनाथ आश्रम में हुआ है, यह लावारिस बचपन सड़कों के किनारे ही कटा है… मैंने ना देखा सुनहरा बचपन ना देखी शोख जवानी, बस बचपन से करी मजूरी और गलियों की धूल है छानी… »

“देवोत्थान एकादशी”

आषाण की एकादशी को सभी देव सो जाते हैं… और कार्तिक की एकादशी को सभी देव जग जाते हैं… इसीलिए इस दिन को देवोत्थान एकादशी कहते हैं… आज के दिन विष्णु जी चारमास के बाद नींद से जागते हैं… और आज के दिन तुलसी माता का विवाह भी होता है.. इसीलिए आषाण से कार्तिक मास तक कोई शुभ कार्य किया नहीं जाता है… आज के दिन से हिन्दू धर्म में विवाह होना प्रारम्भ हो जाता है… देवोत्थान एका... »

“तुलसी माँ विवाह”

आज है कार्तिक मास की एकादशी है तुलसी माँ का विवाह है… मेंहदी लगाकर मौली चढ़ाकर गोटे वाली चूनर ओढ़ाकर माता का किया श्रृंगार है आओ भक्तों मंगल गाओ तुलसी माँ का विवाह है… पैरों में माँ के महावर लगाकर फूल-फल और हलवा पूरी का तुलसी माता को भोग लगाकर खाओ यह मंगल प्रसाद है.. तुलसी माँ का विवाह है… »

उस माँ का दर्द कौन जाने..!!

उस माँ का दर्द कौन जाने ! जो अपने फर्ज के लिए अपने दुधमुहे बच्चे को घर छोंड़कर जाती है.. वो पुलिसकर्मी है अपनी ड्यूटी खूब निभाती है… कभी छोंड़ती मायके में कभी ससुराल में छोंड़कर जाती है.. दिल को पथ्थर बनाकर ममता से मुंह मोड़ती है देश के नागरिकों की रक्षा के लिए अपने बच्चे को दूसरे के सहारे छोंड़ती है… कैसे बीतते हैं उसके दिन और कैसे रात कटती है… उस माँ का दर्द कौन जाने जो अपने बच... »

अच्छी किस्मत

अच्छी किस्मत वाले लोग आसानी मिल जाते हैं पर दिल के अच्छे लोग बड़ी मुश्किल से रहते हैं… »

स्वाद मोहब्बत का

वो हमें छोंड़कर गैरों के हो गये चलो स्वाद ले लेने दो उन्हें भी गैरों की मोहब्बत का, जब वो हमारे नहीं हुए तो किसी और के क्या होंगे ?? »

मानव मूल्यों का ह्रास

बेंचकर सोना-चाँदी पीने चले अंग्रेजी देखो मानव के पतन का ये सुंदर दृश्य देखो दिन भर करें मजूरी रात में पीकर टुंन हैं देखो हिन्दू हो या हो मुस्लिम सब बैठे मयखाने में देखो दारू के दो पैग लगाकर पी लेते हैं जैसे अमृत देखो कहाँ जा रही मानवता मानव मूल्यों का होता ह्रास देखो… »

‘बाबू जी की टूटी कुर्सी’

बाबू जी की टूटी कुर्सी चरमर-चरमर करती है जब बैठो उस कुर्सी पर डाल की तरह लचकती है बाबू जी उस कुर्सी पर बैठ के पेपर पढ़ते हैं और साथ में बाबू जी चाय की मीठी चुस्की लेते हैं सुबह सवेरे उठकर वो रोज टहलने जाते हैं लौट के आते जब बाबू जी मल-मल खूब नहाते हैं वह कुर्सी बाबू जी को बेटे माफिक प्यारी है टूट गई वह देखो फिर भी बाबू जी को प्यारी है… »

और मैं खामोंश थी…!!

आज बहुत उदास होकर उसने मुझे पुकारा, मैं पास गई और उसे प्यार से सहलाया… उसने मुझसे कहा तुम मुझसे नाराज हो क्या ? या जिन्दगी की उलझनों से हताश हो क्या ? मैंने मुस्कुराते हुए अपने आँसू छुपाकर कहा नहीं तो पगले ! तुझसे नाराज नहीं खुद से खफा हूँ मैं जिन्दगी से हताश नहीं हैरान हूँ मैं… बस कुछ दिनों से खुद से नहीं मिल पाई हूँ इसीलिए तुझे अपने प्रेम से सींच नहीं पाई हूँ… मेरी गोद में सिर ... »

प्रेम का लबलब घड़ा…

रुक मुसाफिर ! रुक जरा ! मैं हूँ प्रेम का लबलब घड़ा. कीर्ति तेरे परिश्रम की कम नहीं फैली हुई है… राह में तेरे मुसाफिर देख ये प्रज्ञा’ खड़ी है सुन जरा ओ पथिक प्यारे ! देख टूटा जाये ये लबलब घड़ा भर ले अंजुल मेरे नीर से वरना छलक जायेगा यह घड़ा… सुन जरा ओ पथिक प्यारे ! पी ले तू मुझको जरा प्यास तेरी मिटेगी और दर्द कम होगा मेरा… »

*शिल्पकार*

कवि नहीं शिल्पकार हूँ मैं ! एक ऐसा कवि, जो कागज पर अपनी भावनाओं भरी कलम से शब्दरूपी नक्काशी करता है.. जिसकी सुंदरता सिर्फ नेत्रों से दिखाई ही नहीं पड़ती बल्कि हृदय से महसूस भी होती है… »

‘सुकून और बेचैनी’

थकान है मगर दिल को आराम है आज मन भी बड़ा शान्त है थोड़ी तसल्ली भी है तुम्हारे साथ होने की खुशी भी है तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर आज घण्टों रोती रही मैं सिर तो दुःख रहा है मगर दिल हल्का भी है तुमसे जी भर कर कह दी हमने दिल की बातें सुकून भी है और बेचैनी भी है.. »

अतीत की यादें..

रात को गले लगाने के बाद अतीत की यादों में डूब जाने के बाद, बस आँसुओं का सैलाब ही उमड़ता है किसी से एक तरफा मोहब्बत हो जाने के बाद.. »

*आख़री खत*

वो मीठी बातें और मुलाकातें करते थे हम रात भर जो प्यार भरी बातें तुम जाने कितने तोहफे मुझे दिया करते थे, हर तोहफे में एक खत रखा करते थे.. उन खतों की बात निराली होती थी, पढ़ती थी अकेले जब हाथ में चाय की प्याली होती थी… तुम्हारे खतों की भाषा मेरी कविताओं से अच्छी होती थी, तुम्हारे हर खत को मैं बार-बार पढ़ती थी… फिर तुम्हारी एक गलतफहमी ने सब बर्बाद कर दिया, बहुत दूर तक जाने वाला था जो रिश्... »

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