Pragya Shukla, Author at Saavan's Posts

उर्मिला

सब था मर्यादित रामचरित मानस में पर उपेक्षित उर्मिला की वेदना पर ध्यान किसी ने नहीं दिया जिस सम्मान की वो भागीदार थी वह सम्मान किसी ने नहीं दिया »

हर फ़ैसला

हर फ़ैसला खुद करने की आदत थी उन्हें, बिछड़ने का फैसला भी अकेले कर लिया। »

इश्क की गोद

इश्क की गोद में जा बैठी जो कातिल था उसी को मीत बना बैठी। बुझ गई थी बहुत पहले ही क्यूँ आज दिल की आग जला बैठी। वो ख्व़ाब था किसी की नींदों का क्यूँ उसे अपनी रात बना बैठी। जो झूठ के दायरे में रहता था क्यूँ उसी के आगे सदाकत की नुमाईश लगा बैठी। जख्मों पे नमक चिढ़कना पेशा था जिसका दिल के छाले उसी को दिखा बैठी। प्यार सुन्दरियों का व्यापार था जिसके लिए उसी को मोहब्बत का खुदा बना बैठी। ख्व़ाब देखे थे जो हमन... »

कुछ दिनों से

कुछ दिनों से बदल सी गई हूँ पहले जीवन में कविता ढूंढ़ती थी अब कविता में जीवन ढूंढ़ती हूँ। »

हर कदम

इस तरह सतर्क पहले कभी ना थे लगी जब से ठोकर हर कदम सम्भाल कर रखती हूँ »

उठ बेटा

एक पन्ना और जुड़ गया जीवन के अध्याय में चिरंजीव चिरस्थायी का जो आशीर्वाद दिया था माँ ने आज धुंधला प्रतीत हो रहा है अकस्मात एक प्रारब्ध बेला पर »

वो बूढ़ी माँ

एक पन्ना और जुड़ गया जीवन के अध्याय में चिरंजीव चिरस्थायी का जो आशीर्वाद दिया था माँ ने आज धुंधला प्रतीत हो रहा है अकस्मात एक प्रारब्ध बेला पर विचलित कर देने वाली घटना स्मरण हुई जो अन्तर्मन को दुखा रही थी मेरी वेदना के शूल चुभ रहे थे नयनों से अश्रुधारा बह चली एक माँ के बुढापे का सहारा जो मृत्यु की गोद में सो गया था अकारण ही दुर्घटना का शिकार हो गया था ….. वो बूढ़ी माँ अपने मृत पुत्र को गोद में... »

एक दौर वो भी गुजरा है

एक दौर वो भी गुजरा है! जब हम कागज और कलम लेकर सोते थे। यादों में पल-पल भीगा करती थीं पलकें , अभिव्यक्ति के शब्द सुनहरे होते थे। ना दूर कभी जाने की कसमें खाई थीं मिलने के अक्सर वादे होते रहते थे। कोई यूं ही कवि नहीं बनता है यह सच है हम भी तो पहले कितना हंसते रहते थे। »

मैं रहूँगा कहाँ ???

बहुत कोशिशें कर ली उसे मनाने की, राहें भी ढूंढी दिल में उतर जाने की । पर नाकाम ही रहे हर कोशिश में हम, दिल उदास हो गया गम में डूबे हम… फैसला कर लिया उसे भूल जाऊँगी, चाहे कितना भी बुलाए ना पास जाऊँगी… सारे कसमें वादे भी हमनें तोड़ दिए, यादों के गुप्तचर भी मैनें कब के छोड़ दिए … पूरा इन्तजाम कर लिया उसे भुलाने का, ख्व़ाब भी छोड़ दिया मैनें उसको पाने का… निकालने जब उसको मैं चली द... »

मैं रहूँगा कहाँ ???

बहुत कोशिशें कर ली उसे मनाने की राहें भी ढूंढी दिल में उतर जाने की पर नाकाम ही रहे हर कोशिश में हम दिल उदास हो गया गम में डूबे हम फैसला कर लिया उसे भूल जाऊँगी चाहे कितना भी बुलाए ना पास जाऊँगी सारे कसमें वादे भी हमनें तोड़ दिए यादों के गुप्तचर भी मैनें कब के छोड़ दिए पूरा इन्तजाम कर लिया उसे भुलाने का ख्व़ाब भी छोड़ दिया उसको पाने का निकालने जब उसको मैं चली दिल से बेबस सी लगी खुद को मैं फिर से फिर सो... »

रास्ता कहीं से तो जाता होगा

वो आते तो हैं मेरे आशियाने में.. मुझी से मिलने मगर जताते नहीं हैं बस हम समझ जाते हैं.. नज़रे झुकाए रहते हैं और दिल लगाने की बात करते हैं.. कितने नादान हैं चुपके से देख लेते हैं रुख पर मुस्कान लिये… मैं जानती हूँ वो तगाफुल करने में माहिर हैं पर हम भी दिल में बस जायेंगे आहिस्ता- आहिस्ता… रास्ता कहीं से तो जाता होगा उनके दिल तक! पहुँच ही जाऊँगी उन तक फिर देखूँगी कहाँ जाते हैं हमसे बचकरR... »

नींद

हैरत में हूँ कुछ भी समझ आता नहीं, नींद तो मेरी है पर ख्व़ाब आपके। »

🙈🙈नींद 🙉🙈

🤔🤔हैरत में हूँ कुछ समझ आता नहीं नींद तो मेरी है पर ख्व़ाब आपके 🙈🙈 »

चिट्टियां

आरज़ू थी कि मेरे हाथ में तेरा हाथ होगा…. क्या खबर थी कि हाथ सिर्फ़ चिट्ठियां ही आएंगी । »

क्यूँ देखूँ

तुमने कह तो दिया मगर दिल को तसल्ली ना हुई शब तो हो गई पर मैं ना सोई गुजार दी ज़िन्दगी तेरी आरज़ू करने के बाद किसी और को क्यूँ देखूँ तुम्हें देखने के बाद रूबरू तुम आये भी नहीं मगर महसूस तो किया मैनें हर लम्हा तुमको दिल लगा लिया तुमसे मिलने के बाद किसी और को क्यूँ देखू तुम्हें देखने के बाद »

तेरी मोहब्बत में

तेरी मोहब्बत में आधी उम्र काट दी पर क्या करूँ आज भी बेबस हूँ मैं »

वह लौट कर आया है

वह लौट कर आया है अरसे के बाद के मैं हैरान हूं क्योंकि उसने कहा था मैं जा तो रहा हूं पर कभी लौट कर नहीं आऊंगा »

शायद

मैनें लाज़ की चादर ओढ़ रखी है शायद मेरी ज़मी पे तेरे इश्क की बूंदाबांदी हो कभी »

कुछ सर्द हवा ओं ने

कुछ सर्द हवाओं ने मन महका दिया उन हवाओं में जैसे नर्मी सी हो छू कर मेरे बदन को रूह तक ठण्डा कर रही हैं और अपनी खुशबुओं से फ़िजा महका रही हैं »

बिछड़े थे

आज कुछ पुरानी यादों के पन्ने पलटकर हम वहीं पहुँच गए जहां से बिछड़े थे तुमसे »

पुरानी यादें

कुछ खुशबुएँ महकती हैं कायनात में लिपटे हैं हम पुरानी यादों के दामन में । »

मेरी स्मृति

मेरी स्मृति में अब भी कुछ अवशेष शेष हैं तुम्हारी यादों के कुछ पल मेरे मस्तिष्क में उपस्थित हैं »

तेरा दर

लेकर दर्द घूमती हूँ हर दर पर पर तेरा दर नहीं मिलता जाऊँ मैं किधर!!!!! »

लोग कहते हैं

लोग कहते हैं कि मैं बड़ा कमाल लिखती हूँ मैं उसका ही दिया हर दर्द उसके नाम लिखती हूँ »

कोरोना वायरस खाए जाति है

🇮🇳सीतापुरिया अवधी भाषा:-🇮🇳 घर ते निकरई मा जियरा डेराति हई कोरोना वायरस खाए जाति है।😩😩 हरि घंटा हम हाँथ धोइति हन खाना- पीना हम संतुलितई खाईति हन खाँसी आवई मा जियरा डेराति है कोरोना वायरस खाए जाति है। संतरा-निम्बू हम खातई रहिति हन गिलोय घिसि कई हम कात्ता पीति हन तुलसी कि पाती सब दिनु भरि चबाति हई कोरोना वायरस खाए जाति है। दूरई ते सब ते नमस्ते करिति हन हाथ हम कोई ते नाई मिलाइति हन मुँह का अपने हम ढाक... »

क्या है कोरोना वायरस

FacebookWhatsAppTwitterEmailCopy LinkShare सर्दी खाँसी हो जाती है बहुत तेज ज्वर आता हांथो पैरों का दर्द बढ़ता ही जाता है पहले सूखी खाँसी आती है फिर ज्वर ज्वलंत हो जाता है बचाव:- बचाव ही निदान है कोई सफल दवा अब तक सम्भव ना हो पाई है हांथो पैरों और मुँह को साबुन से हरदम स्वच्छ रखो लोगों के सम्पर्क से दूर रहो और आसपास को स्वच्छ रखो भीड़-भाड़ में मत जाओ मुँह पर मास्क लगा के रखो खांसने छींकने से पहले मुँह... »

क्या है कोरोना वायरस

सर्दी खाँसी हो जाती है बहुत तेज ज्वर आता हांथो पैरों का दर्द बढ़ता ही जाता है पहले सूखी खाँसी आती है फिर ज्वर ज्वलंत हो जाता है बचाव:- बचाव ही निदान है कोई सफल दवा अब तक सम्भव हो पाई है हांथो पैरों और मुँह को साबुन से स्वच्छ रखो लोगों के सम्पर्क से दूर रहो और आसपास को स्वच्छ रखो भीड़-भाड़ में मत जाओ मुँह पर मास्क लगा के रखो खांसने छींकने से पहले मुँह पर कपड़ा या हाँथ रखो उपचार:- सफल इलाज़ अभी तक सम्भव ... »

निर्दोष मानोगे???

मैं जानती हूँ कि तुम भी मुझे ही गलत ठहराओगे कुछ कहने से कोई फायदा नहीं—- मैं कह भी दूँ मैं सही थी पर तुम कहाँ मानोगे— तुमने जो जिम्मेदारी दी थी उसी को पूरा कर रही हूँ —- तुम्हीं ने कहा था:- ‘ना किसी की तुम सहना’— वही कर रही हूँ पर तुम कहाँ मानोगे क्यूँ बुरा लग रहा है जब बात अपनों पर आई— मै जानती हूँ तुम मुझे निर्दोष मानोगे नहीं तुम्हारी संगत में थोड़ी निर्भ... »

जरूरी तो नहीं

मै जानती हूँ मुझमें गुस्सा थोड़ा ज्यादा है पर मै दिल की बुरी हूँ जरूरी तो नहीं….. बड़ो के आगे झुकना चाहिए पर हमेशा मैं ही झुकूं ये जरूरी तो नहीं…. आग दिल में लिये कोई आये मै शीतल मस्तक ही रखूँ जरूरी तो नहीं…. बड़े सही होते हैं मानती हूँ पर हमेशा मैं ही गलत हूँ ये जरूरी तो नहीं… रिश्तों में सहजता जरूरी है पर मैं ही हमेशा अपना स्वाभिमान गिराऊँ ये जरूरी तो नहीं…. »

अपनो के दिए ज़ख्म

हर दर्द का इलाज है जहान में पर अपनो के दिए ज़ख्म कहाँ भरते हैं टूट जाते हैं जो रिश्ते तो फिर कहाँ जुड़ते हैं कैसी कश्मकश है जिंदगी में जो प्रिय होते वही बिछड़ते हैं कितनी भी कोशिश करो खुश रहने की जब आंख में आँसू हो तो लब कहाँ हँसते हैं खुद को बदलने की हर कोशिश करती हूँ पर दिल के अंगार कहाँ बुझते हैं हमेशा मै ही झुकूं ये तो मुनासिब नहीं स्वाभिमान के अल्फ़ाज कहाँ चुप रहते हैं हर दर्द का इलाज है मगर अपन... »

दिलों में गर्मी

दिलों में गर्मी बहुत है थोड़ी हवा चल जाये तो अच्छा है »

अब बहुत हो गया

अब बहुत हो गया लेती हूँ मैं विदा कल फिर लेकर आऊंगी कुछ अल्फ़ाजों की लड़ी प्रीत से भीग जायेगा तन-मन तुम्हारा लग जायेगी आँसूओं की झड़ी। »

गूलर का फूल

वो तो गूलर का फूल लगता है मेरे दिल का फ़ितूर लगता है । ना शाम लगता है ना सुबह लगता है सर्दी की दोपहर वो लगता है । वो तो भीगा गुलाब लगता था वो तो भीगा गुलाब लगता है मेरा दर्पण तो वही है लेकिन चेहरा कितना उदास लगता है । वो तो छूते ही चीख उठता है कितना कोमल है फूल टेसू का दर्द मेरा बढ़ गया है अब इतना फूल से प्यारा शूल लगता है । वो रजनीगंधा है महकता है जाने दिन-रात किसके दामन में मेरी किस्मत में नहीं है... »

तुम्हारी चादर में

तुम्हारी चादर में लिपटे कुछ शक के दाग थे। तुम मेरी मंज़िल और तुम्ही हमराज थे। क्या थे दिन और क्या लम्हात थे। कुछ अंजाम और कुछ आगाज़ थे। इल्जाम लगा किस्मत और हालात पर हम तो, बचपन से ही बर्बाद थे। सुबह हुई तो देखा तकिये पर पड़े सूखे, अश्कों के दाग थे। वो खिड़कियाँ अब बन्द ही रहती हैं , जिनके दीदार के कभी हम मोहताज़ थे। अर्सा हुआ ना मिले उनसे जिनके हुआ करते कभी हम तलबगार थे। »

ज़रा देखूँ तो सही

जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसमें पत्थर हैं या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही नहीं मैं हूं या हूं ही नहीं या हृदय विहीन हो तुम जो मुझसे प्यार नहीं मेरा एहसास नहीं कोई जज्बात नहीं जरा देखूँ तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर मैं हूं या मैं हूं ही नहीं। यदि मैं हूँ तो अपने एहसास छुपाते क्यूँ हो भली महफिल में रूसवा कर जाते क्यूँ हो। जरा देखू... »

दरवाजा खोलना

उनके आने की खबर से मैं यूँ बेचैन हो गई खिड़की से देखती रही दरवाज़ा खोलना भूल गई »

पर्त दर पर्त

पर्त दर पर्त तू खुलता जा रहा है ये दिल तुझसे दूर होता जा रहा है »

किताब जब

किताब जब खोलोगे तुम यादों की मेरा नाम सबसे नीचे होगा पन्ने जब पलटोगे वफ़ा के मेरा ही चेहरा दिखेगा »

पहले खफ़ा

पहले खफ़ा थे हम उनसे अब वो निभा रहे हैं जितना मैं पास जाऊँ उतना ही दूर जा रहे हैं »

वो मुझे यूँ

वो मुझे यूँ रुला रहा है जैसे याद कर रहा है । यूँ देखता है जैसे मुझे प्यार कर रहा है । »

तेरी अच्छाई

तेरी एक अच्छाई बताऊँ:- अगर तू बेवफा ना होता तो मैं शायर ना होती कदर खुशियों की कैसे जानती जो रात भर ना रोती । »

वो मुझे कुछ यूँ

वो मुझे कुछ यूँ चाहता था कि मेरी साँसो से मुझे पहचान लेता था एक दिन उसके दोस्तों ने पूंछा क्या है तुम्हारी ख्वाहिशे—— उसने छोटी सी लिस्ट सुनाई जिसमें पहला नाम भी मेरा था और आखरी भी—— वो मुझे कुछ यूँ चाहता था—- मेरे मुँह से निकले अल्फ़ाज मेरे चेहरे से जान लेता था—‘ »

रोक लिया

रोंक लिया है हमनें अपने आप को जैसा चाहते थे तुम मैनें खुद को बना लिया »

कली जो

बहारें आने वाली थीं लेकिन ना आई कली जो खिलने वाली थी शाख पर ही ना आई »

मद में

कौन जाने यहाँ किसको सब व्यस्त हैं खुद में किसी से क्या शिकायत जब तू खुद ही तेरे मद में »

मद में

कौन जाने यहाँ किसको सब व्यस्त हैं खुद में किसी से क्या शिकायत जब तू ही खुद ही तेरे मद में »

ज़ख्म

छिपा कर ज़ख्म घूमती हूँ तेरे दिए हुए तड़प उठती है तन्हाई किसी का हाथ पड़ने से »

यादें

धुँधली यादों की परछायी छुपाने की जो कोशिश की मिट गई सांसों की रेखा लिपट कर आ गयी यादें »

नामुमकिन है

भूल जाऊँ मैं सब कुछ नामुमकिन है ये खुद को भुला सकना मेरे बस में फिर भी है तेरा नाम मिटा सकना नहीं बस में नहीं हद में »

मै से मैखाने

तेरे इश्क में किया है हमनें मै से मैखाने का सफ़र »

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