थोड़ा सा कुछ

थोड़ा सा कुछ
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घर एक कारखाना,
काम करते-करते..
थोड़ा सा कुछ रह ही जाता है।
तन- मन से बढ़िया से बढ़िया करने के बाद,
मुस्कुराहट के साथ परिवारी जनों की प्रतिक्रिया जानने के लिए
जब परसे जाते हैं व्यंजन,
एक तकिया कलाम मिल ही जाता है,।
“बहुत उम्दा बना है
अगर इसमें थोड़ा सा……”
निमिषा सिंघल

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