NIMISHA SINGHAL, Author at Saavan's Posts

नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में

नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में ————————————— हम वतन थे जो त्रस्त थे बाहर, उनको घर उनके बुलाया तो बुरा क्या किया! बिना टिकट सवार थे भारी टिकट जो पूछी गई ऐसा बुरा क्या किया! सांप बिच्छू सभी रहते थे जहां बिलों में पिघला शीशा डाला तो बुरा क्या किया! दीमकें लगी थी जड़ में खोखला वतन ये किया जड़ों में तेल लगाया तो बुरा क... »

कौन हूं मैं?

कौन हूं मैं? ————- बिजलियां, आंधियां कोंधती उड़ती रहीं। धारियां, छुरियां दिल पे निशा देती रहीं। अठखेलियां, रंगरेलियां आवारगी करती रहीं। विरक्तिया,सिसकियां गम और ख़ुशी भरती रहीं। रीतियां, बेड़ियां बंदिशे देती रहीं। गलबहियां, कनअखियां सुकुन है कहती रहीं। इश्क़ में कुछ तो बात थी कचहरीयां होने लगी मुश्क सा वो फैल गया हर गली चर्चा होने लगी। दिल की लगी भी थी क्या लगी सदियों तलक स... »

कुफ्र

अतीत के फफोले तेजाबी बारिश दहकते लावे की तपिश या कोई आतिश ताउम्र का सबक बस एक कुफ्र। निमिषा »

तट बंदिनी

तटबंदिनी ———— तटबंदिनी सी मै सागर से तुम। बंधन सारे मेरे लिए! आज़ाद परिंदे तुम। निमिषा »

पिया बिना

पिया बिना ——- सुनो प्रिय! मेरा हृदय करे स्पंदन आंखों से फैला ये अंजन भूख प्यास सब लगते झूठे पिया बसंती तुम जो रूठे। सूखे पत्ते सी में कांपू तेरे बिना शापित सी नाचू पल पल तेरी राह निहारु द्रवित हृदय से तुझे पुकारू। मरुभूमि सी तपती देह प्रेम सुधा बरसादे मेंह तेरे दरस की प्यासी हूं बिन तेरे महज उदासी हूं। अंजुरी भर-भर पीना है हो प्रेम बाबरी जीना है इस जग में प्रेम का चलन यही बिन पिया किसी... »

वो खिलोनवाली

वो खिलौने वाली ——————— एक पैर से लाचार वो स्वाभिमानी लड़की, याद है मुझे आज भी कल ही की बात सी। चेहरा नहीं भूलता उसका तीखी खूबसरत सी नाक थी। रूखे सूखे से बाल तन से वो फटे हाल थी। चेहरे पर उसके जीने की चमक , कांधे पे झिंगोला लिए लाठी के साथ थी। हां वो खूबसूरत लड़की बड़ी बेमिसाल थी। गाड़ीयों के बीच में सड़कों पर दौड़ती, एक लाठी के सहारे, खिलौने वो बेचती। गर्म... »

गज़ल

गज़ल ——- जहर यह उम्र भर का एक पल में पी लिया हमने। तुम्हारे साथ जन्मो जन्म रिश्ता जी लिया हमने। 1.मुकम्मल ना हुआ तो क्या इश्क को जी लिया हमने कहते हैं आग का दरिया डूब कर देख लिया हमने। 2.चिरागों की जरूरत क्या पड़ेगी हमको ए कातिल, जलाकर खुद का दिल ही आज कर ली रोशनी हमने। 3. तुम्हारे बक्शे जख्मों को हरा रखना …. आदत बना ली है जो गहरे घाव है दिल के सजा कर रख लिए हमने। 4.सितमगर इश्क़ ... »

किताबे

किताबें ——– किताबे गुमसुम रहती हैं आवाज़ नहीं करती। सुनाती सब कुछ है लेकिन बड़ी खामोश होती है। छुपा लेती है सब कुछ बस, घुटन वो खुद ही सहती हैं। दफन कर लेती बेचैनी, दुख वो खुद ही सहती हैं। लोग जो कह नहीं पाते, किताबों में वो लिख जाते। खुद तो निश्चिंत हो जाते, किताबों को वो भर जाते। अगर कोई झांकना चाहे किताबें आईना बनती। अगर कोई देखना चाहे अक्स हर शख्स का बनती। हृदय का बोझ ढोती है ... »

प्रेम

🌺”प्रेम एक पूर्ण शब्द है अपूर्णता से पूर्णता की ओर ले जाने वाला। जितना अधूरा उतना कामयाब अखंड ज्योति सा हृदय में उम्र भर सुलगने वाला।”” – निमिषा🌺 »

शायर

शायर 🌺——🌺 शब्दों के तीरों से भरे तरकश सा व्यवहार करते हैं… शायर भी क्या खूब यार करते हैं। एक एक तीर से घायल हजार करते हैं, अपने टूटे दिल के टुकड़े समेटकर, जख्मों की स्याही में डुबो कर, रचनाएं तैयार करते हैं। शायर भी क्या खूब प्यार करते हैं। एक एक नग्म,एक एक गज़ल में कहीं ना कहीं उन टुकड़ों को खूबसूरती से छुपा, अपने दिल को तार-तार करते हैं। शायद भी क्या खूब यार करते हैं। दूर चलते ... »

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