NIMISHA SINGHAL, Author at Saavan's Posts

प्रधानमंत्री जी नरेंद्र मोदी जी की 69 वे जन्मदिवस पर कविता

आसमान में उगता सूरज दिखता है , स्वर्णिम भारत का सपना, फिर सच्चा होता दिखता है। हुकुमत शाही अफसरों ने त्यागी, कर्म योग की अब है बारी, सरकारी तंत्र सुधरता दिखता है । स्वर्णिम भारत का सपना फिर सच्चा होता दिखता है । स्वच्छता की अलख जगाई , योग की महिमा समझाई, स्वच्छ, स्वस्थ यह देश मेरा अब दिखता है, स्वर्णिम भारत का सपना , फिर सच्चा होता दिखता है । भारत जग में आगे बढ़ता दिखता है, सच में अब तो देश बदलता ... »

कुछ पल अपने लिए

जब कभी ,अकेले बैठकर , किसी पुरानी बात पर मुस्कुराएंगे। तब आप ,अपनी उन्मुक्त हंसी पर, खुद ही चौक जाएंगे। दिले किताब से धूल झाड़ कर तो देखिए , बस एक पन्ना जरा पढ़ कर तो देख लीजिए । बचपन से जवानी की कहानी निकल पड़ेगी , फिर एक याद , ताजी हवा सी महकने लगेगी। चलचित्र सारे आंखों में तैर जाएंगे। जब आप कुछ पल सिर्फ अपने लिए बिताएंगे। निमिषा सिंघल »

विरासत

विरासत ———- दादा का बजता ग्रामोफोन ,कानों में गूंजा करता है । वह आज भी घूमा करता है आंखों के रोशन दानों में, संगीत की धुन सुनते सुनते , कब समा गया. .. संगीत मधुर… इन कानों में , ना पता चला। गीतों का मधुर कैसेट प्लेयर , जो रोज बजाया करते थे , पापा गुनगुनाया करते थे, परेशानियों में कैसे हंसना है ,कब सीख गए? ना पता चला। कविता लेखन था मां का शौक, उनकी कविताएं पड पड कर , लेखनी कब हाथो... »

विरासत

दादा का बजता ग्रामोफोन ,कानों में गूंजा करता है । वह आज भी घूमा करता है आंखों के रोशन दानों में, संगीत की धुन सुनते सुनते , कब समा गया. .. संगीत मधुर… इन कानों में , ना पता चला। गीतों का मधुर कैसेट प्लेयर , जो रोज बजाया करते थे , पापा गुनगुनाया करते थे, परेशानियों में कैसे हंसना है ,कब सीख गए? ना पता चला। कलात्मकता व्यवहार में थी, रोजाना के रोजगार में थी, कब उतर गई व्यक्तित्व में , ना पता चल... »

आधुनिक नारी

सशक्त है कमजोर नहीं, पत्थर है केवल मोम नहीं। विद्वती है बुद्धि हीन नहीं , बेड़ियों में अब वो जकड़ी नहीं। आधुनिक है ,संकीर्ण नहीं, संस्कृति संस्कारों से हीन नहीं। हक पाना लड़ना जानती हैं दिल की आवाज़ पहचानती है। गुमराह करना आसान नहीं, वह स्त्री है सामान नहीं। शक्ति स्वरूपा , वो तेजोंमयी, ममता मयी मगर दुखियारी नहीं। सृष्टि का भार उठाए खड़ी , आंखों में पहले सा पानी नहीं। हर क्षेत्र में अब वो आगे हैं ... »

Hindi divas

राष्ट्रभाषा हिंदी —————– है शान मेरी, पहचान मेरी , देवो के स्वर सी, ज्ञानमयी। हम जन्मे है इस भूमि पर , जहां देवनागरी बोली है। कई भाषाओं की हमजोली है। जग में देती है मान हमें , हिंदी भाषी सम्मान हमें । कहला देती इस दुनिया में, भारत माता के लाल हमें। अपनी भाषा पर गर्व हमें, बसता जिसमें संगीत मधुर , साजो की बजती धुन सी है । घुंघरू की छनक सी मोहक है, माथे पर शोभित ब... »

जीवन चक्र

क्या है जीवन !! सोचो तो उलझ सी जाती हूं । जितना सुलझाना चाहती हूं , ओर -छोर नहीं पा पाती हूं। बालक का जन्म, घर में रौनक, घर किलकारियों से गूंज मान। नटखट सी शरारते, क्या यही है जीने का सुख?? बालक हुआ किशोर, मन जानने को बेताब,बेकल। हर चीज में है उत्सुकता संसार जानने का मन । किशोर से युवा हुए उल्लास से भरा ये मन, हर मुश्किल से मुश्किल को जीत ही लेने की लगन। युवा से अधेड़ हुए जीवन है चुनौतियों भरा , क... »

यादें

साज़ …….. बुझती… बंद होती.. यादो की मोमबत्तीयाँ…. दे जाती हैं याद… आज भी मधुरिमा। याद रह जाते हैं …कुछ शब्द…गूंज बनके… कहकहे हवाओं में गूँजते हैं साज़ बनके।। निमिषा …….। »

भटके राही

भटके राही क्यू भटके हो??क्यू बिखरे हो?? क्यू बहके हो??क्यू खोये हो?? टुकङे जो देश के कर दोगे, कत्ल उम्मीदो का कर दोगे। बरबादी देश की करके तुम, ममता की छाया क्या पाओगे?? दो जख़ की आग मे जल कर तुम, जीते,जी हीे मर जाओगे। गर हो ना सके,इस माँ के तुम, तो लानत ऐसे जीवन पर। आजा़दी!आजा़दी!आजा़दी! मतलब भी क्या? तुम जानोगे, तुमको जो मिली आजा़द हवा़, मूल्य क्या तुम पहचानोगे?? इस प्रेम मयी धरती माँ पर, क्यू जह़... »

मां

मातृ दिवस :::::::::::::::: माँ जैसा …कोई ना जग में, तोल तराजू ..रख सब इसमें। तब भी पलड़ा …पार ना आये, ममता की ..कीमत ना पाये। ममता का हैं ..मोल निराला, एक हँसी.. जग वारा सारा. सुंदर रिश्ता.. माँ बच्चो का, हँसी, रूलाई ,भोलेपन का। मीठी झिड़की ..आँखे दिखाना, बात -बात मे फिर धमकाना। पीछे से धीरे मुस्काना, पापा का फिर डर दिखाना .. खनखनाती ..खुशियों भरा ये, मधुर तरंगो से है सजा ये। आओ फिर से प... »

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