शरद ऋतु का आगाज़
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लंबी हो चली रात ,
कोहरा और बरसात।
ऐसे में तेरा साथ,
रूमानी एहसास।
गुलाबी होठों के खुलते ही गर्म सांसों की आवाज़।
कोहरे की चादर ओढ़े सूरज की तबीयत नासाज।
यह है शरद ऋतु का आगाज़।
निमिषा सिंघल
शरद ऋतु का आगाज
Comments
One response to “शरद ऋतु का आगाज”
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बेहतरीन
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