घमंड तेरा शत्रु है

घमंड तेरा शत्रु है
उसे कभी न पास रख
तेरा करेगा अवनयन
उसे कभी न पास रख।
घमंड से कटेंगे तेरे
मित्र और दोस्त सब,
घमंड लील जायेगा ये
आत्मीय भाव सब।
तू शिखर को चूम ले
गगन की यात्राएं कर
मगर न भूल मूल को
सभी से प्रेम भाव रख।
अगर घमंड भाव है तो
पूछता ही कौन है,
स्वाभिमान सब में है
दिख रहा जो मौन है।
न धन बड़ा न तन बड़ा
ये नाशवान चीज है
फिर घमंड क्यों करे
घमंड दुख का बीज है।

Comments

3 responses to “घमंड तेरा शत्रु है”

  1. Rishi Kumar

    फिर घमंड क्यों करें,
    घमंड दुख का बीज हैं

    अति सुंदर भाव

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

  3. Geeta kumari

    “घमंड तेरा शत्रु है उसे कभी न पास रख
    तेरा करेगा अवनयन उसे कभी न पास रख।”
    समाज में चेतना प्रसारित करती हुई, कि मनुष्य को कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। कवि सतीश जी की बहुत ही प्रेरणादायक रचना।
    बहुत सुंदर कथ्य सहित उम्दा लेखन

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