3 Comments

  1. “याद वो बालपन करो अब तुम क्या दुबारा बुला सकोगे उसे,”
    वक्त पर आधारित कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर और सच्ची अभिव्यक्ति । वक्त हाथ से निकल गया तो वापिस नहीं आता है । अति उत्तम प्रस्तुति

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