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  1. “निन्दारत रहना नहीं, निंदा जहर समान,निन्दारत इंसान का, कौन करे सम्मान।”
    निंदा ना करने की सीख देती हुई कवि सतीश जी की बेहद सुन्दर कुंडलिया छन्द में बहुत ही सुन्दर और प्रेरक रचना ।
    “अपने में रह मगन, न कर दूजे की बातें।” बहुत ही प्रेरक पंक्तियां

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