3 Comments

  1. धन ही जीवन लक्ष्य है,
    इतना भी मत सोच,
    कमा स्वयं की पूर्ति को
    और शांत रख चोंच।
    *****कवि सतीश जी का धन और जीवन में सामंजस्य बिठाती बहुत ही उम्दा प्रस्तुति और अति उत्तम अभिव्यक्ति।

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