पीले खेत

आया है मधुमास
मास माघी का पावन।
नव किसलय तरु शोभित
क्या उपवन क्या कानन।।
फूलों की क्यारी
सज गई सारी
रंग-बिरंगे फूलों से।
कोयल काली
तरु की डाली
झूले नित झूलों से।।
पीली सरसों पीले खेत
जिमि सजनी संग साजन।

Comments

One response to “पीले खेत”

  1. Geeta kumari

    खेतों का बहुत सुंदर वर्णन प्रस्तुत किया है कवि विनय चंद शास्त्री जी ने । सुन्दर रचना

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