Astrology class, Author at Saavan's Posts

किया प्यार तुमसे

किया प्यार तुमसे, मैं करता रहूँगा। रस्म- ए-वफा को निभाता रहूँगा।। किया……. सूरत तुम्हारी मैं दिल में बसाई । अपना बनाने की चाहत है आई।। मिलो न मिलो मुझसे बुलाता रहूँगा। किया प्यार तुमसे मैं करता रहूँगा।। किया….. छुप-छुप के देखूँ यही चाह मेरी। कहीं भी रहो खुश नहीं आह मेरी। हरेक गम मैं तेरा उठता रहूँगा। किया प्यार तुमसे मैं करता रहूँगा।। किया,,,, ‘विनयचंद ‘लग जा गले यार म... »

बहार- ए-गुलशन बुला रहा है

चले भी आओ मनमीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है। सजाई महफिल है प्रीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।। नजरों के आगे तुम्हारा डेरा धड़कनों में समाए हुए हो। जस्न-ए-मुहब्बत करीब अपने काहे को देरी लगाए हुए हो। रस्म -ए-वफा के संगीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।। »

ये 🌙 गर न होता

ये चाँद गर न होता होती ये काली रातें। दो प्रेमियों के दिल की रहती अधूरी बातें।। नौका विहार नाहीं नहीं प्यार प्यार होता। मस्ती में मस्त निशचर उपद्रव हजार होता।। मायूस ये चकोरा बिन चांदनी के होते। कवियों के दिल विनयचंद न जागते न सोते।। न होती चंद पंक्ति न होती ये कबिता। साहित्य खाली होता न होती प्रेमगीता।। दीदार कर विनयचंद आकाश के परी को। जिसने लगाया भू पर साहित्य के झड़ी को।। ………&... »

ये 🌙 गर न होता

ये चाँद गर न होता होती ये काली रातें। दो प्रेमियों के दिल की रहती अधूरी बातें।। नौका विहार नाहीं नहीं प्यार प्यार होता। मस्ती में मस्त निशचर उपद्रव हजार होता।। मायूस ये चकोरा बिन चांदनी के होते। कवियों के दिल विनयचंद न जागते न सोते।। न होती चंद पंक्ति न होती ये कबिता। साहित्य खाली होता न होती न प्रेमगीता।। दीदार कर विनयचंद आकाश के परी को। जिसने लगाया भू पर साहित्य के झड़ी को।। ………... »

वक्त का घोड़ा

दिन गुजर जाता है सदा सुबह शाम वाला। वक्त का घोड़ा अगर होता लगाम वाला।। कोई कहीं भी इसको सशक्ति खींच लेता। चाबुक भला क्यों न मारे हिलने नहीं वो देता।। पल भर कहीं न रुकता चलता सदा हीं जाता। जो पीठ पर है बैठा मंजिल वही तो पाता।। क्षण एक न गवाओ आलस में विनयचंद। वरना ये द्वारे कामयाबी हो जाएगें एकदम बंद।। »

ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार

राम नाम का जाप करो रे मुख से बारम्बार। ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार। । लख चौरासी चक्कर खाया। फिर कहीं जाके नर तन पाया। । मानुष का तन विषय भोग में मत करना बेकार। ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार।। नरक यमालय नदी बैतरणी। गर्भवास व जीवन मरनी।। दुख दुनिया है मेरे भैया दुखों का भण्डार। ना जाने किस दिन आ जाए काल तोहार।। भजन बिना कुछ काम न आए। धन – दौलत सब यहीं रह जाए।। विनयचंद रे राम नाम का सदा क... »

अब मिलने में कितनी कहो देर है

फूल राहों में तेरे बिछाया सनम अब आने में कितनी कहो देर है। तेरी सूरत को दिल में बसाया सनम अब मिलने में कितनी कहो देर है।। मेरे धैर्य की होगी कितनी परीक्षा सनम अब मिलने में कितनी कहो देर है। विनयचंद करे कितनी प्रतीक्षा सनम अब मिलने में कितनी कहो देर है।। »

इससे बड़ी खुशी क्या होगी

जन्मभूमि मिल गई राम को इससे बड़ी खुशी क्या होगी? सुबह का भूला आया शाम को इससे बड़ी खुशी क्या होगी? चौदह साल बाद रघुवर को मिला अबध का राज। सदियों बाद मिला है बंधु न्याय राम को आज। बरसाओ सब फूल गगन से पत्थर मत बरसाना। विनयचंद रे भाईचारे का धर्म नहीं विशराना।। »

राम नाम का महत्ता

………….पिछले का शेषांश…………… है चमत्कार कैसा स्वामी मैं भी तो जानूँ। राज आपके नाम का मैं भी तो पहचानूँ।। शक्तिरूप सती नारी से सत्य नहीं छुपा पाया। रावण नाम लिखते मेरे मन में ख्याल आया।। रा लिखते राम कहा वण लिखते वन जाए। विनयचंद इस रामरुप को भला कौन डूबा पाए।। ……… . पं़विनय शास्त्री »

राम नाम का महत्ता

सेतु बनाकर सेना संग राम जब लंका। लंका के गलियों में होने लगी ये शंका।। जिसके नाम का पत्थर भी सागर पे गया है तैर। स्वामी तोसे करु विनती नहीं बढ़ाओ उनसे बैर।। चमत्कार तो राम के जैसा मैं भी कर सकता हूँ। पत्थर क्या पूरा पर्वत पानी पर तैरा सकता हूँ।। एक छोटा टुकड़ा ही तैराओ जो पानी में। मैं भी देखू दम कितना है लंकापति की वाणी में।। लो मंदोदरी एक पत्थर पानी में अब छोड़ रहा। सचमुच तैर गया वह मंदोदरी का क... »

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