Pt, vinay shastri 'vinaychand', Author at Saavan's Posts

कानून का हत्यारा

कानून के दहलीज़ पर पहुँचने से पहिले मारा गया कानून के रक्षक का हत्यारा। कोई तो बतलाओआखिर कब तक जिन्दा रहेगा बाँकी कानून का हत्यारा।। »

मेरी फितरत

आम खाके गुठलियों का ढेर लगाना है मेरी नहीं फ़ितरत। एक गुठली से बृक्ष लगाना, चाह मेरी और मेरी यही फितरत।। »

नागपंचमी

बेशक जहरीले होते हैं फिर भी इनकी होती अर्चन। कालव्याल से कालक्षेप हित करते हम सब वन्दन।। ऐसा धर्म सनातन अपना जिसका न कोई शानी है। ‘विनयचंद ‘ संग सारी दुनिया दिल से ये सब मानी है।। नागपंचमी की बधाई »

सावन में

बरस रहा सावन देखो अपने आंगन में। तृण तरुवर सब नहा रहे निज कानन में।। »

वृक्ष की व्यथा

धरती जल रही अम्बर जल रहा जल रहा सकल जहान । हाल कहे क्या पशु-पक्षियों के हैं व्याकुल सब इन्सान ।। सघन छाँव करके मैं तरूवर सबको पास बुलाया । खुद जलकर सूरज किरणों से सब की जान बचाया ।। खाया पीया बैठ यहाँ पर सब भागे जल के भीतर । छम-छम छप-छप छपाक -छप-छप केहरि मृग अहिगण और तीतर ।। मस्त मगन हो नहा रहे सब पशु पक्षी संग-संग इन्सान । ‘विनयचंद’ कोई मुझे भी ले चल बीच दरिया में करूँ स्नान ।। »

सावन की फुहार

बरस रही सावन की फुहार रिमझिम -रिमझिम रिमझिम -रिमझिम। धरती पर छा गई बहार आओ नाचें छम-छम छम-छम छम-छम।। »

चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर

लेके काँधे पे बन्दूक दिल में देशप्रेम अटूट चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर। न हीं जीवन की मोह न हीं परिजन बिछोह देश के खातिर दिया सब कुछ है छोड़। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। ये हमारे वीर सिपाही लड़ने में न करे कोताही जलती धरती अंबर बरसे घनघोर। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। नहीं किसी से वैर है न अपना कोई गैर है भारत माँ की रक्षा में है न कोई थोड़। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। विस्तार... »

गुरु के चरणकमल

गुरुवर तव चरणन में, है तीन लोक राजित। जिसने लिया सहारा, वो खुशियों में विराजित।। लाखों कमल है जग, तव चरण कमल आगे। दिल में बसा ‘विनयचंद ‘ बन जाओगे बड़भागे।। »

चांद सितारे

नभमंडल को देख हमने तो बस ये सीखे हैं। एक चांद के बिना लाखों सितारे फीके हैं।। प्रेम नगर में आकर भी प्रीत की रीति न सीखे हैं। दु:ख दरिया को पार करे वो जीवन के शुद्ध सलीके हैं।। »

शहीद को सलाम

शरहद पर से पापा मेरे फोन किए थे शाम को। कुछ दिन धीरज रखना बेटा आऊँगा मैं गाम को ।। पढ़ना लिखना खेल कूद में सदा रहो तुम आगे। दादा दादी और अम्मा का रखना ध्यान बड़भागे।। तेरे खातिर ढेर खिलौने लाऊँगा मैं ईनाम को।। कुछ दिन धीरज रखना बेटा आऊँगा मैं गाम को।। देख नहीं सकते दादाजी कान न सुनते दादी की। फिर भी सुनाते हमें कहानी शरहद के शहजादी की।। अम्मा मेरी पूजा करती सदा आपके नाम को। जल्दी आना पापा मेरे अपन... »

क्यों छोड़ दिया

हर कदम साथ देने का वादा किया सिर्फ दो ही कदम चलके छोड़ दिया। तूने खाई थी कसमे साथ जीने की मौत आने से पहले हीं क्यों तोड़ दिया।। बड़ी आश से मैंने पकड़ाई थी अंगूरिया मंजिल आने से पहले हीं क्यों छोड़ दिया। मुश्किल बड़े हैं इश्क़ के राह में क्यों अनजानों से नाता जोड़ लिया।। »

हमीद हो गया

धरती से उठ कर हमीद हो गया। माँ तेरा लाल आज शहीद हो गया।। »

सुनु देशक कसम

चीन केर मोबाइल नञ कीनबय पिया सुनु देशक कसम। टी वी नञ लेबय सी डी नञ लेबय नञ लेबय चाइनीज़ झमकौआ। घड़ी नञ चाही केमरा नञ चाही नञ चाही सजावट कें चीज चमकौआ। देशक त्यौहार आ देशक समान हम कीनबय पिया सुनु देशक कसम।। »

तेरा लाल सो रहा

चुप हो जा मेरी माता बीच तिरंगे तेरा लाल सो रहा। भारत माँ का रक्षक थककर चैन की नींद सो रहा।। सपने में भारत माँ संग खुशियों की खेती है बो रहा। »

कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे

कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे। जनताओं में चेतना सैनिकों में साहस देश भक्ति का भाव आज सबमें भरेंगे। कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे।। कलम की आंसू आज शोला बनेंगे। दुश्मनों के ख़ातिर बम गोला बनेंगे।। ‘विनयचंद ‘दुश्मन अब रो रो मरेंगे। कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे।। »

चार सिंघों की शहादत सलाम

शहीदों की सूची में पंजाबियों का नाम है अव्वल। आज भी चार सिंघों ने देकर शहादत काम किया है अव्वल।। प्रणाम करो ऐ ‘विनयचंद ‘ बार बार बन हम्बल। »

शहीदों को श्रद्धांजलि

विनयचंद यूँ रो रो कर कितने को श्रद्धांजलि दोगे। आँसू कम पड़ जाऐंगे तेरे आखिर कितना रोओगे।। सभी शहीदों के खातिर अब अपना शीश झुकाता हूँ। एक जन्म क्या हर जन्मों में आभार तेरा फरमाता हूँ।। जय जवान…. जय हिन्दुस्तान।। »

शहादत के सात फूल

बीस वीरों की टोली में ये सात रत्न बिहारी हैं। शहादत के सात फूल पे ‘विनयचंद ‘बलिहारी है।। »

शहीद चंदनकुमार के सम्मान में

शहीद चंदनकुमार भोजपुर वाले तुम्हें झुककर सलाम हम करते हैं। फूल कहाँ अपनी अंजली में निज अश्कों का दान हम करते हैं।। 🌹 ॐशांतिॐ 🌹 »

शहीद गणेश हंसदा के सम्मान में

सिंहभूमि के सिंह थे तुम गणेश हंसदा भैया। तेरी शहादत अमर रहेगी सदा सर्वदा भैया।। सम्मान सहित ये ‘विनयचंद ‘ प्रणाम करेगा सदा सदा। साहित्य कलम से करता हूँ बिहार केसरी तुम्हें अदा। 🌹 »

शहीद जयकिशोर सिंह के सम्मान में

पावन जन्मभूमि है वैशाली महावीर भगवान की । सिंह जयकिशोर की शहीदी को दो फूल चढ़ाऊँ मान की।। »

शहीद अमनकुमार के सम्मान में

समस्तीपुर के अमनकुमार। ऋणियाँ रहेगा तेरे बिहार। ।। तेरी कुर्बानी का हिन्दुस्तान। प्रणाम करेगा ससम्मान 🌹 🌹 »

शहीद सुनील कुमार के सम्मान में

कर रहा नमस्कार तुम्हें बारम्बार आज सारा बिहार। तेरे बलिदान को देश के गुमान को भैया सुनील कुमार। ‘विनयचंद ‘का प्रणाम अश्रु बूंद का इनाम तुझ पर सब न्योछार। 🌹 »

शहीद कुन्दन ओझा के सम्मान में

शहीद कुन्दन ओझा तुम शहीद हो गए। सारे भारत में देशभक्ति के बीज बो गए।। सारे झारखंड संग बिहार भी सलाम कर रहा। ‘विनयचंद ‘ऐसे ब्राह्मण पूत पर गुमान कर रहा।। कुन्दन ओझा का बलिदान 🌹 याद करेगा हिन्दुस्तान 🌹 🌍 🌹 »

शहीद कुन्दन यादव के सम्मान में

कुन्दन था मेरा कुन्दन यादव कुन्दन बन के बीच सितारों में। फिर गहना बन निकलोगे तुम खालिस हो कर अंगारों में।। तेरी शहादत अमर रहेगी हर बच्चा बच्चा गाएगा। गान तुम्हारे नाम का ये ‘विनयचंद ‘.नित गाएगा।। तेरी शहादत को सलाम 🌹 🌹 »

नमकहलाल बनो

खाया नमक देश का तो थोड़ा नमकहलाल बनो। बेशक बिपक्ष बन बैठे हो पर भारत माँ का लाल बनो।। समर मरन और शत्रु दलन का सबूत मांगना क्या समीचीन है ? प्रमाण चाहिए खोतों को तो तेरा ठीकाना वही पाक व चीन है ।। शर्म करो कुछ निज पुरखों पर जो (42 हजार वर्ग किलोमीटर ) बृहत भूभाग गवाया था। निज करणी के कारण हीं तो अपना हिन्दुस्तान लजाया था।। शमशीर ‘विनयचंद ‘बन न सको तो ,एक अटूट-सा ढाल बनो। नमक खाया देश का... »

वो भक्त भला क्यों अनाथ हो

हर कांटे फूल बन जाएंगे शिवशंकर तेरा साथ हो। कृपा तुम्हारी जिस पर हो वो भक्त भला क्यों अनाथ हो? »

देशी पढ़ुआ

बिन बारिश मेंढक बोले चीटियों की चले जमात। ‘विनयचंद ” सब कहे सयाने निश्चित होवेगी बरसात ।। »

शायरी

कुछआम ऐसे होते हैं जो खाए नहीं जाते। जब खास के साथ हो तो सताए नहीं जाते।। »

लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद-ए-कहर

चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों। लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद- ए-कहर दोस्तों।। साथ तेरा मिला हमें कदम -दर-कदम। चीन से आके वाइरस ये बड़ा बेरहम।। है ये कैसा मचाया जुल्म -ओ-कहर दोस्तों। चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों ।। मेहनत से हमने भी तुझको अन धन का भंडार दिया। तूने भी तो मुझको निज बच्चे -सा हीं प्यार दिया।। बैठ के खाऊँगा आखिर कब तक इस कदर दोस्तों। चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों।। लौटकर श... »

देखो कैसा कोरोना का जग में कहर हो गया

देखो कैसा कोरोना का जग में कहर हो गया ? जिसे अपना बनाया वही बेगाना शहर हो गया।। लेके दिल में तमन्ना था आया यहाँ। बन्द सब कुछ हुआ अब जाए कहाँ? न खाने को कुछ है बचा और जीना दुष्कर हो गया। देखो कैसा कोरोना का जग में कहर हो गया।। बन्द फैक्टरी हुई सब धन्धा गया। कार रिक्शा चलाना भी मन्दा भया।। अब तो किराये के घर से भी बेघर हो गया। देखो कैसा कोरोना का जग में कहर हो गया।। कोई पैदल चला कोई साईकिल सवार। बस ... »

बृक्ष :पर्यावरण के मूल ३ =

शुद्ध रहे ये आबोहवा सदा जीवन के अनुकूल। बृक्ष लगाओ चारों ओर सड़क सरित के कूल।। हरे पौध बृक्षों से है धरती की हरियाली। वातावरण भी सुरभित होंगे होगी जीवन में खुशहाली।। »

वायु: पर्यावरण के मूल २

कर बर्षा आकाश सदा पानी सबको देता है। बृहत उदर का होकर भी आखिर हमसे क्या लेता है? एक वायु का प्यासा है ये शुद्ध हवा तुम देना जी। उन्नत वायु में अपने तुम घोल जहर न देना जी।। »

पानी : पर्यावरण का मूल

पत्थर भी पानी देता है पर पानी में क्या घुलता है? धरती पानी लेती है तो फिर फिर पानी मिलता है।। पानी के प्रति पानी रखो ना पत्थर दिल इंसान बनो। पर्यावरण का प्रथम तत्व का कर संरक्षण उपयोग करो।। »

ढूँढते हैं

बनके दुश्मन बहार का नजारे बहार ढूँढते है। दिल में रख वैमनस्य जनाब प्यार ढूँढते हैं।। »

निर्जला एकादशी

एकादशी का व्रत है आज बंधुओं निर्जला। भक्त उपासक की सदा सर्वदा होवे भला।। »

भीमसेनी एकादशी

की विनती थी भीमसेन ने प्रभु वेद व्यास के चरणों में। उपवास एकादशी करते हैं रख प्रीत सभी हरि चरणों में।। वृक अग्नि नित जलती है पितामह मेरे पेट के भीतर। शांत न होती तबतक जबतक अन्न अकूत न डालूँ भीतर।। मैं भी करूँ उपवास सदा ये कहते मुझ से सब भ्राता। मात्र एक व्रत बतलाओ प्रभु हो पापहारिणी बहुसुखदाता।। जेठ शुक्ल की एक एकादशी निर्जल होकर रख लो भीम। जन्म जन्म के पाप कटेंगे सुख पाओगे वत्स असीम।। प्रकाश में ... »

रो लेता हूँ

इस बंजर-सी धरती पर कुछ अश्कों के बीज बो लेता हूँ। जब जब तुहारी याद आती है तो छुप छुप के रो लेता हूँ।। »

वो तेरे समतूल नहीं

कौन कहता है बहार- ए-चमन में फूल नहीं। हैं तो बहुत प्रीतम मगर वो सब तेरे समतूल नहीं।। »

तम्बाकू निषेध दिवस पर

लेते तम्बाकू देखकर नकल न करना बाप के। जान चली जाएगी तेरी साथ न जाएंगे कोई आपके।। »

तम्बाकू निषेध दिवस पर

ना बनो ना बनो बीड़ी सिगरेट का आदी। दमा टीबी कैंसर से होगी तेरी बर्बादी।। »

तम्बाकू निषेध दिवस पर

मत कर रे जिन्दगानी तू हवाले तम्बाकू के। पत्थर वाले दांत तुम्हारे टूटेंगे बिन चाकू के।। »

तम्बाकू निषेध दिवस पर

दूर रहो सब सदा सर्वदा तम्बाकू से कोसो कोस। जीवन सुखमय होंगे तेरे नहीं करोगे कभी अफसोस।। »

चौपाई

कामधेनु आनन्दी माता। सुरभि कन्या जग विख्याता।।५।। »

चौपाई

गिरिजापति गोधाम बनाया। हरिपूजन अभिषेक कराया।। ४।। »

चौपाई

शिव सत धाम गई एकबारा। शिव कीन्हा गोकुल विस्तारा।। ३।। »

चौपाई

दक्ष सुता सुरभि कल्याणी। कश्यप भार्या बहु सुखदानी।। २।। »

चौपाई

जय गौ माता जनकल्याणी। नहि कोई तुम सम वरदानी।। १।। »

दोहा

गण गौरी माँ शारदे गुरुवर अरु गोपाल। चरणनि मस्तक धार के गोगुण गाऊँ पाल।। »

शायरी

यूँ ना बुलाओ करके नजर के इशारे इस दिल पे तो डाका पर जाएगा। भला तुम्हारा क्या बिगड़ेगा मेरा सब कुछ लुट जाएगा।। »

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