जगमग ज्योति जगा री सजनी, घर – बाहर सब होय उजाला। घनी अमावस की रतिया भी आज,लगे धवल चांदनी वाला।। मिट्टी का दीपक रूई की बाती । सरसों का तेल भर दीया बाती।। मिटे अंधेरा […]

बस्सी पठाना पंजाब के पंडित विनय शास्त्री ‘ विनयचंद ‘ को काव्य रत्न और गोल्डेन बुक आॅफ वल्ड रेकार्ड से सम्मानित करते हुए डाॅ हरिसिंह पाल ने कहा कि एक साहित्यकार ब्रह्माजी होते हैं जो […]

अन्तर्राष्ट्रीय शब्द सृजन संस्थान गाजियावाद के तत्वावधान में आयोजित भारत रत्न विजेताओं के जीवन पर आधारित कालजयी ग्रंथ भारत के भारत -रत्न के भव्य लोकार्पण समारोह नई दिल्ली के हिन्दी भवन में विगत 15 मई […]

हे गुरुवर गुणशील आगारा। चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। तेरी कृपा ने चलना सिखाया। जीवन के अंधकार मिटाया।। अग जग में किया उजियारा। चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। १।। शिव विरंचि नारायण तुझ में। शब्द […]

लता-बेल -सी माता होती, होते पिता बटवृक्ष महान। ठंढी मीठी सघन छांव में पलते जिनके सब संतान।। देकर जन्म ब्रह्मा कहलाए पालन कर बिष्णु बन जाए। हरण करे अज्ञान तिमिर संहारक रुद्र रूप बड़ भाए।। […]

ऊँचाईयों के दौर में हर कोई ऊँचा उठना चाहे। विनयचंद इस दौर में आखिर पीछे रहते हो काहे।। कर्म करो ऊँचाई पाओ औरों को नाहीं गिराना तुम। जो गिरे हुए को उठाओगे कीर्ति यश वैभव […]

राम नाम रट मनवा मेरे जीवन सफल बना ले। नर देही न व्यर्थ गमाओ कुछ तो पुण्य कमा ले।। दुख दरिया है जीवन तेरा नित राम नाम तू गाले । अन्तकाल पछताओगे जब पड़ेंगे यम […]

यारों ! ये कैसा कहर हो गया। बंद खिड़कियों का शहर हो गया।। बाहर बीमारी, भीतर लाचारी देख आबोहवा भी जहर हो गया।। मुँह पे पट्टी चढ़ी, पेट में खलबली दवा संग दुआ भी बेअसर […]

प्रभु तुम्हारे चरणों में प्रातः वन्दन करता हूँ। जग का संकट दूर करो पीड़ित क्रन्दन करता हूँ।। व्याकुलता में सब जन तेरे कोरोना के मारे हैं। रक्षा करो करुणामय स्वामी पूत कपूत तुम्हारे हैं।।

सुबह का चाय बड़ा हीं मीठा । मीठी सोच विचार भी मीठा।। गमी खुशी से दूर कहीं कवियों का संसार भी मीठा। सुप्रभात विनयचंद आखे सावन का परिवार भी मीठा।।

गलियों को छोड़ हम इन्कलेभ में आ गए। छोटे छोटे घर आज महलों में छा गए।। दूर हो गए चाचे – ताए पड़ोसियों में छाया मतभेद। पाकर अकेलापन में बन्धु विनयचंद के मन में खेद।।

होड़ा होड़ी आज सड़क पर , कुत्तों को दूध पिलाने की। कचड़े खाती गाय बेचारी हाय, कैसी सोच जमाने की ।। राहु केतू के चक्कर में क्यों लक्ष्मी को ठुकराते हो । दूध दही घी […]

एक आँधी सी छाई चहुदिश बन दुश्मन द्वार कोरोना है। लाशें रो रही आज सड़क पर पीड़ित धरती का हर कोना है ।। विनयचंद एकांत में ले चल बीच भीड़ में क्योंकर रोना है। राम […]

निर्विरोध मास्क लगाना है। नहीं कोरोना से घबराना है।। अनावश्यक बाहर नहीं जाना है। घर में रहकर कोरोना को हराना है।। कोरोना भागेगा एक दिन ऐसा मन में रख विश्वास। बृक्षों लगा रे विनयचंद पाओगे […]

🕉️ नव संवत है विक्रमी, अतिपावन मधुमास। राक्षस नाम धराया, पर आनन्द की आस।। १।। नव किसलय तरुवर सजा, चहुदिश नव उल्लास। जनम मास है राम की, नौराता भी खास।। २।। घर घर रामायण पाठ,अरु […]

घड़ी तो घड़ी है साधारण हो या फिर असामान्य। पर समय बड़ा हीं होता जग में सदा से असामान्य।। टिक – टिक करती सूई वाली। अपने हीं चाल में चलने वाली।। डिजिटल घड़ी में अंकों […]

हाथ में रेखा रेखा में जीवन जीवनt रेखा हाथ में। पर है जीवन और मरन एक ईश्वर के हाथ में।। हाथ मिलाने से पहले सोच लो एक बार। वायरस और बैक्टीरिया है बीमारी के आधार।। […]

समन्दर की गहराइयों में उतर के देखो तो एक बार। बहुत से राज खुल जाएंगे जो छुपे हुए थे हरेक बार।। मोती भी हैं सीप भी प्यारे रत्नों का है बड़ा खजाना। उतरोगे तो पाओगे […]

ज़िन्दगी के सफर में कई हमराह मिलते हैं। कहीं पे वाह मिलते हैं कहीं पे आह मिलते हैं।। सफर में इश्क़ के कुछ विरले होते हैं जिन्हें आखिर में भी आकर मंजिल – ए- चाह […]

ज़िन्दगी के सफर में कई हमराह मिलते हैं। कहीं पे वाह मिलते हैं कहीं पे आह मिलते हैं।। सफर में इश्क़ के कुछ विरले होते हैं जिन्हें आखिर में भी आकर मंजिल – ए- चाह […]

जला दो नफ़रत की होलिका होली आई है खुशियाँ लेकर। मिटे अहंकार की सब बोलियाँ होली आई है खुशियाँ लेकर।। काले गोरे का भेद मिटाकर सबको एक रंग में रंग दे। नशा चढ़े एक प्रेम […]

मेरी गुड़िया रानी आखिर क्यों बैठी है गुमसुम होकर। हो उदास ये पूछ रहे हैं तेरे खिलौने कुछ कुछ रोकर।। कुछ खाओ और मुझे खिलाओ ‘चंदा मामा….’ गा-गाकर। तुम गाओ मैं नाचूँ संग- संग डम […]

वर स्वरुप में बमबम मालतीमालया युक्तं सद्रत्नमुकुटोज्ज्वलम्। सत्कण्ठाभरणं चारुवलयाङ्गदभूषितम्।। वह्निशौचेनातुलेन त्वतिसूक्ष्मेण चारुणा। अमूल्यवस्त्रयुग्मेन विचित्रेणातिराजितम्।। चन्दनागरुकस्तूरीचारुकुङ्कुमभूषितम्। रत्नदर्पणहस्तं च कज्जलोज्ज्वललोचनम्।। . भाषा भाव मालती बड़ माल शोभित,रत्न मुकुट बड़ चमचम। कंगन बाजूवन्द मनोहर,हार गला में दमदम।। अगर […]

दुलहिन गिरिजा माता सुचारुकबरीभारां चारुपत्रकशोभिताम्। कस्तूरीबिन्दुभिस्सार्धं सिन्दूरबिन्दुशोभिताम्।। रत्नेन्द्रसारहारेण वक्षसा सुविराजिताम्। रत्नकेयूरवलयां रत्नकङ्कणमण्डिताम्।। सद्रत्नकुण्डलाभ्यां च चारुगण्डस्थलोज्ज्वलाम्। मणिरत्नप्रभामुष्टिदन्तराविराजिताम्।। मधुबिम्बाधरोष्ठां च रत्नयावकसंयुताम्। रत्नदर्पणहस्तां च क्रीडापद्मविभूषिताम्।। भाषा भाव केशपाश कुसुमित सालि पत्र रचित बड़ सुन्दर। कस्तूरी सिन्दूर के टीका,भाल […]

आया है मधुमास मास माघी का पावन। नव किसलय तरु शोभित क्या उपवन क्या कानन।। फूलों की क्यारी सज गई सारी रंग-बिरंगे फूलों से। कोयल काली तरु की डाली झूले नित झूलों से।। पीली सरसों […]

सिया राम जी केॅ चरण हमरा मन में रमल। जे हम हेती करिया भौरा पुष्प पराग मुख भरल ।। चरण छुवि हम नित नित जनम कृतारथ करल। विनयचंद मानुष जनम नाम रटन हित धरल।।

आया माघ का महीना । लेकर खुशियाँ नवीणा। । संकटचौथ पहला त्यौहार। व्रत करे सब निर्जल धार।। गणपति जी की करे आराधन। माँ संकटा करे संकटनाशन। । दर्शन चन्द्र सदा सुखदाई । अर्घ सहित पूजन […]

पूस गया ठण्ढी गई छाया नव उल्लास। कर सेवन त्रिवेणी तू आया पावन मास।। आया पावन मास माघ अतिसुखकारी। स्नान ध्यान पूजन कथा करे अपहारी।। कथा करे अघहारी विनयचंद नाम जपा कर। पा मानव तन […]

तीन छात्र थे केवल कक्षा में। आ बैठ गए तीनों परीक्षा में।। प्रथम श्रेणी में पास किया एक दूजा द्वितीय दर्जे को पाया। तीजा तेतीस फीसदी लाकर तीजे दर्जे तीजे स्थान पे आया।। अफसोस कि […]

टन- टन टन- टन करते वो फेरीवाला आता था। गदा के जैसे डब्बा अपने काँधे पर ले आता था।। सिर पे टोपी गले में गमछा नाक पे ऐनक बड भाता था। बम्बई मिठाय,,लड़का सब खाय […]

हमर देशक सिपाही हमर शान छै। देशक रक्षा में जिनकर प्राण छै।। नञ भोजन केॅ कोनो फिकीर छै। नञ छाजन केॅ कोनो फिकीर छै।। जाड़ गरमी तऽ एकहि समान छै। हमर देशक सिपाही हमर शान […]

खुशियाँ अपार है प्यार का त्योहार है। वेहरे बीच आग जली लोहड़ी की बहार है।। गैया का गोबर पाथ-पाथ पाथी लिया बनाय। सुक्खा लक्कड़ काट-काट लोहड़ी लिया सजाय ।। घच्चक मूंगफली रेवड़ी संग खिल्लां का […]

ठंढी का मौसम आया है। संग मेरा मान बढ़ाया है ।। पुलकित होकर कहता चाय। बार – बार सब मांगते चाय।। कभी खुशी कम हो जाती है। जब बीच पकौड़ी आ जाती है।। झुंझला के […]

अमृत बेला है अतिपावन। उठो रे तू छोड़ विभावन।। हरि का सुमिरन कर लो रे। सैर करो तू सुबह -सबेरे।। शीतल मंद हवा सुखदाई। योग प्रणायाम करो रे भाई।। तन -मन को निर्मल कर लो। […]

एक निर्जीव -सी मोटर गाड़ी । शानो शौकत की बनी सवारी।। ये भी मांगे तेल और पानी। घिस गए पुर्जे हुई पुरानी।। अपने जैसा वंदा अखीर। खीचे रिक्शा लगा शरीर ।। एक अकेला खींच रहा […]

आखिर हिन्दी का विकास कैसे हो, एक विचारणीय विषय है। हिन्दी दिवस पर अपने मित्रों एवं सहकर्मियों को बधाई देकर एक औपचारिकता पूर्ण करने मात्र से क्या हिन्दी का विकास हो जाएगा। पूरे सप्ताह भर […]

जाड़ा का मौसम बड़ा सुहाना। भाँति -भाँति के बनते खाना।। गाजर का हलुआ सबको प्यारा। खाओ मूंगफली भगाओ जाड़ा।। गाजर शलग़म मूली का अचार। बड़े स्वाद लेकर खाए सब यार।। आंवले को खा पानी पीना। […]

आओ बच्चों तुम्हें सिखाए कविता लिखने की कला। कुछ शब्दों को ध्यान में रखो मिल जायेगी काव्य कला।। कल खल गल घल -घल घल । चल छल जल झल -झल झल।। डल ढल डल टल […]