Pt, vinay shastri 'vinaychand', Author at Saavan's Posts

विनती

कहर कोरोना का छाया है देखो आज संसार में। त्राहि त्राहि कर रही है दुनिया आओ प्रभु अवतार में।। रक्तबीज का रक्त धरा पर टपक दैत्य बन उत्पात किया। कतरा कतरा पीकर काली दुष्ट दैत्य का घात किया।। वही वक्त है आया माता जग की रक्षा फिर आज करो। ‘विनयचंद ‘की विनती माता सुनो जगत में फिर फिर राज करो।। »

कोरोना मार भगाना है

कुछ दिन रहेंगे घर में आइशोलेट। नहीं करेंगे बाहरी दुनिया से हम भेंट।। मुख पर मास्क हाथ दस्ताना। फिर भी नहीं कोई हाथ मिलाना। धोओ हाथ करो सेनेटाईजर। हल्दी तुलसी सेवो अक्सर।। सूझबूझ और धैर्य से रहकर खुद को कोरोना से बचाना है। अपने संग-संग निज समाज महामारी मुक्त बनाना है।। स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र दुनिया सुखी बनाना है। ‘विनयचंद ‘सब मिलकर मित्रों कोरोना मार भगाना। है »

प्रार्थना

घऽरे में रहबय कतेक दिन पिया ई कोरोना कें डऽर सॅ। बाल बच्चा सुरक्षित रहथि सदा तेॅ न निकसब घऽर सॅ।। भुक्खल नेना भुक्खल हमसब जीबय कतेक दिन। अमृत समान दूध पानि सॅ काटब कुछेक दिन।। कतेक दिन ई दूध पानि सॅ जीवन बचायब। जहिया धरि मैया सॅ शक्ति हम पायब।। आय मन्दिरो में 🔐 लगेलक पिया ई शरधुआ कोरोना। आपदा काल मंदिर में मैया कहाँ। आय दिल सॅ बजाबू तनिका अहाँ।। बनिकय भौरा भवानी भूपर एती। साग बनिकय सकल कष्ट हरती।।... »

तड़ीपार हो गए

हाय कोरोना हम खबरदार हो गए। लो अपने हीं घर में तड़ीपार हो गए।। »

जीवन सोना

घर के बाहर मत जाना कोरोना मिल जाएगा। घर के भीतर बन्द रहो जीवन सोना मिल जाएगा।। »

कोरोना का, सौगात

बाहर जाकर कोरोना का सौगात नहीं तुम लाना। बेशक आधा पेट हीं खाकर घर में तुम सो जाना।। खाना आधा पेट से प्राण चले नहीं जाऐंगे तेरे। अपना और अपने की जान सुरक्षित रहेंगे तेरे।। »

जीवन के आगोश में

निज गृह भीतर बन्द रहो मन जीवन के आगोश में। कहर कोरोना का छाया है वरना रहोगे अफसोस में।। »

जल हीं जीवन है

जल हीं जीवन है जल को ना बर्बाद करो। जीवन का आधार है जल को ना बर्बाद करो।। जल बिन मछली तड़पेगी धान पान सब कहाँ रहेंगे। नदी तालाब और कुआँ बिन स्नान ध्यान फिर कहाँ रहेंगे।। कतरा कतरा कर संरक्षण जीवन को आबाद करो। जल हीं जीवन है जल को ना बर्बाद करो।। »

सत्य सूर्य

चमक उठा जब चांद गगन में कोटि सितारे टीम -टीम रह गए। सूरज के आने से पहले हीं सब के सब ये मद्धिम रह गए।। लाख हौसला हो जुगनू में अन्धकार कब मिटा सका है। छल का बादल प्रेम जगत में सत्य सूर्य कब मिटा सका है।। प्रेमी बनकर ‘विनयचंद ‘तू प्रेम का नित संचार करो। मानव जीवन को पाकर जीवन को साकार करो।। »

कैरोना भगाऐंगें

ये कैरोना कहाँ से है आया बलम। मौत बनके जगत में है छाया बलम।। जूठ खान-पान से पनपे ये बिमारी सनम। अशुद्धि में पले -बढ़े है ये बिमारी सनम।। ना जूठा खाऐंगे ना जूठा पीऐंगें। शुद्धी में रहेंगे शुद्धी में जीऐंगें।। कैरोना भगाऐंगें सुखी दुनिया बनाऐंगे।। शाकाहार खाना पिया दारू मत पीना पिया। हाथ धोकर सदा स्वस्थ ताउम्र जीना पिया।। कैरोना भगाऐंगें सुखी जीवन बनाऐंगे। »

खोज गूलर के फूल के

वन-वन भटका खोज में, गूलर के फूल के। आखिर खोज न पाया मैं सिवा एक उसूल के।। फूल नहीं होता इसमें होते केवल फल अगणित। बिन फूलों के फल कहाँ से बोलो आए अगणित।। जैसे पानी बर्फ के रुप वैसे गूलर के फूल अनूप। “विनयचंद “न जान सके मायापति के खेल अनूप।। »

तमन्ना है यही मेरी

मैं बनूँ फूल बगिया का तमन्ना है यही है मेरी। भला हो मुझसे जगिया का तमन्ना है यही मेरी।। बीच झाड़ी लताओं के लाल पीले गुलाबी -सा। हरे उपवन की हरियाली में मस्त झूमूँ शराबी-सा।। मिले काँटे या कोमलता रहूँ हर हाल में हँसता। रहूँ खुशबू में तर होकर इतर बाँटू मैं नित सस्ता।। »

प्रकृति का सिंगार

देखो रितुराज ने अपने हाथों कैसे प्रकृति का सिंगार किया। रंग बिरंगे फूलों से कुदरत का रूप सँवार दिया।। हार गले में गेन्दा के और कर कंगन कचनार दिया। बेली चमेली जूही के बालों में गजरा सँवार दिया।। गुल- ए-गुलाब सुंदर -सा बेणी मूल में गाड़ दिया। केशर का रंग लबों पे संग कर्णफूल गुलनार दिया। कली लवंग नकबेसर अलसी अंजन दृग धार दिया।। मोर पंख कोयल का रूप तन गुदना से छाड़ दिया। ‘विनयचंद ‘ मधुमास ... »

भारत माँ का औलाद

लौहपुरुष नहीं मैं फिर भी फौलाद हूँ। आखिर भारत माँ का जो औलाद हूँ।। »

अँखियों की होली

अँखियों का रंग अँखियों में जो डाल दिया। फिर क्योंकर हाथ गुलाल लिया »

रंग जाऐंगे

आशा रख वावरी ! वो आऐंगे। तेरे तन मन को रंग जाऐंगे।। »

रंगीन सरोवर

जो लेके आओगे तू बाल्टी मैं भी रखूँगा सरोवर तैयार। रंगों से नहाएंगे साथ साथ यार।। »

रंगों की बाल्टी

रंगों की बाल्टी और गुलालों की झोली। लेके आऐंगे तेरे घर ,मनाने हम होली।। »

तिलक होली

तिलक पसन्द होली है अपनी आकर तिलक लगा देना। प्रेम पर्व होली है इसको प्यार से सब मना लेना।। »

उड़ गई वरदान की चादर

बाल हत्या का ले के विचार ‘ हो गई अग्नि में होलिका सवार। उड़ गई वरदान की चादर अजर रहा बालक प्रह्लाद जल गई होलिका हो तार तार।। »

नफरत भरे की होलिका

नफरत भरे मन की होलिका न जलाई। तो तुमने क्या खाक होली मनाई।। »

होलिका जल गई

जल गई होलिका धू धू करके कैसे आज चौक में। ऐसे हीं जलते हैं दुष्ट भक्त जलाने के शौक में।। »

होली हम मनाऐंगे

होलिका दहन में हम वैर भाव जाएंगे। कल निर्मल हृदय से होली हम मनाऐंगे।। »

नारी तेरे मान को

नारी तेरे मान को आखिर जग क्या लिखेगा? कलम भी तू है काॅपी भी तू है। सरस शब्द कविता भी तू है।। तू वाणी विद्या बद्धि की सरिता सम किताब है तू। तू हीं शारदे तू हीं कालिका हरिप्रिया की प्रभाव है तू।। तूने हीं दी है ‘विनयचंद के जान को। आखिर जग क्या लिखेगा नारी के सम्मान को।। »

नारी का तू कर सम्मान

मातृशक्ति को समर्पित नारी का तू कर सम्मान। नारि बिना ये जगत मशान।। नारि है विद्या नारि है बुद्धि धन दौलत की नारि है खान।। नारी का सब कर सम्मान। नारि बिना ये जगत मशान।। »

आई सुहानी होली

देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।। कण-कण में नया उल्लास है। आज धरती बनी रे खास है।। लाओ रंगों की भर-भर झोली। सब मिलकर हम खलेंगे होली।। देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।। नहीं काला रहे नहीं गोरा रहे। लाल पीले हरे छोरी छोरा रहे।। आज कोयल भी बनीं हंसोली। सब मस्ती में मस्त नव टोली।। देखो आई सुहानी होली। कैसी रंगों की रंगी रंगोली।। न कोई राजा रहा न कोई रानी रही। सिर्फ खुशिया... »

होली में यार

कहीं पिचकारी का धार कहीं रंगे गुलाल। कहीं फूलों की होली कहीं हुरदंगे धमाल।। कहीं होली लठमार फिर भी प्यार का त्योहार। प्यार हीं प्यार ।। होली में यार।। »

नसीहत

राम कह लो या कह लो तू श्याम। जब तक मन शांत नहीं तेरा सुन वावरे ना हीं सुख ना हीं शांति ना हीं मिलेगा आराम।। »

होली आई

रंगों का त्योहार मनोहर होली आई होली आई। प्रेम प्रसून के गुलदता ले होली आई होली आई ।। दया का पानी प्रेम के रंग को दिल दरिया में घोलो रे। मधुर मनोरम मस्त मिठाई भर भर थैली खोलो रे।। ‘विनयचंद ‘ के मन मंदिर में मस्ती की एक टोली आई।। होली आई होली आई।। »

खुशियों का त्यौहार

खुशियों का त्यौहार है होली प्यार से मनाऐंगे। दोस्त तो आखिर दोस्त है दुश्मन को भी गले लगाऐंगे।। »

होली का त्यौहार

रंग बरसे गगन से देख मेरे यार। आओ मिलकर मनाऐं होली का त्यौहार।। »

होली में

होली में होगी ना अबकी हुरदंग। ना पानी ना कीचड़ ना दारु ना भंग खुशियाँ हीं खुशियाँ प्यार का रंग ।। »

हिन्दी गजल

गम के आँसू सदा हीं बरसता रहा। मेरा जीवन खुशी को तरसता रहा।। मैंने मांगा था कोई ना सोने का घर प्यार की झोपड़ी को तरसता रहा। ना तुम्हारा रहा ना हमारा रहा गेन्द-सा दिल हमेशा उछलता रहा।। गैर की है दुनिया में तेरी खुशी ,फिर तेरा मन मेरे मन को काहे लपकता रहा। जरा बचके निकलना ‘विनयचंद ‘यहाँ प्यार की राह अश्कों से धधकता रहा।। »

हम भारत हैं

“सारे जहाँ से अच्छा “जो कह दे वो इकबाल कहाँ से लाऊँ? “हिन्दोस्तां हमारा ” कह दे वो इकबाल कहाँ से लाऊँ? अपने देश को अपना कहो तो आखिर क्या घट जाएगा? ध्वजा तिरंगा के खातिर अपना शीश कट जाएगा। छाती ठोक कहने वाला “आजाद”लाल कहाँ से लाऊँ? कोई हिन्दू बन लड़ता है कोई मुस्लिम का सरदार। सिक्ख ईसाई दलित बना सब कोई बाभन का अवतार।। “हिन्दी हैं हम” कहने वाला वो इकबा... »

खेल रंग वाला

सजनी है गौर और सजना क्यों काला? आओ हम खेलें खेल रंग रंग वाला। लाल से रंग दो हरे से रंग दो। नीला और पीला गुलाबी से रंग दो। रंग डालो अज बेनीआहपीनाला। आओ हम खेलें खेल रंग वाला।। तन को रंगो सब दिलवर के रंग से। मन को रंगो आज प्रेम के रंग से।। विनयचंद मिटा दे भाव नफरत वाला। आओ हम खेलें खेल रंग वाला।। »

फाग

सुमधुर ध्वनि मुखरित है होली के राग का। लो आ गया भैया महीना रंग बिरंगी फाग का।। धरती भी रंगीन है अम्बर भी रंगीन है। नवल कुसुम संग पत्र नवल है सुरभित जगत नवीन है।। नफरत की होलिका जला विनयचंद प्रेम प्रज्वलित आग का।। »

फजल

उलझन भड़ी ज़िन्दगी को सरल लिख रहा हूँ। तुम्हारे प्यार को ज़ुबान -ए-गजल लिख रहा हूँ।। एक गुनगुनाहट भड़ी आवाज़ देकर ऐ प्रीतम तेरी वफाओं के दास्तान -ए-फजल लिख रहा हूँ।। »

विनती

मुझको भजन की लगन लगादे मुरारी। नाम गाऊँ मैं हर पल तुम्हारी।। »

भजन की लगन

मैं करूँ मैं करूँ प्रभु तेरा भजन। भर दे भर दे प्रभु मुझमें इतनी लगन।। »

दीप जलाओ शहीदों के नाम

एक दीप तो जला ‘विनयचंद ‘ मजार- ए-शहीद पे। देश गुनुनाएगा तेरे लिए नगमा हमीद के।। »

गुल -ए-गुलाब कहता है

गुल -ए-गुलाब कहता है इतना हमसे ओ प्रीतम मजार -ए-शहीद पर चढ़ा देना। खुशबूओं से,सराबोर कर दूँगा तुझको जरा मेरा भी मान बढ़ा देना।। »

वीरों का वेलेंटाइन

किसी की माशूक किसी की मंगेतर। किसी की नवोढ़ा किसी के प्रियवर।। मन का तार जोड़ के बैठी प्रिये तुम कब आओगे? वेलेंटाइन आ गया प्रिये तुम कब आओगे? भारत माँ के वीर सिपाही हमको शरहद प्यारी है। दिया गुलाब धरती ने पहले जिसका दिल आभारी है।। रक्त कुसुम ले माँ भारत को आखिर कब प्रपोज करोगे? दिल से निकलकर दुनिया में आखिर कब तुम छाओगे? ‘विनयचंद ‘ हम वीर युवा के इससे बड़ा क्या वेलेंटाइन होगा? »

दिल के जख्म

कुछ जख्म दिखाए जा नहीं सकते। घायल किया जिसको तुमने दिल चीर दिखाए जा नहीं सकते।। »

इश्क़

इश्क़ यदि मासूम है तो बगावत क्यों होती है। ः मतलबपरस्त है तो इनायत क्यों होती है।। »

मासूमियत

मेरी मासूमियत को हथियार मत बनाना। दिल में दगा रखकर प्यार मत बनाना।। मैं तो खाके धोखा खामोश रह जाउँगा खुद को बेबफाओं का सरदार मत बनाना।। »

वरद हाथ

झर झर नीर झरे नैनन से बीच हथेली रख मुखरे को। बिलख बिहारी विनती करते वो कैसे सहेगी इस दुखरे को।। देर भयो ग्वारन संग खेलत भूखा प्यासा लाल तुम्हारो। फिर भी मैया मारन चाहे पकड़ हथेली मुझको मारो।। चोट लगे केवल माँ मुझको छाले दाग न लगे हाथ को। विनयचंद ‘ कभी पीड़ न आवे आरतहर के वरद हाथ को।। »

कान्हा के मुख कान्हा

कान्हा तूने माटी खाई डाँट के बोली मैया। ना ना कह शीश हिलाया नटखट बाल कन्हैया।। छड़ी दिखाकर मैया बोली मूंह तो खोलो कान्हा। मुख में सारा विश्व दिखाया कन्हा मुख में कान्हा।। मायापति की माया में मैया बेहोश पड़ी थी। दूर हुई कान्हा की माया मैया स्वस्थ खड़ी थी।। विनयचंद ऐसे मायापति का निश दिन ध्यान धड़ो रे। जीवन को न माया ठगेगी अपना कल्याण करो रे।। »

मर्यादा

मनमौजी बनकर चलना ये कैसी आजादी है। बिन मर्यादा के जीना जीवन की बर्बादी है।। अनुशासन न कोई बंधन है न तुम पर कोई थोप रहा। एक सफलता की कुंजी है सुख सम्पदा सौंप रहा।। विनयचंद मर्यादित रह नर हो अथवा कोई नारी। गुरु शिष्य और पुत्र पिता सुख पावे नित चारी।। »

दिल

किसी ने पत्ता कहा पीपल का किसी ने पान पत्र समरूप कहा। किसी ने मुट्ठी जैसा दिल माना तो कर लो दुनिया मुट्ठी में। »

आँचल

यूँ तो मूँह बांधकर घुमा करती हूँ डगर-डगर। पर सिर पे आँचल रखने से जी घबराता क्योंकर।। »

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