Pt, vinay shastri 'vinaychand', Author at Saavan's Posts

वक्त

वक्त भी एक शिक्षक है जो देता सच्ची शिक्षा। वक्त का सम्मान किया जो नहीं मांगेगा कभी भिक्षा।। »

हम तुमसे दफा नहीं होते

प्यारे कभी बेवफा नहीं होते। अपने कभी खपा नहीं होते। ऐ वक्त हमसे खपा मत होना क्योंकि हम तुमसे दफा नहीं होते।। »

दुनिया का बरताव

कौन है शोषित कौन है शोषक कैसे फर्क करोगे? स्वर्ग द्वार भारत को कैसे नर्क कहोगे? बस में सफर करते हुए यही बात मैं सोच रहा था। भरे सीट थे सारे उसके फिर भी सवारी कोंच रहा था।। खड़ गई आके मेरे बाजू में एक संभ्रात -सी महिला। सामानोंऔर बच्चों के संग अस्त-व्यस्त थी महिला।। मैंने अपनी सीट दे दी खुद खड़ा होकर। हुई खाली बाजू की सीट बच्चे बैठाई सोकर।। अगले स्टोपेज आकर चढ़ गई मेरे एक रिश्तेदार। मैंने कहा मैडमज... »

चंदन तुम सर्प लपेटे रहते हो

चंदन ! तुम सर्प लपेटे रहते हो। तुम शीतल हो तुम निर्मल हो, खुशबू तेरे भीतर है। वैर नहीं है तुम्हें किसी से हृदय बड़ा पवितर है।। मलयाचल पर बने तपस्वी दूर अकेले रहते हो। चंदन ! तुम सर्प लपेटे रहते हो।। एक शंकर कैलाश के वासी सर्पों के मालाधारी हैं। जहर हलाहल पीकर शंभु अभयंकर त्रिपुरारी हैं।। नीलकंठ का नीलापन तुम भी तो ठक सकते हो। चंदन ! तुम सर्प लपेटे रहते हो।। कैलाश शिखर पर जिनका वंदन। वो तो हैं प्रभ... »

वियोग

नब्ज देख के बतला दो मुझे कौन-सा रोग है। दिल में तुझे बसाकर भी आखिर क्यों वियोग है।। »

गीत

कोना पठाएब सनेश। पिया मोर नञ जाऊ विदेश।। चिट्ठी लिखब कोना छी हम असमर्थ। फोनक खंभा ठार बनल छै बेअर्थ।। मोबाइलक नेटवर्क रहय अछि नञ लेश। पिया मोर नञ जाऊ विदेश।। कौवा कबूतर केॅ डाकिया बनाएब। बैरंग चिट्ठी हम फोकट में पाएब।। सुग्गा कोयली बनि अप्पन भेंट विशेष। धनी मोर करू जय गणेश। पिया मोर नञ जाऊ विदेश।। »

एकता का मोल

पानी और दूध की दोस्ती है अनमोल। “विनयचंद “ये साथ हो बिके एक हीं मोल।। »

दूध और पानी

पानी और दूध का एक नहीं रंग रूप। आकर दोनों साथ में बन जाये समरूप।। »

चंदन

काट दो कुल्हाड़ी से फिर भी खुशबू हीं दूँगा। मैं तो मलयाचल का चंदन हूँ कुछ भी दाम नहीं लूँगा।। »

ट्वेंटी ट्वेंटी

दिल से स्वागत करो सभी साल ट्वेंटी ट्वेंटी का। बीत गए वो दिन बन्धुओं किसी के फोर ट्वेंटी का।। »

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