पृथ्वी दिवस(पृथ्वी की पुकार)

आज यह धरती माता,कर रही हम सब से यह पुकार है।
मुझसे जन्मा अस्तित्व तेरा,और मुझसे ही यह संसार है।।
मत करो क्षरण प्राकृतिक संसाधनों का,
रोपो सब मिलकर वृक्ष कई रोशन होगा सबका कुनबा,
चहुंओर बिछेगी हरियाली,
नदियां देंगी स्वर् कल कल का,
चरणों में अमिता करती वंदन हर क्षण मां तेरा आभार है।
तुझसे जन्मा अस्तित्व मेरा और तुझसे ही यह संसार है।।

Comments

19 responses to “पृथ्वी दिवस(पृथ्वी की पुकार)”

  1. अति उत्तम,🙏🏻🙏🏻

  2. Fabulous poem..it should be go on top..

  3. 👌🙏🌹🌹
    बहुत सुन्दररचना

  4. Ankita Patel

    Sundr rchna👌

    1. Divyanshi Gupta

      Beautiful❤️🙏🙏

  5. Purushottam Lal

    Bahut. Sunder. Rachna🙏🙏

  6. Garima Gupta

    मानव का आस्तित्व ही धरती से है । बहुत ही सुंदर रचना है । 🙏

    1. shashi agrahari

      Amazing and beautifully presented with a great thought👌🏻

  7. Bhoomi Bhardwaj

    💫👍👍

    1. Pragya Shukla

      👌👌

  8. shobha verma

    धरती मां के चरणों में अमिता की अप्रतिम रचना।
    बधाई हो और सदैव ऐसे ही लिखती रहो।

  9. Divya Singh

    Beautiful poem ☺️

    1. richa singh

      Awesome 👍👍

  10. Umam Fatima

    👍🏻👍🏻

  11. Arpit Gupta

    आज यह धरती माता कर रही सबसे पुकार है,
    मुझ से जन्मा अस्तित्व तेरा मुझसे ही यह संसार है,
    धरती माता का आभार प्रकट करते हुए बहुत सुंदर रचना

  12. Amita Gupta

    उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु आप सभी का सादर धन्यवाद ।।

  13. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह बहुत खूब

  14. vikash kumar

    Great

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