इतना करना आज तू, उम्मीदें मत छोड़,
टूटन में भी टूट मत, ले आ नूतन मोड़,
ले आ नूतन मोड़, स्वयं के जीवन मे तू,
नहीं हताशा रखूं, ठान ले अब मन में तू,
कहे लेखनी लगे, आग अब घी हो जितना,
खूब हौसला रहे, ताप उग जाये इतना
टूटन में भी टूट मत(छन्दबद्ध)
Comments
3 responses to “टूटन में भी टूट मत(छन्दबद्ध)”
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उम्मीद पर ही दुनिया कायम है,
प्रेरणादाई पंक्तियां सतीश जी -
पाठक को प्रोत्साहन देती हुई छंद बद्ध शैली में कवि सतीश जी की बहुत श्रेष्ठ रचना, उच्च स्तरीय लेखन, वाह! लाजवाब
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बहुत खूब
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