होगा वही, जो लिखा है उसने
व्यर्थ में क्यूँ रोना?
जब चलना है अकेले ।।1।।
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ना तुम किसी के हो
ना तुम्हारा कोई है
सब माया का खेल है
हर इंसान खूद में अकेला है ।।2।।
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तुम सदा खुश ही हो
दुख तुम्हें छू नहीं सकता
क्लेश तो मन की अस्थिरता है
आत्मा तो सदा से मुक्त ही है ।।3।।
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हाँ सब कर्मों का फल है
आज का चोर, कल का साधु है
इंसान इतना नजदीक होके भी
खूद से इतना दूर है ।।4।।
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मर्म जानना प्रसन्नता का कारण है
शास्त्रों का सिर्फ रटना व्यर्थ है
जब-तक शास्त्रों की बातों पे अमल ना हो
तब-तक मानव-जीवन बेकार है ।।5।।
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विकास कुमार
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