(3) दूसरों के घाव देखने वाले कभी अपने घाव नहीं भर पाते।।1।। वर्तमान हि सब – कुछ हैं भूत वासना का घर और भविष्य चिन्ता का जंगम हैं ।।2।। जो आंतरिक दुश्मन से लड़ते हैं […]

(3) दूसरों के घाव देखने वाले कभी अपने घाव नहीं भर पाते।।1।। वर्तमान हि सब – कुछ हैं भूत वासना का घर और भविष्य चिन्ता का जंगम हैं ।।2।। जो आंतरिक दुश्मन से लड़ते हैं […]

(2) लिखने मात्र से कुछ न होगा उसपे चलना तुम्हारी कवित्व को निखारेगा।।1।। सारी कृतियां समय व प्रस्तिथि कि देन हैं लोग अहम् – भाव के कारण अपना समझ बैठे हैं ।।2।। एक से अनेक […]

कीचड में ही कमल खिलता हैं, लेकिन ऊपर नीचे नहीं ..1.. बिषयाशक्त पुरुष खुश रह नहीं सकता और निराशक्त को दु:ख छू नहीं सकता ..2.. इंद्रियों का रुख , यदि सात्विक हैं। तो पूरी कि […]

सर्वदा होश की अवस्था हैं ब्रह्मचर्य विषयों से अनासक्त का नाम हैं ब्रह्मचर्य पूर्व संस्कार का पूर्ण रुपेण त्याग हैं ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य कुछ भी नहीं :_ निज मूल स्थिति का नाम हैं ब्रह्मचर्य ।।१।। +++++++++++++++++++++++++++++ […]

सर्वदा होश की अवस्था हैं ब्रह्मचर्य विषयों से अनासक्त का नाम हैं ब्रह्मचर्य पूर्व संस्कार का पूर्ण रुपेण त्याग हैं ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य कुछ भी नहीं :_ निज मूल स्थिति का नाम हैं ब्रह्मचर्य ।।१।। +++++++++++++++++++++++++++++ […]

वासना छोड़े घर मिटे मन कि विकार पूर्व-संस्कार न सताए ऐसा हो होली का त्यौहार ।।1।। जले अगर अग्नि में तो क्रोध व काम पियो वैसी शराब जिसकी नशा न उतरे जिंदगी भर रंगों मन […]

दे ज्ञान हमें मा भारती भर दे झोली इतनी सी हैं आरजू . काया का ना हमें ध्यान इतना हो माँ हमपे मेहरबान . पूर्व संस्कार सब मिटा दें मातेश्वरी दे ज्ञान हमें माँ भारती […]

गुजरते वक्त के साथ जिंदगी भी बीत जाएगी । अगर नहीं सुधारोगे खुद को तो एक दिन मौत आ जाएगी ।।1।। ++++++++++++++++++++ मौत सत्य हैं आएगी जरूर । पर गले वहीं लगाएगा जो हैं खुद […]

खेल तो सब खेल सकता है । मगर ब्रह्मचारी कोई विरला ही हो सकता है ।। ब्रह्मचारी का मतलब ये नहीं कि वो शादी ना करें । बल्कि ब्रह्मचारी का मतलब ये हैःकि वो इन्द्रियों […]

साधक ब्रह्मचर्य का योगी कहलाता है । वह एक-ना-एक दिन खूद को जान लेता है हम कामी पुरूष सच में बहुत रोते है आखिर हम भी अंत में ब्रह्मचर्य ही अपनाते है ।।1।। ————————————————————– किसी […]

संकल्प हमारी पहचान है फिसलन विषयों में अब-तक राग है उठना ही जिन्दगी है गिरना शोभा तुम्हें देता नहीं है ।। —————————————- उठने में परम आनंद है विषयानुराग मौत-ही मौत है जिन्दगी द्वार खड़ी है, […]

हमें कहने का अधिकार नहीं कि हमने कुछ लिखा है . ————————– क्योंकि जो आप है, वहीं हम है . जो हम है, वहीं आप है. ———————- जो सब है, वो एक है जो एक […]

तेरा कोई भी नहीं है जहां में तु आया है अकेले तु जायेगा अकेले तेरा कोई भी नहीं है जहां में ।।1।। —————————————– ये रिश्ते, ये नाते, ये तेरे, ये मेरे ये कैसा है नर, […]

होगा वही, जो लिखा है उसने व्यर्थ में क्यूँ रोना? जब चलना है अकेले ।।1।। ——————————– ना तुम किसी के हो ना तुम्हारा कोई है सब माया का खेल है हर इंसान खूद में अकेला […]

जय श्री सीताराम —————————— आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है झूठ गिराता, सच उठाता पूर्ववत् कर्म नर को बहकाता पर दृढ़-संकल्प ही नर को बचाता ——————————————— आज-न कल सबको सच की डोर […]

चंद दिनों का मेहमान यहाँ सब फिर जाना है सबको उसके दर आज किसी की बारी है, कल और किसी को जाना है, परसो अपनी बारी है .. ———————————– चंद दिनों का मेहमान यहाँ सब […]

जय श्री सीताराम ——————— दुनिया लूटी अपनी करतुत से मैं लूटा अपनी विचार से कोई लूटे तो लूटे, अपनी करतूत से पर कोई ना लूटे, अपनी संस्कार से ।। (प्रवाह) —————————————- सब खेले होली खुद […]

जय श्री सीताराम ———————— जीना जरूरी है, मरना कायरों का काम है . प्रण का टूटना स्वाभाविक है, फिर भी उठना वीरों का काम है .।।1।। ————————————————- आलस मन और सुस्त तन उसका है, जिसने […]

दुख की बदली छाई है मेरे सर पे सुख की चाह करता नहीं रब मैं तुम से तु चाहे जैसे रख ले, अपनी शरण में मैं वैसे रह लूँ, तेरी शरण में ——————————————– मेरे मालिक, […]

बना दो बिगड़ी सबकी मेरे सरकार सब सर नवाते हैं, तेरे दर पर मेरे राम कोई तुझसे क्या माँगे, तुम किसी को क्या देते हो राम जो देते हो तुम वो दुनिया नहीं देते है […]

बदनामी का भय, न मान-हानि का डर . वहीं है जग में सबसे ज्यादा प्रसन्न ।।1।। —————————————————— मन-माया से उपर है ब्रह्म । नर ही नारायण है, जब नर को ना हो मन-माया से डर […]

किये पे रोना ही पड़ेगा मायूस मन नीचे गिरायेगा ही, झूठ का साथ देना है आसान पर मुश्किल घड़ी में सच ही आयेगा काम ।।1।। ——————————————————— क्यूँ करते हो गलत काम जब सच ही आयेंगे […]

ऐसी रंग में खोयेंगे, अबकी बार होली में । जहां-की-सारी – की – सारी कोशिशें नाकाम होगी, हमें बेरंग करने में । जहां को ढ़ालेंगे, हम अपनी रंगों में । वो लाख कोशिश करेंगे, हम […]

रंग नही हैं अब क्या जमाने में कि लोग बेरंग हो गये जहां में ———————————- हाँ रंग ही नही, सब कुछ है जहां में फिर क्यूँ लोग भटक रहे है, मन के अँधियारों में ————————————————- […]

तन है चोला मिट्टी का, वस्त्र तेरे कोई शान नहीं । मिट्टी में मिट्टी मिल जायेंगे , वस्त्र तेरे उतार लिये जायेंगे । कर लो सदुपयोग नर तन का, यहीं तो काम आवेंगे ।। ————————————— […]

जय श्री सीताराम ————————— सब पे कृपा करते हैं राम सबका जीवन सँवारते हैं राम जिसका न कोई संगी न साथी उसका सहायक है राम ।।1।। ———————————- जगत का आधार हैं राम सृष्टि के कण-कण […]

मेरे राम इतना तु कर दे मुझ पे एहसान कि तेरा नाम जपूँ मैं बार-बार ।।2।। ———————————————- मेरे राम इतना तु कर दे मुझ पे एहसान कि तेरा नाम जपूँ मैं बार-बार ।।1।। ———————————————— तेरे […]

जो सुख है ब्रह्मचर्य में, वो सुख नहीं है, दुनिया के झमेले में । ——————————— रीढ़ की हड्डी टूट जाती, बुढ़ापा आने से पहले . कमर की पसलिया कहती रे मूरख कामी लाठी पकड़ ले […]

जब तेरा सानिध्य मुझे मिल ही रहा है राम तो क्यूँ जाये हम दुसरों के द्वार — 2 —————————————— जब तेरा सानिध्य मुझे मिल ही रहा है राम तो क्यूँ जाये हम दुसरों के द्वार […]

किसका गुमान हैं तुम्हें क्या जायेंगे संग तेरे -2 ——————————– किसका गुमान हैं तुम्हें क्या जायेंगे संग तेरे ।।1।। ——————————— जो कमाया है तु मर-मर के वो चुकाना पड़ेगा, तुम्हें रो-रो के एक-एक वक्त, एक-एक […]

सौ दीप जला लो मंदिरों में चाहे हजारे दीये जल तेरे आँगन में जब तक मन की तम ना होंगे दूर तब-तक है तेरे सारे दीये की रौनक सून ।। ———————————————- एक दीप जलाओ ऐसा […]

करो परिश्रम कठिनाई से, जब तक पास तुम्हारे तन है । लहरों से तुम हार मत मानो, ये बात सीखो त जब मँक्षियारा नाव चलाता, विचलित नहीं होता वह विपरित धाराओं से । लाख सुनामी […]

इतना अच्छा या बुरा नहीं हूँ, जितना कि दुनिया कहती है । मैं कैसा हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।। ———————————————– मैं खूद के सवालों के कठघड़े में सदा खड़ा रहता हूँ […]

प्रकृति की शोभा से बढ़के कोई शोभा न होता रब तेरे जैसा यार जहां में कोई ना होता ।। ————————————————– हरिश्चन्द्र की शोभा, तु सत्य बनके आया राम बनके तुमने, सुग्रीव को उबारा सुदामा की […]

मेरा कुछ भी नहीं है, मुझमें राम सब-कुछ तेरा ही तेरा है राम बस देना साथ हमें सदा राम हम हैं तुम्हारे, तुम हो हमारे राम ।।1।। ——————————————— एक तेरा ही रूप फैला है कण-कण […]

संगीत सहित हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो भव-बंधन मेरे हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो भव-बंधन मेरे राम तुम्हीं हो भव-भय हरन वाले — 2 बार गायें काटो भव-बंधन मेरे ———————————— हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो […]

मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे ——————————————– मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम […]

प्रभु राम देना साथ हमारा हम किस मुख कहे कि, हम हैं दास तुम्हारा प्रभु राम देना साथ हमारा हम किस मुख कहे कि, हम हैं दास तुम्हारा ———————————————– प्रभु राम देना साथ हमारा हम […]

जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर वह भजन हैं तेरे लिए अमृत तुल(तुल्य) (2 बार गाये) ————————————————————————– जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर वह भजन हैं तेरे […]

संगीत सहित जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते हैं उनकी काया विकृतियों से दूर है जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते हैं उनकी काया विकृतियों से दूर है ————————————— जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते […]

राम, राम, राम तु रटते जा मन से मन की विकार तु हटाये जा राम से ही जन्मों का पाप धुलता राम से ही राम मिलता राम, राम, राम तु रटते जा मन से मन […]

जय श्री राम ———————- माता तुम्हीं हो जग के पिता है सबके राम दया करो मा जानकी हम हैं तेरी संतान —————————— माता तुम्हीं हो जग के पिता है सबके राम ।।1।। ——————————- जन्म तुम्हीं […]

जय श्री राम ———————— राम की सृष्टि, राम की माया राम का है ये जग सारा जिसने जाना मेरा यहाँ कुछ नहीं वहीं है प्रभु राम का प्यारा ।।1।। ———————————————— राम का प्यारा बन दुनिया […]

jay shri ram जब सब नर में तुम्हीं बसे हो राम तब क्यूँ किसी को रावण बनाते हो राम और क्यूँ किसी का बेड़ा पार लगाते हो राम —————————————————- जब सब नर में तुम्हीं बसे […]

जय श्री राम ———————– अपनी किरदार निभाने ही पड़ेंगे जो लिखा है, वो होना ही है सब मौन ना हो सकते जहां में कुछ कोलाहल भी जरूरी है ।।1।। ——————————————— सब मौन अगर हो जाये […]

जय श्री राम ——————— इतना भी कोई गिरा न होता मन पाप करता, मन डरता इसका मतलब ये नहीं कि नर नारायण ना होता ।।1।। —————————— माया तो मायापति की अर्ध्दांगनी है मन भी ईश्वर […]

क्यूँ मांगे हम हाथ तुम्हारा जब हमें तुम्हारी जरूरत नहीं, हम तुम्हारे काबिल नहीं, तुम हमारे मुनासिब नहीं ।। ——————————— क्यूँ मांगे हम हाथ तुम्हारा जब हमें तुम्हारी जरूरत नहीं ।।1।। —————————————– सुना है रिश्ता […]

चरित्र बदलो चित्र बदल जायेगा ब्रह्मचर्य का पालन करो सारी सांसारिक दुःख मिट जायेगा याद उसे करो जो देता है साथ सभी का ।।1।। —————————————– सभी में उसी का स्वरूप है कोई दैत्य तो कोई […]