सुबह तुम
बहुत मनोहर हो,
शीतल, शांत, साफ हो
बहुत मनोरम हो।
उड़गन का चहचहाना हो
नए फूलों का खिलना हो,
नई किरणों से मिलना हो
नई आशा जगाना हो,
बीती को भुलाना हो,
नया आगाज करना हो,
सुबह उपयुक्त हो सचमुच
बहुत सुंदर, मनोहर हो।
सुबह
Comments
One response to “सुबह”
-
प्रातः काल का बहुत सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.