हमारी हार हमारी जीत हो तुम
हे अर्द्धांगिनी ! मेरी प्रीत हो तुम
मेरे जीवन सफर की राजदार हो
मेरे प्रणय का परिहार हो
गीत की पहली पँक्ति सावन की बहार हो।
हे अर्द्धांगिनी! सर्वस्व हो तुम।
तुम संग जीवन के कितने
बसंत देखे हैं
सुख देखे हैं तो दुख अनेक देखे हैं
हर समय खड़ी रही तुम चट्टान सी
तुम्हारे संग मैनें अपने पराये देखे हैं ।
हे अर्द्धांगिनी! जीवन की बहार हो तुम।।
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