तरु भी नींद में हैं रजनी में

तरु भी नींद में हैं रजनी में
पत्ता पत्ता सोया है
सुनसान हुआ संसार,
बन्द हुआ कोलाहल सारा,
सोए सब थक हार।
तारे पहरेदारी करते
टिम-टिम टार्च टिकाते,
ऐसा लगता है धरती की
रक्षा का है भार,
चैन से सो रहा संसार।

Comments

One response to “तरु भी नींद में हैं रजनी में”

  1. रात्रि का अति सुन्दर वर्णन करती हुई बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

Leave a Reply

New Report

Close