रुक मत अब बस चलता चल

चल बंदेया हिम्मत कर और आगे बड़,
रुक मत अब बस चलता चल।

हिम्मत करेगा खुद तभी तो उठ पाएगा,
आखिर कब तक दूसरों की बातो से घुटता चला जाएगा ।

अभी इन रत्ती भर कंकड़ों से डरेगा यू,
तो चट्टानों – पहाड़ों का सामना कैसे करेगा तू ?

ज़िन्दगी तेरी है, तूने ही इसको जीना है ,
फिर क्यों लोगों का उगला जहर तूने पीना है?

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना,
सुनना मत किसी की, तू बस आगे बड़ते रहना।

कुछ करना है तो डटकर चल ,
थोड़ा सबसे हटकर चल,
भटकना नहीं अब किसी भी पल ,
तभी पाएगा तू अपनी महेनत का फल।

चल बंदेया हिम्मत कर और आगे बड़,
रुक मत अब बस चलता चल ।।

– By: Dishi Goyal

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